
“लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर 23 बार सड़क धंसने और दरकने की जांच IIT खड़गपुर ने पूरी कर ली है। टीम ने 30 नमूने लिए और सात घंटे की पूछताछ रिकॉर्ड की। 12 दिन में NHAI को 800 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी जाएगी।“
लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर बार-बार सड़क धंसने और दरकने की असली वजह अब जल्द सामने आ सकती है। IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम ने एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड हिस्से की विस्तृत जांच पूरी कर ली है। टीम ने मौके से मिट्टी और सड़क से जुड़े करीब 30 नमूने, निर्माण एवं डिजाइन से जुड़े दस्तावेज और अधिकारियों व कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों से हुई पूछताछ की रिकॉर्डिंग जुटाई है।
IIT खड़गपुर के प्रोफेसर केएस रेड्डी के नेतृत्व में हुई इस जांच के आधार पर करीब 800 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। यह रिपोर्ट करीब 10 से 12 दिन में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) मुख्यालय को सौंपे जाने की संभावना है।
23 बार क्यों धंसी सड़क? जांच रिपोर्ट से खुलेगा राज
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड हिस्से में अलग-अलग स्थानों पर सड़क के धंसने और दरकने की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं ने एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता, डिजाइन, मिट्टी की स्थिति और ड्रेनेज व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने के लिए IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम को जांच की जिम्मेदारी दी गई। टीम ने एक्सप्रेसवे पर पहुंचकर प्रभावित और सामान्य दोनों स्थानों का अध्ययन किया।
जांच का खास हिस्सा यह रहा कि जहां सड़क धंसी या दरकी, वहां की मिट्टी की तुलना सामान्य हिस्से की मिट्टी से की जाएगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि सड़क की समस्या किसी खास स्थान की मिट्टी, जल निकासी, ढाल, निर्माण तकनीक या अन्य कारण से जुड़ी है।
800 पन्नों के दस्तावेज में क्या-क्या होगा?
IIT टीम ने जांच के दौरान एक्सप्रेसवे से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों का अध्ययन किया। इनमें सड़क की डिजाइन रिपोर्ट भी शामिल है। NHAI लखनऊ की टीम ने जांचकर्ताओं को संबंधित डिजाइन दस्तावेज उपलब्ध कराए।
इसके अलावा यह भी देखा गया कि कार्यदायी संस्था PNC ने मूल डिजाइन में किसी तरह का बदलाव तो नहीं किया था। सड़क निर्माण के दौरान डिजाइन और मौके पर किए गए कार्य के बीच किसी अंतर की स्थिति को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
रिपोर्ट में मौके से जुटाए गए नमूनों और जांच के दौरान सामने आए तकनीकी तथ्यों का विश्लेषण किया जाएगा।
7 घंटे की रिकॉर्डिंग भी जांच का अहम हिस्सा
जांच के दौरान IIT टीम ने कार्यदायी संस्था PNC, स्वतंत्र एजेंसी और NHAI अधिकारियों से सवाल-जवाब किए। इस पूरी प्रक्रिया की करीब सात घंटे की रिकॉर्डिंग भी कराई गई।
मौके की कई गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। इससे टीम को एक्सप्रेसवे की वास्तविक स्थिति, निर्माण स्थल और प्रभावित हिस्सों का तकनीकी आकलन करने में मदद मिलेगी।
30 सैंपल से होगी मिट्टी की जांच
IIT खड़गपुर की टीम ने एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों से करीब 30 नमूने लिए हैं। इनमें चार ऐसे प्रमुख स्थान भी शामिल हैं जहां सड़क अपेक्षाकृत ज्यादा धंसी या दरकी थी।
टीम ने ग्रीनफील्ड के सामान्य हिस्से से भी नमूने लिए हैं। इसका उद्देश्य प्रभावित और सामान्य हिस्से की मिट्टी में अंतर का पता लगाना है।
जांच के दौरान सूखी मिट्टी, गीली मिट्टी और जमीन की सतह से करीब ढाई से तीन मीटर नीचे की मिट्टी के नमूने भी लिए गए हैं।
इन नमूनों के परीक्षण से यह समझने में मदद मिलेगी कि जमीन की अंदरूनी स्थिति सड़क के धंसने की वजह बनी या नहीं।
कोरारी के पास ड्रेनेज सिस्टम में मिली बड़ी खामी
जांच के दौरान उन्नाव के कोरारी क्षेत्र के आसपास सड़क के धंसने से जुड़ी एक महत्वपूर्ण तकनीकी खामी सामने आई। यहां सड़क का लेवल ड्रेनेज सिस्टम यानी नालियों से ऊपर पाया गया।
इसका असर यह हुआ कि बारिश का पानी अपेक्षित तरीके से नालियों की ओर नहीं जा पा रहा था।
जांच टीम ने मौके पर पानी डालकर भी स्थिति को परखा। नालियों का हिस्सा तोड़े जाने के बाद पानी को सड़क पर डालकर देखा गया। कुछ स्थानों पर पानी टूटी हुई नालियों की तरफ जाने लगा, जबकि कई जगह पानी बीच में रुकता दिखाई दिया।
इससे सड़क की ढाल यानी स्लोप को लेकर भी सवाल सामने आए।
सड़क की ढाल और नालियों का लेवल सुधारने के निर्देश
मौके की स्थिति देखने के बाद IIT टीम ने प्रभावित हिस्से में सड़क की ढाल को ठीक करने और नालियों के लेवल में सुधार करने के निर्देश दिए।
खासकर कानपुर से लखनऊ की दिशा में आने वाले ग्रीनफील्ड हिस्से में जिन नालियों को तोड़ा गया है, उनका लेवल भी सही करने को कहा गया है।
हालांकि अंतिम निष्कर्ष IIT खड़गपुर की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
रिपोर्ट के बाद होगा सेफ्टी ऑडिट
NHAI को रिपोर्ट मिलने के बाद IIT टीम की तकनीकी सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट में अगर निर्माण, ड्रेनेज, मिट्टी, डिजाइन या सड़क की ढाल से संबंधित खामियां सामने आती हैं तो उन्हें दूर किया जाएगा।
इसके बाद लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का सेफ्टी ऑडिट भी कराया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सुधार के बाद सड़क यात्रियों के लिए सुरक्षित है या नहीं।
फिलहाल डायवर्जन हटाने का दावा
NHAI अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार देर रात से एक्सप्रेसवे पर लगाया गया डायवर्जन हटा दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल टोल वसूली शुरू नहीं की गई है और टोल कब से लिया जाएगा, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है।
NHAI के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल के अनुसार पिछले दो दिनों से ग्रीनफील्ड हिस्से में कोई नई समस्या सामने नहीं आई है और फिलहाल डायवर्जन भी नहीं है।
हालांकि एक्सप्रेसवे की स्थायी सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता पर अंतिम तस्वीर IIT खड़गपुर की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी।









