“पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने सैन्य और परमाणु कमान ढांचे से जुड़े दो अहम विधेयक पारित किए हैं। इनमें डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट, 2026 और नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट में संशोधन शामिल हैं। अब दोनों विधेयकों को सीनेट की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।“
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने गुरुवार को सैन्य ढांचे और परमाणु कमान व्यवस्था से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिए। इन विधेयकों का उद्देश्य पिछले वर्ष हुए 27वें संविधान संशोधन के बाद सैन्य व्यवस्था में किए गए बदलावों को कानूनी रूप देना और कमान की नई संरचना को स्पष्ट करना है।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने निचले सदन में डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट, 2026 और नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट, 2010 में संशोधन से जुड़े विधेयक पेश किए। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी इस दौरान नेशनल असेंबली में मौजूद रहे।
27वें संविधान संशोधन के बाद बदली सैन्य कमान व्यवस्था
पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन के बाद सैन्य कमान व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए थे। इसके तहत चेयरमैन ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी का पद समाप्त कर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) का नया पद बनाया गया।
इस पद की जिम्मेदारी फिलहाल सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पास है। नए विधेयक के जरिए CDF के अधिकारों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है।
CDF होंगे सशस्त्र बलों के प्रमुख कमांडर
प्रस्तावित डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट के मसौदे के मुताबिक, CDF को पाकिस्तान के सशस्त्र बलों की कमान से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाएंगी। इसके लिए डिफेंस फोर्सेज हेडक्वार्टर स्थापित करने का प्रावधान किया गया है।
यह मुख्यालय सशस्त्र बलों के केंद्रीय मुख्यालय के तौर पर काम करेगा और सीधे CDF के अधीन होगा।
मसौदे के अनुसार, CDF प्रधानमंत्री के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और सशस्त्र बलों से जुड़े मामलों में प्रमुख सैन्य सलाहकार की भूमिका निभाएंगे।
ऑपरेशनल कमान और नियंत्रण भी CDF के पास
प्रस्तावित कानून में CDF को सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल कमान और नियंत्रण से जुड़ी महत्वपूर्ण शक्तियां देने का प्रावधान है। साथ ही कमान और नियंत्रण से संबंधित मामलों में CDF संघीय सरकार के प्रति जवाबदेह होंगे।
मसौदे में कहा गया है कि CDF सशस्त्र बलों के बीच संयुक्त संचालन, समन्वय और रणनीतिक मामलों की निगरानी सुनिश्चित करेंगे।
तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
नए कानून का एक प्रमुख उद्देश्य पाकिस्तान की थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच मल्टी-डोमेन इंटीग्रेशन और संयुक्त संचालन को मजबूत करना बताया गया है।
मसौदे में ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन, संयुक्त रणनीतिक योजना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।
CDF को अधिकारियों के संबंध में भी शक्तियां
मसौदे के मुताबिक CDF को सशस्त्र बलों से जुड़े कानूनों के तहत आने वाले अधिकारियों और कर्मियों के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक शक्तियां मिल सकती हैं।
इनमें सेवानिवृत्ति, सेवा से मुक्त करने, इस्तीफा स्वीकार या अस्वीकार करने, सेवा में बनाए रखने तथा निर्धारित आयु या सेवा सीमा से जुड़े मामलों में निर्णय लेने की शक्तियां शामिल हैं। हालांकि संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत नियुक्त अधिकारियों पर इन प्रावधानों की सीमा अलग होगी।
परमाणु कमान व्यवस्था में भी बदलाव
दूसरा विधेयक नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट, 2010 में संशोधन से जुड़ा है। यह बदलाव पाकिस्तान की रणनीतिक और परमाणु कमान व्यवस्था में किए गए नए प्रावधानों को कानूनी आधार देने के लिए लाया गया है।
27वें संविधान संशोधन के बाद पाकिस्तान ने कमांडर ऑफ द नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड (CNSC) का पद भी बनाया था। यह चार सितारा पद पाकिस्तान की रणनीतिक सेनाओं के ऑपरेशनल एकीकरण से जुड़ा है।
जनरल आमेर रजा बने पहले CNSC
पिछले महीने लेफ्टिनेंट जनरल के पद से पदोन्नत कर जनरल सैयद आमेर रजा को नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड का पहला कमांडर नियुक्त किया गया था।
अब नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट में संशोधन के जरिए इस नई व्यवस्था को औपचारिक कानूनी ढांचा देने की कोशिश की गई है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया जरूरी प्रक्रिया
संघीय कैबिनेट की बैठक के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दोनों विधेयक 27वें संविधान संशोधन के तहत किए गए बदलावों की निरंतरता में तैयार किए गए हैं।
सरकार के मुताबिक डिफेंस फोर्सेज एक्ट का उद्देश्य CDF और उनके मुख्यालय से जुड़े प्रशासनिक मामलों को निर्धारित करना है, जबकि नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट में संशोधन को नए संवैधानिक ढांचे के बाद जरूरी प्रक्रिया बताया गया है।
अभी कानून नहीं बने हैं विधेयक
नेशनल असेंबली से पारित होने के बावजूद दोनों विधेयक अभी कानून नहीं बने हैं। इन्हें अब पाकिस्तान की सीनेट से पारित होना होगा। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर ही ये विधेयक कानून का रूप ले सकेंगे।
इस तरह पाकिस्तान में सैन्य और रणनीतिक कमान की नई व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








