“चीनी की कीमत देश के अधिकांश खुदरा बाजारों में ₹60 प्रति किलो के पार बनी हुई है। औसत खुदरा भाव ₹64.24 पहुंचा, जबकि दिल्ली में ₹62 और मुंबई में ₹66 किलो भाव दर्ज हुआ।“
नई दिल्ली। चीनी की कीमतों में तेजी का असर देशभर के उपभोक्ताओं पर बना हुआ है। सरकार की ओर से कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों के बावजूद अधिकांश खुदरा बाजारों में चीनी 60 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर बिक रही है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 30 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा भाव 64.24 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया।
एक सप्ताह पहले चीनी का औसत खुदरा भाव 63.12 रुपये प्रति किलोग्राम था। इस तरह एक सप्ताह के भीतर कीमत में करीब 1.77 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, एक महीने पहले की तुलना में चीनी की कीमत करीब 30 प्रतिशत अधिक हो चुकी है।
दिल्ली-मुंबई समेत इन शहरों में क्या है चीनी का भाव
शहरों के हिसाब से चीनी की कीमत में अंतर देखने को मिल रहा है। रविवार को दिल्ली में चीनी 62 रुपये प्रति किलोग्राम, मुंबई में 66 रुपये, चेन्नई में 63 रुपये और रांची में 68 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रही थी।
आंकड़ों के मुताबिक, 30 अगस्त को चीनी का अधिकतम खुदरा भाव 74 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जबकि न्यूनतम कीमत 40 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई।
थोक बाजार में भी बढ़े दाम
खुदरा बाजार के साथ थोक बाजार में भी चीनी की कीमत में तेजी दर्ज की गई है। 30 अगस्त को चीनी का औसत थोक भाव 59.73 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। एक सप्ताह पहले थोक बाजार में यही कीमत 58.66 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
इससे साफ है कि खुदरा बाजार में कीमतों पर दबाव केवल उपभोक्ता स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि थोक बाजार में भी तेजी बनी हुई है।
शुल्क-मुक्त आयात के बाद भी नहीं घटे खुदरा भाव
चीनी की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इस फैसले के बाद मिल स्तर पर चीनी की कीमत में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट भी आई है। हालांकि, इसका असर अभी तक खुदरा बाजार में अपेक्षित रूप से दिखाई नहीं दे रहा है।
सरकार के कदमों का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को फिलहाल ऊंची कीमत पर चीनी खरीदनी पड़ रही है।
आगे कीमतों पर नजर
चीनी की कीमत में लगातार बनी तेजी के बीच सरकार और बाजार दोनों की नजर आपूर्ति तथा खुदरा कीमतों पर है। शुल्क-मुक्त आयात और मिल स्तर पर कीमतों में आई गिरावट का असर आने वाले दिनों में खुदरा बाजार तक पहुंचता है या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
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