लद्दाख में सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन: 18,600 फीट पर घायल को बचाने उतरा चीता हेलीकॉप्टर, एक तरफ स्किड हवा में

लद्दाख में सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन 18,600 फीट की ऊंचाई पर नुन-कुन के पास चलाया गया। चीता हेलीकॉप्टर ने जोखिम भरी ढलान पर लैंडिंग कर घायल व्यक्ति को सुरक्षित निकाला।

जम्मू। लद्दाख में सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। भारतीय सेना के एविएशन कोर के पायलटों ने नुन-कुन चोटी के पास करीब 18,600 फीट की ऊंचाई पर एक घायल व्यक्ति को बचाने के लिए चीता हेलीकॉप्टर को बेहद जोखिम भरी ढलान पर उतारा और उसे सुरक्षित बाहर निकाला।

यह अभियान कारगिल की सुरू घाटी के पास चलाया गया। इलाके की ऊंचाई, तेज हवाओं और बेहद सीमित लैंडिंग स्पेस के कारण हेलीकॉप्टर की सुरक्षित लैंडिंग बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद सेना के पायलटों ने असाधारण साहस और सटीकता का परिचय दिया।

एक तरफ से ढलान पर उतारा हेलीकॉप्टर

रेस्क्यू अभियान की सबसे बड़ी चुनौती ढलान पर हेलीकॉप्टर उतारना था। ऐसी स्थिति में हेलीकॉप्टर अपने भार के कारण फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त हो सकता था। जोखिम को कम करने के लिए हेलीकॉप्टर से गैर-जरूरी उपकरण हटाकर उसका वजन कम किया गया।

इसके अलावा ईंधन भी सीमित मात्रा में रखा गया। अत्यधिक ऊंचाई पर उड़ान और लैंडिंग के दौरान हेलीकॉप्टर के प्रदर्शन को बेहतर बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया।

इसके बाद चीता हेलीकॉप्टर को ढलान पर उसके स्किड टाइप लैंडिंग गियर के केवल एक हिस्से के सहारे उतारा गया। हेलीकॉप्टर का दूसरा हिस्सा हवा में रहा। इस बेहद जोखिम भरे तरीके से पायलटों ने घायल व्यक्ति तक पहुंच बनाई और उसे सुरक्षित बाहर निकाला।

नुन-कुन क्षेत्र में बेहद कठिन परिस्थितियां

नुन-कुन की जुड़वां चोटियों की ऊंचाई करीब 23 हजार फीट तक है। इस क्षेत्र में पर्वतारोहियों को बेहद कम ऑक्सीजन और कठिन मौसम का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बीमार या घायल होने पर उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।

इसी तरह की स्थिति में सेना की एविएशन टीम ने कैजुअल्टी एवैक्यूएशन मिशन को अंजाम दिया। दुर्गम ढलान, तेज हवाओं और हेलीकॉप्टर उतारने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने के बावजूद अभियान को सफल बनाया गया।

रोशनी कम होने से पहले पूरा करना था मिशन

इस अभियान की चुनौती इसलिए भी अधिक थी क्योंकि इसे दिन में उपलब्ध आखिरी लैंडिंग विंडो के दौरान शुरू किया गया था। रोशनी कम होने के बाद इस क्षेत्र में बचाव अभियान चलाना बेहद मुश्किल हो सकता था।

भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर के अनुसार, शनिवार शाम को अत्यधिक ऊंचाई और प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच पायलटों ने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया।

घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया

रेस्क्यू के बाद घायल व्यक्ति को इलाज के लिए जल्द अस्पताल पहुंचाया गया। सेना ने इस अभियान को अपने एविएटर्स के कौशल, साहस, दृढ़ संकल्प और मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण बताया।

18,600 फीट की ऊंचाई पर सीमित जगह और कठिन मौसम के बीच किया गया यह अभियान दिखाता है कि भारतीय सेना की एविएशन टीमें विषम परिस्थितियों में भी जान बचाने के लिए किस स्तर की जोखिम लेने वाली उड़ानें संचालित करती हैं।

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