राहुल गांधी के मार्च और नारेबाजी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, 23 नवंबर को अगली सुनवाई

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च के दौरान कथित हंगामे और नारेबाजी के मामले में शीर्ष अदालत 23 नवंबर को सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

दरअसल, यह याचिका राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं के मार्च के दौरान कथित तौर पर हुई नारेबाजी और हंगामे को लेकर दाखिल की गई है। इस मार्च में इंडिया ब्लॉक के कई नेता शामिल हुए थे। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अपनी चिंता जताई थी।

अदालत परिसर में राजनीतिक प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग

इस मामले में चार वकीलों की ओर से याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राजनीतिक दलों और नेताओं को अदालत परिसर में जुलूस निकालने, नारेबाजी करने या किसी भी तरह का प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

याचिका में दलील दी गई है कि इस तरह की गतिविधियों से न्यायिक कामकाज प्रभावित हो सकता है। साथ ही, अदालत पर दबाव बनाने की कोशिश भी हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के लिए समान दिशा-निर्देश की मांग

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट और देश के सभी हाईकोर्ट परिसरों के आसपास राजनीतिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए एक समान दिशा-निर्देश बनाने की मांग की है।

अब सुप्रीम कोर्ट 23 नवंबर को इस मामले की सुनवाई करेगा। इस दौरान केंद्र सरकार, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव समेत अन्य संबंधित पक्षों के जवाब पर विचार किया जाएगा।

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