अलीगंज अग्निकांड में नया खुलासा: 10 साल पहले अवैध घोषित हुई थी बिल्डिंग, अब उठे बड़े सवाल

जिस इमारत में लगी भीषण आग, उसके खिलाफ 2016 में जारी हुआ था ध्वस्तीकरण आदेश; दो माह में ही निरस्त होने पर उठे सवाल

अलीगंज अग्निकांड की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जिस बिल्डिंग में 15 छात्रों की मौत हुई, उसके खिलाफ 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया था, जिसे दो माह के भीतर निरस्त कर दिया गया। अब LDA की भूमिका और पुराने फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं।

लखनऊ। अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित जिस बहुमंजिला भवन में सोमवार को भीषण अग्निकांड हुआ और कई लोगों की जान चली गई, उससे जुड़े पुराने दस्तावेज अब गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। सामने आया है कि इसी भवन के खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण के आरोप में ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से दो माह से भी कम समय में वह आदेश निरस्त कर दिया गया था।

अग्निकांड के बाद भवन की वैधता, निर्माण प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। जांच एजेंसियां अब यह भी खंगाल रही हैं कि जिस इमारत को कभी अवैध निर्माण की श्रेणी में रखा गया था, उसमें बाद के वर्षों में व्यावसायिक गतिविधियां कैसे संचालित होती रहीं और संबंधित विभागों ने क्या कदम उठाए।

1980 में हुआ था भवन का आवंटन

दस्तावेजों के अनुसार अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी का आवंटन 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत विजय कुमार पुत्र रामेश्वर सहाय के नाम किराया-क्रय पद्धति पर किया गया था। 4 नवंबर 1980 को अनुबंध निष्पादित होने के बाद भवन का कब्जा आवंटी को सौंप दिया गया।

बाद में वर्ष 2005 में विक्रय विलेख के माध्यम से यह भवन विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज हुआ। इसके बाद 19 जनवरी 2013 को दोनों ने यह संपत्ति वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला के नाम बेच दी। 7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने दोनों नए स्वामियों के पक्ष में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर दी।

करीब 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले इस भवन का मानचित्र 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के अंतर्गत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था।

अवैध निर्माण पर हुई थी कार्रवाई

भवन के स्वामित्व परिवर्तन के बाद इसमें अनधिकृत निर्माण की शिकायतें सामने आईं। जांच के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या-08/2016 दर्ज किया।

मामले की सुनवाई के उपरांत विहित प्राधिकारी ने 10 मई 2016 को भवन में किए गए अनधिकृत निर्माण को गंभीर मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश पारित कर दिया। यह आदेश भवन के अवैध हिस्सों को हटाने और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जारी किया गया था।

दो माह में पलटा फैसला

सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि 10 मई 2016 को जारी ध्वस्तीकरण आदेश को मात्र 56 दिन बाद, 5 जुलाई 2016 को निरस्त कर दिया गया।

आदेश निरस्त होने के कारणों और उस समय प्रस्तुत किए गए तथ्यों की अब दोबारा जांच की मांग उठ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उस समय भवन की स्थिति और निर्माण मानकों की गहन समीक्षा की गई होती तो संभव है कि बाद में सामने आई कई गंभीर खामियों को समय रहते दूर किया जा सकता था।

एसआईटी जांच में खुल सकते हैं कई राज

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) अब भवन की पूरी निर्माण और स्वीकृति प्रक्रिया की पड़ताल कर सकता है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवन में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन की अनुमति कैसे मिली और क्या विभिन्न विभागों ने समय-समय पर निरीक्षण किया था।

एसआईटी के दायरे में भवन स्वामियों, मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया, अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र, स्थानीय प्रशासन और नियामक एजेंसियों की भूमिका भी शामिल हो सकती है।

उठ रहे हैं कई अहम सवाल

  • जिस भवन के खिलाफ ध्वस्तीकरण आदेश जारी हुआ था, उसे निरस्त करने का आधार क्या था?
  • क्या भवन में बाद में हुए निर्माण कार्यों की जांच की गई थी?
  • आवासीय मानचित्र पर स्वीकृत भवन में कोचिंग सेंटर, गेमिंग जोन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां किस अनुमति के तहत संचालित हो रही थीं?
  • अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं?
  • संबंधित विभागों ने समय-समय पर निरीक्षण क्यों नहीं किया?

लखनऊ अग्निकांड के बाद सामने आए इन तथ्यों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। अब लोगों की नजर एसआईटी जांच पर टिकी है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि वर्षों पुरानी फाइलों में दबे सवालों के जवाब सामने आएंगे और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होगी।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button