पेंशन सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, 100% FDI को मिल सकती है मंजूरी

सरकार लाएगी संशोधन विधेयक; NPS ट्रस्ट को अलग कर पारदर्शिता बढ़ाने की भी योजना

भारत में पेंशन सेक्टर में 100% FDI की तैयारी, सरकार PFRDA एक्ट में संशोधन ला सकती है। NPS में बदलाव से निवेशकों को बेहतर रिटर्न और अधिक विकल्प मिलने की उम्मीद। पढ़ें पूरी खबर।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार पेंशन सेक्टर में बड़े सुधारों की तैयारी में है। इसके तहत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को मौजूदा 49% से बढ़ाकर 100% तक करने पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में संशोधन विधेयक आगामी मानसून या शीतकालीन सत्र में संसद में पेश किया जा सकता है। यह कदम बीमा क्षेत्र की तर्ज पर उठाया जा रहा है, जहां पहले ही 100% एफडीआई की अनुमति दी जा चुकी है।

कानून में संशोधन की तैयारी

सरकार पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2013 में संशोधन की योजना बना रही है। वर्तमान में पेंशन फंड में विदेशी निवेश की सीमा 49% है, जिसे बढ़ाकर 100% करने का प्रस्ताव है। इससे विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।

NPS ट्रस्ट को किया जा सकता है अलग

संशोधन में नेशनल पेंशन सिस्टम ट्रस्ट को रेगुलेटर से अलग करने का प्रस्ताव भी शामिल हो सकता है। अभी NPS ट्रस्ट, PFRDA के नियमों के तहत काम करता है, लेकिन प्रस्ताव है कि इसे एक स्वतंत्र संस्था या कंपनी अधिनियम के तहत लाया जाए, जिससे संचालन में अधिक पारदर्शिता और पेशेवर प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।

नया बोर्ड करेगा संचालन

सूत्रों के अनुसार, NPS ट्रस्ट के संचालन के लिए 15 सदस्यों वाला एक नया बोर्ड बनाया जा सकता है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों की प्रमुख भूमिका होगी, क्योंकि सरकारी कर्मचारी और राज्य इस कोष के बड़े योगदानकर्ता हैं।

क्या होगा असर?

विशेषज्ञों के मुताबिक, 100% FDI की अनुमति मिलने से

  • पेंशन सेक्टर में विदेशी निवेश बढ़ेगा
  • प्रतिस्पर्धा तेज होगी
  • ग्राहकों को बेहतर रिटर्न और अधिक विकल्प मिलेंगे
  • प्रबंधन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी

NPS का बैकग्राउंड

भारत सरकार ने 1 जनवरी 2004 से नई सरकारी भर्तियों (सशस्त्र बलों को छोड़कर) के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम को अनिवार्य किया था। बाद में 1 मई 2009 से इसे सभी नागरिकों के लिए स्वैच्छिक रूप से खोल दिया गया।

पेंशन सेक्टर में प्रस्तावित ये सुधार निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग के नजरिए से बड़ा बदलाव साबित हो सकते हैं। यदि 100% एफडीआई को मंजूरी मिलती है, तो इससे न केवल बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि आम लोगों को भी बेहतर पेंशन विकल्प मिल सकेंगे।

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