“Kashi Panchkoshi Yatra 2026 को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए BHU को यूरोपीय संघ का बड़ा प्रोजेक्ट मिला है। 8 देशों के 16 अंतरराष्ट्रीय संस्थान काशी की पौराणिक पंचकोशी यात्रा, धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पर रिसर्च करेंगे।“
वाराणसी। धर्म, अध्यात्म और सनातन परंपराओं की नगरी Varanasi की पौराणिक पंचकोशी यात्रा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की ओर बढ़ रही है। काशी की इस ऐतिहासिक धार्मिक परिक्रमा पर अब 8 देशों के विदेशी मेहमान और शोधकर्ता अध्ययन करेंगे। यूरोपीय संघ की ओर से धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण से जुड़ा एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट Banaras Hindu University को मिला है।
16 अंतरराष्ट्रीय संस्थान करेंगे शोध
“सेक्रेड ट्रैवल्स फॉर ग्रोथ: हायर एजुकेशन एंड सस्टेनेबल ग्रोथ थ्रू रिलीजियस टूरिज्म” नामक इस परियोजना के तहत दुनिया के 8 देशों के 16 संस्थान धार्मिक यात्राओं, उनकी परंपराओं और सांस्कृतिक संरक्षण पर संयुक्त रिसर्च करेंगे।
8 देशों के विदेशी मेहमान करेंगे 88 किलोमीटर की पौराणिक परिक्रमा, बीएचयू को मिला यूरोपीय संघ का बड़ा प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट से जुड़े प्रोफेसर प्रवीण राणा के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य भारत समेत दुनिया भर की प्राचीन धार्मिक यात्राओं के महत्व को समझना और उन्हें सतत विकास एवं धार्मिक पर्यटन से जोड़ना है।
यूरोप से मिली प्रेरणा, अब काशी पर फोकस
प्रोफेसर राणा ने बताया कि हाल ही में उन्हें स्पेन और माल्टा की धार्मिक यात्राओं और तीर्थ परंपराओं को करीब से देखने का अवसर मिला। वहां धार्मिक मार्गों और परंपराओं को बेहद व्यवस्थित ढंग से संरक्षित किया गया है।
उसी मॉडल से प्रेरणा लेते हुए अब काशी की पंचकोशी यात्रा को वैश्विक शोध और सांस्कृतिक संवाद का हिस्सा बनाया जा रहा है। उनका मानना है कि काशी की यह यात्रा विश्व स्तर पर विशेष पहचान बनाने की क्षमता रखती है।
विदेशी प्रतिनिधि करेंगे पंचकोशी यात्रा
परियोजना के तहत लगभग 24 से 25 विदेशी प्रतिनिधियों और शोधकर्ताओं को काशी आमंत्रित किया जाएगा। ये विदेशी मेहमान केवल घाट और मंदिर ही नहीं देखेंगे, बल्कि पंचकोशी यात्रा की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपरा को भी समझेंगे।
विदेशी शोधकर्ताओं को यात्रा मार्ग, स्थानीय संस्कृति, श्रद्धालुओं की आस्था और पारंपरिक धार्मिक व्यवस्थाओं से परिचित कराया जाएगा।
बीएचयू करेगा विस्तृत सर्वे
Banaras Hindu University अपने छात्रों के साथ मिलकर पंचकोशी यात्रा पर विस्तृत सर्वे कराने जा रहा है। इस रिसर्च में यह अध्ययन किया जाएगा कि धार्मिक स्थलों का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है और यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
रिसर्च में साफ-सफाई, सुरक्षा, बुनियादी सुविधाएं, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और स्थानीय लोगों की भागीदारी जैसे विषयों को भी शामिल किया जाएगा। इसके बाद पूरी रिपोर्ट प्रशासन और शोध संस्थानों के साथ साझा की जाएगी ताकि भविष्य की योजनाओं में उसका उपयोग किया जा सके।
88 किलोमीटर की पवित्र परिक्रमा
पंचकोशी यात्रा काशी की सबसे प्राचीन धार्मिक परिक्रमाओं में मानी जाती है। यह करीब 25 कोस यानी लगभग 88 किलोमीटर लंबी यात्रा है, जिसे श्रद्धालु पैदल पूरा करते हैं।
यह यात्रा पांच दिनों में पूरी होती है और इसके पांच प्रमुख पड़ाव हैं—कर्मदेश्वर महादेव, शिवपुर, रामेश्वरम, भीमचंडी और कपिलधारा। यात्रा की शुरुआत Manikarnika Kund से होती है, जहां श्रद्धालु संकल्प लेकर यात्रा प्रारंभ करते हैं और अंत में फिर वहीं पहुंचकर परिक्रमा पूर्ण करते हैं।
महाभारत काल से जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचकोशी यात्रा मोक्ष और वैभव प्रदान करती है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने भी यह यात्रा पूरी की थी, जिसके बाद उन्हें अपना खोया हुआ राज्य वापस मिला था।
काशी की यह आध्यात्मिक परंपरा अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान बनाने जा रही है, जिससे धार्मिक पर्यटन के साथ भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को भी वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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