लखनऊ अग्निकांड पहुंचा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, 15 छात्रों की मौत पर NHRC में दर्ज हुई शिकायत

लखनऊ के अलीगंज कोचिंग सेंटर अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) पहुंच गया है। पूर्व क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजीव कुमार गुप्ता ने शिकायत दर्ज कर देशभर के कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा जांच और छात्रों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

प्रमुख बिंदु

  • लखनऊ अग्निकांड का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पहुंचा।
  • पूर्व क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजीव कुमार गुप्ता ने दर्ज कराई शिकायत।
  • एनएचआरसी ने शिकायत को डायरी संख्या 14383/IN/2026 के तहत दर्ज किया।
  • देशभर के कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा जांच की मांग।
  • दिल्ली (2024) और अहमदाबाद (2019) की घटनाओं का भी किया गया उल्लेख।
  • छात्रों के जीवन और सुरक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की मांग।

लखनऊ,। राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। इस दर्दनाक हादसे को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में न केवल लखनऊ की घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है, बल्कि देशभर में संचालित कोचिंग संस्थानों के सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा कराने की भी अपील की गई है।

नोएडा निवासी एवं पूर्व क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी तथा शिक्षक डॉ. राजीव कुमार गुप्ता ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दाखिल करते हुए छात्रों के जीवन और सुरक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। आयोग ने शिकायत को स्वीकार करते हुए डायरी संख्या 14383/IN/2026 के रूप में दर्ज कर लिया है।

“यह पहली घटना नहीं, बार-बार दोहराई जा रही त्रासदी”

डॉ. गुप्ता ने अपनी शिकायत में कहा है कि लखनऊ का अग्निकांड कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि देश में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों का एक और उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कोचिंग सेंटरों में कई बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन उनसे कोई प्रभावी सबक नहीं लिया गया।

उन्होंने अपने प्रार्थना पत्र में वर्ष 2024 में दिल्ली के राजेंद्र नगर स्थित कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में जलभराव से तीन छात्रों की मौत और वर्ष 2019 में अहमदाबाद के एक कोचिंग सेंटर में लगी आग में 22 छात्रों की मौत का उल्लेख किया है। शिकायत में कहा गया है कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं नियामक तंत्र की विफलता को उजागर करती हैं।

छोटे कमरों में पढ़ने को मजबूर छात्र

शिकायत में कहा गया है कि देश के अनेक शहरों में बड़ी संख्या में छात्र ऐसे भवनों और कमरों में पढ़ाई करने को विवश हैं, जहां अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास द्वार, वेंटिलेशन और अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं।

डॉ. गुप्ता ने आयोग को बताया कि कई कोचिंग संस्थान आवासीय भवनों या व्यावसायिक परिसरों में बिना समुचित सुरक्षा मानकों के संचालित हो रहे हैं, जिससे छात्रों का जीवन लगातार खतरे में बना रहता है।

पहले भी उठाया था मुद्दा

डॉ. राजीव कुमार गुप्ता ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर वह पहले भी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का ध्यान आकर्षित कर चुके हैं। हालांकि, उस शिकायत के बाद व्यापक स्तर पर कोई ठोस सुधार नहीं हो पाया, जिसके चलते ऐसी घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं।

पीड़ित छात्रों का किया उल्लेख

शिकायत में लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वाले छात्रों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि ये सभी युवा अपने भविष्य को संवारने के लिए कोचिंग संस्थान पहुंचे थे, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था की कथित कमी के कारण उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। शिकायत में मृतकों में शामिल मयंक गुप्ता समेत अन्य छात्रों का जिक्र करते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।

आयोग से की गईं प्रमुख मांगें

शिकायतकर्ता ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से निम्नलिखित मांगें की हैं—

  • लखनऊ अग्निकांड की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • देशभर के कोचिंग संस्थानों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।
  • सभी कोचिंग संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
  • आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण और सुरक्षा प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए।
  • छात्रों के जीवन और सुरक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दिशानिर्देश तैयार किए जाएं।
  • सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

राष्ट्रीय बहस का विषय बना हादसा

लखनऊ अग्निकांड के बाद कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर चुके हैं। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज होने के बाद इस मामले पर देशभर की नजरें टिक गई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस घटना के बाद भी सुरक्षा मानकों को लेकर व्यापक सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति को रोकना मुश्किल होगा।

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