
राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क अज़ान खीरी : तहसील गोला में प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा एक गरीब किसान को भुगतना पड़ रहा है। ग्राम रोशन नगर निवासी कमलेश कुमार पुत्र बाबूराम का धारा-38 के तहत नामांतरण का मामला कई महीनों से एसडीएम न्यायालय में लंबित है, जबकि सभी स्तरों की जांच रिपोर्ट में मामला स्पष्ट बताया जा चुका है। जानकारी के अनुसार कमलेश कुमार ने जमीन का विधिवत बैनामा कराया और नियमानुसार दाखिल-खारिज के लिए प्रार्थना पत्र दिया। लेखपाल, भूलेख निरीक्षक एवं तहसीलदार की आख्या में किसी प्रकार का विवाद नहीं पाया गया, इसके बावजूद अब तक नामांतरण का आदेश पारित नहीं किया गया है।
आरोप है कि तहसील के लिपिक की गलती से विक्रेता का नाम खतौनी से नहीं हटाया गया, लेकिन इसका खामियाजा क्रेता किसान को भुगतना पड़ रहा है। फाइल को लंबे समय तक लंबित रखने के बाद किसान को तलब किया गया।
पीड़ित किसान का कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह समय पर उपस्थित नहीं हो सका, जिसके बाद तहसील प्रशासन ने सभी रिपोर्ट स्पष्ट होने के बावजूद विक्रेता पक्ष को नोटिस जारी कर दिए, जिससे मामला और उलझ गया इस प्रकरण ने तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब गलती सिस्टम की है तो सजा किसान को क्यों दी जा रही है और जब सभी जांच रिपोर्ट स्पष्ट हैं तो आदेश में देरी क्यों हो रही है किसान नेताओं ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि धारा-38 के तहत नामांतरण का निस्तारण 45 दिनों में होना चाहिए, लेकिन यहां महीनों बीत जाने के बाद भी न्याय नहीं मिला है। पीड़ित किसान कमलेश कुमार ने जिला प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर शीघ्र न्याय दिलाने की मांग की है।








