“अमित शाह ने लखनऊ में भाजपा कार्यसमिति की बैठक में 30 अक्टूबर 1990 के अयोध्या गोलीकांड को लेकर सपा और अखिलेश यादव पर निशाना साधा। राम मंदिर, परिवारवाद और जातिवाद के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच सियासी बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। शुक्रवार को लखनऊ में भाजपा उत्तर प्रदेश की दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक के पहले दिन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अयोध्या में 30 अक्टूबर 1990 को रामभक्तों पर हुई गोलीबारी का मुद्दा उठाकर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला।
डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रेक्षागृह में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए अमित शाह ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता रामभक्तों पर गोली चलवाने की घटना को नहीं भूली है और समाजवादी पार्टी को इसका राजनीतिक जवाब मिलता रहेगा।
शाह ने राम मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए भाजपा और सपा की राजनीति की तुलना की। उनके बयान से साफ संकेत मिला कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में राम मंदिर आंदोलन और 1990 की अयोध्या गोलीबारी को एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठाना चाहती है।
‘आपने रामभक्तों पर गोलियां चलाईं, हमने राम मंदिर बना दिया’
अमित शाह ने अपने संबोधन में 30 अक्टूबर 1990 की घटना का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन 1990 में अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं। इस घटना के लिए उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और समाजवादी पार्टी को जिम्मेदार ठहराते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा।
शाह ने कहा कि अखिलेश यादव को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके पिता मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में रामभक्तों पर गोलीबारी हुई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले राजनीतिक दल किस आधार पर दोबारा उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने की बात करते हैं।
उन्होंने कहा, ”आपने रामभक्तों पर गोलियां चलाईं, हमने राम मंदिर बना दिया।”
गृह मंत्री ने दावा किया कि अयोध्या की उस घटना को प्रदेश की जनता लंबे समय तक याद रखेगी और समाजवादी पार्टी को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
तीसरी पीढ़ी तक सपा को माफ नहीं करेगी जनता: अमित शाह
अमित शाह ने अपने संबोधन में अखिलेश यादव को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता रामभक्तों पर गोली चलवाने की घटना को नहीं भूली है। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी को इस घटना का राजनीतिक जवाब मिलता रहेगा।
शाह ने कहा कि जनता सपा और उसके नेतृत्व को इस मुद्दे पर माफ नहीं करेगी। उन्होंने राम मंदिर निर्माण को भाजपा के लंबे राजनीतिक संकल्प की पूर्ति बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने अपने वादों को पूरा किया है।
उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
राम मंदिर और अनुच्छेद 370 को बताया भाजपा की बड़ी उपलब्धि
अपने भाषण में अमित शाह ने राम मंदिर निर्माण के साथ जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने ऐसे मुद्दों पर फैसले लिए, जिन्हें कभी असंभव माना जाता था।
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का संकल्प पूरा हुआ। इसी तरह जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर भाजपा ने देश के सामने अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता साबित की।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से पार्टी की उपलब्धियों और विचारधारा को जनता तक पहुंचाने का आह्वान किया। शाह के मुताबिक, भाजपा अपने संकल्पों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर भी अमित शाह का हमला
केंद्रीय गृह मंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी निशाने पर लिया। उन्होंने राहुल गांधी के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा उत्तर प्रदेश में तीसरी बार सरकार बनाकर विपक्ष को जवाब देगी।
शाह ने भाजपा के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1984 में पार्टी ने लोकसभा में केवल दो सीटों से शुरुआत की थी। इसके बाद कार्यकर्ताओं के संघर्ष और संगठन की ताकत के दम पर भाजपा ने देश की राजनीति में अपना विस्तार किया।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध और तानों को भाजपा ने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें चुनौती के रूप में स्वीकार किया।
‘अंपायरों पर उंगली उठाने के बजाय चुनाव की तैयारी करें विपक्षी नेता’
अमित शाह ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर चुनावी हार के बाद चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं को चुनावी तैयारियों और अपनी राजनीतिक रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।
शाह ने कटाक्ष करते हुए कहा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव चुनाव की तैयारी करने के बजाय अंपायरों पर उंगली उठा रहे हैं।
उन्होंने संसद के विशेष सत्र में चर्चा की चुनौती का भी उल्लेख किया। शाह ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा और एनडीए का विस्तार लगातार जारी है।
जातिवाद, परिवारवाद और भ्रष्टाचार को लेकर विपक्ष पर निशाना
अमित शाह ने अपने भाषण में जातिवाद, परिवारवाद और भ्रष्टाचार को भारतीय राजनीति की बड़ी चुनौतियां बताया। उन्होंने विपक्षी दलों पर इन राजनीतिक प्रवृत्तियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
शाह ने कहा कि भाजपा इन चुनौतियों के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच सक्रिय रहने की अपील की।
2027 के चुनाव से पहले राम मंदिर और अयोध्या गोलीकांड फिर बने सियासी मुद्दा
लखनऊ में अमित शाह का यह संबोधन ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा की रणनीति में राम मंदिर निर्माण, अयोध्या आंदोलन और विपक्ष के पुराने राजनीतिक फैसलों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भाजपा सरकार को बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक न्याय और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर घेरते रहे हैं।
ऐसे में अमित शाह का 30 अक्टूबर 1990 की घटना का उल्लेख करना केवल ऐतिहासिक प्रसंग नहीं, बल्कि आगामी चुनाव के लिए राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में भाजपा और सपा के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
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