“वाराणसी जिले में PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के तहत Solar Chaupal Model से मात्र ₹310 EMI पर सोलर प्लांट लग रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती और स्वच्छ बिजली उपलब्ध हो रही है।“
हाइलाइट्स:
- ₹310 मासिक EMI पर 2KW सोलर प्लांट
- PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana का प्रभाव
- Solar Chaupal Model से ग्रामीणों को फायदा
- CSR और सब्सिडी से घटा आर्थिक बोझ
- वाराणसी में 1000+ परिवारों को लाभ
वाराणसी। ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में वाराणसी ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के अंतर्गत शुरू किया गया “सोलर चौपाल मॉडल” अब गांव-गांव में रोशनी फैलाने का माध्यम बन रहा है। इस अभिनव पहल के जरिए अब ग्रामीण परिवार मात्र ₹310 प्रतिमाह की आसान किस्त पर अपने घरों में 2 किलोवाट का सौर संयंत्र लगवा सकते हैं।
इस योजना का उद्देश्य उन चुनौतियों को समाप्त करना है, जो अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा अपनाने में बाधा बनती थीं—जैसे प्रारंभिक लागत, वित्तीय संसाधनों की कमी और तकनीकी जानकारी का अभाव। Uttar Pradesh New and Renewable Energy Development Agency, ग्राम पंचायत, बैंक, डिस्कॉम, स्वयं सहायता समूहों और अधिकृत विक्रेताओं को एक मंच पर लाकर इन सभी समस्याओं का समाधान “सोलर चौपाल” के माध्यम से किया गया है।
कैसे काम करता है मॉडल?
प्रारंभिक चरण (सोलर चौपाल 1.0) में उपभोक्ताओं को कोई अग्रिम राशि नहीं देनी पड़ती थी।
- 2 किलोवाट सौर संयंत्र की कुल लागत लगभग ₹1.30 लाख
- करीब ₹90,000 तक की सरकारी सब्सिडी
- शेष ₹27,000 बैंक ऋण के रूप में
- जिसे 10 वर्षों तक लगभग ₹310 प्रतिमाह की EMI में चुकाया जाता है
इसमें Bank of Baroda की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसने ग्रामीणों को आसान ऋण उपलब्ध कराया।
नया संस्करण: सोलर चौपाल 2.0
समय के साथ यह महसूस हुआ कि अत्यंत गरीब परिवारों के लिए ₹310 की किस्त भी बोझ बन सकती है। इसके समाधान के रूप में “सोलर चौपाल 2.0” विकसित किया गया, जिसमें अब उपभोक्ता पर वित्तीय भार लगभग समाप्त कर दिया गया है।
इस उन्नत मॉडल में CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) के तहत कई संस्थाएं जुड़ी हैं, जैसे:
- Airports Authority of India
- United Nations Development Programme
- UN Global Compact Network India
इन संस्थाओं के सहयोग से शेष लागत भी वहन की जा रही है, जिससे लाभार्थियों को लगभग मुफ्त सौर संयंत्र मिल रहा है।
लागत में भी आई कमी
ओपन टेंडर प्रक्रिया अपनाने से सौर संयंत्र की लागत में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है:
- पहले लागत: ₹1.30 लाख
- अब घटकर: ₹1.06 लाख
- यानी लगभग 18–20% की बचत
1000+ परिवारों तक पहुंचा लाभ
अब तक इस मॉडल के जरिए वाराणसी में 1000 से अधिक ग्रामीण परिवारों को सौर ऊर्जा का लाभ मिल चुका है। “सोलर चौपाल” के माध्यम से ऑन-द-स्पॉट पंजीकरण, ऋण स्वीकृति, तकनीकी सहायता और सेवा समर्थन जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
वाराणसी का “सोलर चौपाल मॉडल” न केवल ऊर्जा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी पहल है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का भी मजबूत माध्यम बनकर उभरा है।
यह मॉडल साबित करता है कि सरकारी योजनाओं, वित्तीय नवाचार और सामुदायिक भागीदारी के संयोजन से ग्रामीण भारत में स्थायी विकास की नई राह बनाई जा सकती है।









