“Kanpur Friendly Insect Park: कानपुर में उत्तर प्रदेश का पहला मित्र कीट पार्क विकसित किया गया है। यह पार्क किसानों को प्राकृतिक कीट नियंत्रण तकनीक उपलब्ध कराएगा, जिससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी और फसल उत्पादन सुरक्षित बनेगा।“
कानपुर। कानपुर में उत्तर प्रदेश का पहला मित्र कीट पार्क विकसित किया गया है, जो किसानों को प्राकृतिक कीट नियंत्रण की दिशा में नई तकनीक उपलब्ध कराएगा। यह पार्क कृषि क्षेत्र में रासायनिक कीटनाशकों के विकल्प के रूप में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके जरिए फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों पर जैविक और पर्यावरण अनुकूल तरीके से नियंत्रण किया जा सकेगा।
यह मित्र कीट पार्क भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (IIPR) परिसर में विकसित किया गया है। परियोजना को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सहयोग से तैयार किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल प्रदेश के किसानों के लिए टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
पार्क का उद्देश्य किसानों को ऐसी प्राकृतिक तकनीक से जोड़ना है, जिसमें रासायनिक दवाओं का कम इस्तेमाल हो और फसलों की सुरक्षा पर्यावरण संतुलन के साथ की जा सके। यहां ऐसे पौधे लगाए गए हैं, जो मित्र कीटों को आकर्षित करते हैं। ये कीट फसल को नुकसान पहुंचाने वाले शत्रु कीटों को खाकर उनकी संख्या नियंत्रित करते हैं।
कीट वैज्ञानिक डॉ. नीलम यादव के अनुसार, मित्र कीट पार्क में फूलदार और औषधीय पौधों का विशेष चयन किया गया है। इन पौधों की उपस्थिति से लाभकारी कीटों का प्राकृतिक आवास तैयार होता है, जिससे खेतों में जैविक संतुलन बना रहता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक किसान अपने खेतों में भी इस मॉडल को अपना सकते हैं। लगभग एक हेक्टेयर क्षेत्र में खेती करने वाले किसान करीब 0.35 हेक्टेयर हिस्से में ऐसा पार्क विकसित कर सकते हैं। इसके लिए फसल के आसपास मौसम के अनुसार पौधरोपण करना होगा और रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग को सीमित या बंद करना होगा।
इस तकनीक से खेती की लागत कम होने की संभावना है, क्योंकि महंगे कीटनाशकों की जरूरत घटेगी। साथ ही मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी और जल व वायु प्रदूषण में कमी आएगी। जैविक तरीके से उगाई गई फसलें उपभोक्ताओं के लिए भी अधिक सुरक्षित मानी जाती हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मित्र कीट पार्क जैसे मॉडल भविष्य में प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे किसानों को टिकाऊ कृषि प्रणाली अपनाने का अवसर मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
प्रदेश में पहली बार विकसित इस पार्क को कृषि अनुसंधान और किसान प्रशिक्षण के लिए भी उपयोगी माना जा रहा है। आने वाले समय में यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है।
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