“Surha Tal Ramsar Site: बलिया स्थित सुरहा ताल को भारत के 100वें रामसर स्थल का दर्जा मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उपलब्धि पर खुशी जताई। जानिए सुरहा ताल की विशेषताएं, जैव विविधता और यूपी की 13 रामसर साइटों के बारे में।“
लखनऊ/बलिया। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश को बड़ी पर्यावरणीय उपलब्धि मिली है। बलिया स्थित जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) को भारत के 100वें रामसर स्थल (Ramsar Site) का दर्जा प्रदान किया गया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सुरहा ताल का रामसर सूची में शामिल होना देश की आर्द्रभूमियों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह स्थल पक्षी जैव विविधता से समृद्ध है और यहां बड़ी संख्या में स्थानीय तथा प्रवासी पक्षी आते हैं।

पीएम मोदी ने क्या कहा
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा कि भारत ने आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया है। सामुदायिक भागीदारी, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से इन क्षेत्रों के संरक्षण को नई गति मिली है।
पूर्वांचल की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि है सुरहा ताल
बलिया जिले में स्थित सुरहा ताल, गंगा और घाघरा नदी के प्रभाव क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि है। यह क्षेत्र सर्दियों में साइबेरिया और मध्य एशिया से आने वाले हजारों प्रवासी पक्षियों का आश्रय स्थल बनता है। यहां दुर्लभ जलीय वनस्पतियां और विभिन्न प्रजातियों के जीव-जंतु भी पाए जाते हैं, जिससे इसकी पारिस्थितिक महत्ता और बढ़ जाती है।

सीएम योगी को सौंपा गया प्रमाणपत्र
उत्तर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने रामसर स्थल घोषित होने का प्रमाणपत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताते हुए इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।
इको-टूरिज्म और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि रामसर स्थल का दर्जा मिलने से सुरहा ताल के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संसाधनों की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे।

क्या है रामसर साइट?
रामसर स्थल ऐसे आर्द्रभूमि क्षेत्रों को कहा जाता है जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारिस्थितिक महत्व के कारण संरक्षण के लिए मान्यता दी जाती है। यह मान्यता 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुए रामसर कन्वेंशन के तहत दी जाती है। भारत ने इस संधि को 1982 में अपनाया था।
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