TMC को बड़ा झटका: राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने दिया इस्तीफा, ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें

लगातार तीसरे सांसद के इस्तीफे से टीएमसी की बढ़ी मुश्किलें, राज्यसभा में घट सकता है संख्या बल

TMC सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। ममता बनर्जी की पार्टी को लगातार तीसरा झटका लगा है। जानिए पश्चिम बंगाल की राजनीति, TMC संकट, कांग्रेस विलय की अटकलें और राज्यसभा समीकरण पर इसका क्या असर पड़ेगा।

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee को गुरुवार को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब पार्टी के राज्यसभा सांसद Prakash Chik Baraik ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस छोड़ने वाले सांसदों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है, जिससे पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक उथल-पुथल और भी गहरा गई है।

प्रकाश चिक बड़ाईक का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब इससे पहले वरिष्ठ सांसद Sukhendu Sekhar Roy और Sushmita Dev भी राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। लगातार हो रहे इन इस्तीफों से संसद के उच्च सदन में तृणमूल कांग्रेस की ताकत कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।

सभापति को सौंपा इस्तीफा

राज्यसभा के सभापति C. P. Radhakrishnan को भेजे अपने इस्तीफे में प्रकाश चिक बड़ाईक ने तत्काल प्रभाव से सदस्यता छोड़ने की घोषणा की। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि वह राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे रहे हैं और इसे तुरंत स्वीकार किया जाए।

अपने पत्र में बड़ाईक ने सभापति, उपसभापति और राज्यसभा सचिवालय के अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान उन्हें पूरा सहयोग और समर्थन मिला।

टीएमसी की राज्यसभा में संख्या घटने की आशंका

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, बड़ाईक के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की संख्या घटकर लगभग 10 रह सकती है। पार्टी के लिए चिंता की बात यह भी है कि आने वाले दिनों में कुछ और सांसदों के इस्तीफे की चर्चाएं तेज हैं।

यदि यह सिलसिला जारी रहता है तो संसद में टीएमसी की स्थिति और कमजोर हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे विपक्षी राजनीति में पार्टी की भूमिका भी प्रभावित हो सकती है।

पार्टी के भीतर बढ़ रही असंतोष की लहर

लगातार हो रहे इस्तीफों ने तृणमूल कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है। पार्टी के कई नेताओं के बीच मतभेद और नेतृत्व को लेकर असंतोष की खबरें लंबे समय से सामने आती रही हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इन चर्चाओं को और बल दे दिया है।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि आने वाले दिनों में पार्टी के कुछ और वरिष्ठ नेता बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि टीएमसी नेतृत्व की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कांग्रेस में विलय की अटकलों को बागी गुट ने किया खारिज

इस बीच, बागी टीएमसी नेता Ritabrata Banerjee ने पार्टी के किसी गुट के कांग्रेस में विलय की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ विधायकों का समर्थन लगातार बढ़ रहा है और यह पूरी तरह संगठन का आंतरिक मामला है।

उन्होंने कहा कि न तो विधायक दल और न ही सांसदों का कोई समूह कांग्रेस में शामिल होने जा रहा है। उनके अनुसार, पार्टी के विभिन्न स्तरों के जनप्रतिनिधि किसी विलय प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं।

अधीर रंजन चौधरी ने बनाई दूरी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Adhir Ranjan Chowdhury ने भी टीएमसी और कांग्रेस के संभावित विलय की चर्चाओं से खुद को अलग रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह की किसी बातचीत या प्रस्ताव की जानकारी नहीं है।

चौधरी ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में कोई आधिकारिक निर्णय सामने आता है, तभी वह इस विषय पर टिप्पणी करेंगे।

सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद बढ़ीं नई चर्चाएं

उधर, राज्यसभा सभापति ने 10 जून से प्रभावी रूप से सुष्मिता देव का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि वह अब असम की राजनीति और जनसरोकारों पर अधिक ध्यान देना चाहती हैं।

हाल ही में उनकी Himanta Biswa Sarma से मुलाकात के बाद उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। हालांकि सुष्मिता देव ने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा है कि उनका निर्णय व्यक्तिगत और राजनीतिक कारणों से प्रेरित है, न कि किसी अवसरवादी राजनीति का हिस्सा।

राजनीतिक असर पर नजर

लगातार हो रहे इस्तीफों ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, संगठनात्मक एकजुटता और भविष्य की रणनीति को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यदि और सांसद या विधायक पार्टी छोड़ते हैं, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति की दिशा को भी प्रभावित कर सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व की अगली रणनीति पर टिकी हैं।

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