Public Examination Amendment Bill 2026 पर संसद के मानसून सत्र में जोरदार बहस हुई। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने NTA चेयरमैन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए, जबकि केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने UPA सरकार के दौरान हुए पेपर लीक मामलों का जिक्र किया।
नई दिल्ली। Public Examination Amendment Bill 2026 को लेकर संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को लोकसभा में तीखी बहस देखने को मिली। परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की भूमिका को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव हुआ।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने चर्चा के दौरान आरोप लगाया कि यदि 2024 में गठित व्यवस्था इतनी प्रभावी थी तो पेपर लीक की घटनाएं कैसे हुईं। उन्होंने कहा कि सरकार NTA के चेयरमैन को बचाने का प्रयास कर रही है।
वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर लगातार सवाल उठे हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में कई भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जिससे युवाओं का भरोसा प्रभावित हुआ।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पेपर लीक की घटनाएं केवल वर्तमान सरकार तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने UPA शासनकाल के दौरान रेलवे भर्ती बोर्ड, AIIMS प्रवेश परीक्षा, AIEEE, पश्चिम बंगाल जॉइंट एंट्रेंस, उत्तर प्रदेश बीएड प्रवेश परीक्षा और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने Public Examination (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 लागू किया और अब उसे और प्रभावी बनाने के लिए संशोधन लाया गया है।
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा के पक्ष में है और आवश्यकता पड़ने पर 10 घंटे तक बहस कराने के लिए भी तैयार है।
उधर, राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने Micro, Small and Medium Enterprises Development (Amendment) Bill, 2026 भी पेश किया।
Public Examination Amendment Bill 2026 को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, संगठित नकल और पेपर लीक पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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