लखनऊ ने NHM रैंकिंग में हासिल किया प्रदेश में पहला स्थान, यूपी के लिए बना हेल्थ मॉडल

लखनऊ ने नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) रैंकिंग 2026 में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों और 18 मंडलों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के बेहतर प्रदर्शन ने राजधानी को प्रदेश का हेल्थ मॉडल बना दिया है।

लखनऊ। लखनऊ ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ताजा रैंकिंग में प्रदेश के सभी 75 जिलों और 18 मंडलों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन ने राजधानी को प्रदेश का हेल्थ मॉडल बना दिया है।

स्वास्थ्य सेवाओं में राजधानी का शानदार प्रदर्शन

लखनऊ ने एक बार फिर प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की ताजा रैंकिंग में राजधानी ने प्रदेश के सभी 75 जिलों और 18 मंडलों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक निगरानी का परिणाम मानी जा रही है।

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में यह उपलब्धि केवल राजधानी के लिए ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक सकारात्मक संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी मॉडल को अन्य जिलों में लागू किया जाए तो प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक सुधार संभव है।

इन मानकों पर तैयार होती है एनएचएम की रैंकिंग

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की रैंकिंग कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों के आधार पर तैयार की जाती है। इनमें संस्थागत प्रसव, पूर्ण टीकाकरण कवरेज, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, ओपीडी और आईपीडी सेवाओं की गुणवत्ता, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं की सक्रियता, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का संचालन तथा डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड का रखरखाव प्रमुख हैं।

लखनऊ ने इन सभी मानकों पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।

संस्थागत प्रसव और टीकाकरण में सुधार बना सफलता की कुंजी

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में संस्थागत प्रसव के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है, जिससे मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को नियंत्रित करने में मदद मिली है।

इसके साथ ही बच्चों के समय पर टीकाकरण में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने नियमित अभियान चलाकर टीकाकरण कवरेज को बढ़ाने का काम किया है।

हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़

राजधानी के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर मरीजों को दवाओं, जांच सुविधाओं और टेली-कंसल्टेशन की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे लोगों को छोटी बीमारियों के इलाज के लिए बड़े अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ रहा है।

ई-संजीवनी ओपीडी सेवा के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों से ऑनलाइन परामर्श की सुविधा ने भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत किया है।

आशा कार्यकर्ताओं की सक्रियता से मजबूत हुई जच्चा-बच्चा देखभाल

आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका इस उपलब्धि की बड़ी वजह मानी जा रही है। घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों की निगरानी, नियमित स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग के माध्यम से जच्चा-बच्चा की देखभाल को और बेहतर बनाया गया है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन कार्यकर्ताओं की नियमित मॉनिटरिंग और प्रशिक्षण ने भी सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ाने में अहम योगदान दिया है।

डेटा आधारित निगरानी और नियमित समीक्षा बैठकों का मिला फायदा

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा, डेटा आधारित निगरानी और फील्ड स्टाफ को समय-समय पर प्रशिक्षण दिए जाने से बेहतर परिणाम सामने आए हैं।

जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) स्तर पर मरीजों की संतुष्टि और सेवा गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही, आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने में भी तेजी आई है।

सीएमओ ने बताया आगे का लक्ष्य

डॉ. वी.पी. गुप्ता ने कहा कि प्रदेश में पहला स्थान हासिल करना उपलब्धि जरूर है, लेकिन यह अंतिम लक्ष्य नहीं है। आने वाले समय में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को और कम करने, गैर-संचारी रोगों की शत-प्रतिशत स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने तथा सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर डिजिटल रिकॉर्ड को अपडेट रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर रेफरल सिस्टम को भी और मजबूत बनाया जाएगा ताकि गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा सके।

प्रदेश के लिए रोल मॉडल बना लखनऊ का हेल्थ मॉडल

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की इस रैंकिंग ने यह साबित कर दिया है कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, तकनीक के बेहतर उपयोग और जमीनी स्तर पर मजबूत निगरानी के जरिए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

लखनऊ का यह मॉडल अब प्रदेश के अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बन सकता है। यदि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की यही गति जारी रही तो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की समग्र स्वास्थ्य रैंकिंग और हेल्थ इंडेक्स में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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