“केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने के लिए संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। जानिए नए कानून और प्रस्तावित बदलावों की पूरी जानकारी।“
नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के सम्मान को लेकर केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में संशोधन करने वाला विधेयक पेश कर सकती है। प्रस्तावित बदलाव के बाद वंदे मातरम का अपमान करना या उसके गायन में बाधा डालना कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक’ संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है। इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत को भी उन राष्ट्रीय प्रतीकों की श्रेणी में शामिल करना है, जिनके अपमान पर कानून के तहत कार्रवाई की जाती है।
राष्ट्रीय प्रतीकों के समान मिलेगी सुरक्षा
मौजूदा कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और संविधान जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान को अपराध माना जाता है। प्रस्तावित संशोधन के बाद राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को भी इसी तरह की कानूनी सुरक्षा मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।
यदि यह विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पारित हो जाता है, तो वंदे मातरम के अपमान या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान लागू हो सकता है।
कैबिनेट से मिल चुकी है मंजूरी
रिपोर्ट के अनुसार, इस संशोधन विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि संसद में इसे कब पेश किया जाएगा, इसका अंतिम फैसला मानसून सत्र शुरू होने के बाद किया जाएगा।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण कानून में भी बदलाव
मानसून सत्र में सरकार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक भी ला सकती है। प्रस्ताव के अनुसार, दो साल से अधिक समय बाद जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए प्रक्रिया को सख्त किया जा सकता है।
नए प्रावधानों के तहत ऐसे मामलों में पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे जजों के पद
इसके अलावा संसद में सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक भी पेश किया जा सकता है। इसके जरिए सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने संबंधी अध्यादेश को कानून का रूप दिया जाएगा।
प्रस्ताव के तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रावधान है।
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