मेधावी छात्र-छात्राओं के सम्मान समारोह में बोले योगी, बेटियां मेहनत और प्रतिभा में आगे

75 जिलों में हो रहा मेधावियों का सम्मान, मेरिट सूची में छात्राओं का दबदबा; शिक्षा व्यवस्था में बदलावों का भी किया जिक्र

लखनऊ में मेधावी छात्र-छात्राओं के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि छात्राएं मेहनत और प्रतिभा में आगे हैं। उन्होंने यूपी की शिक्षा व्यवस्था में हुए बदलाव, नकलमुक्त परीक्षा और छात्राओं की सफलता पर विस्तार से बात की।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेधावियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि प्रदेश की बेटियां मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मेरिट सूची में छात्राओं का प्रदर्शन यह साबित करता है कि वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।

75 जिलों में मेधावियों का सम्मान

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करने के लिए समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में 200 से अधिक विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, जिनमें कई छात्रों को उन्होंने स्वयं सम्मानित किया।

उन्होंने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी मेहनत और उपलब्धियां अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

मेरिट सूची में छात्राओं का दबदबा

मुख्यमंत्री ने बताया कि लखनऊ में सम्मानित किए गए 223 विद्यार्थियों में 85 छात्र और 138 छात्राएं शामिल हैं। इसी प्रकार हाईस्कूल की प्रदेश स्तरीय मेरिट सूची में शामिल 115 विद्यार्थियों में 81 छात्राएं और 34 छात्र हैं। वहीं इंटरमीडिएट की टॉप सूची में 14 छात्राएं और 9 छात्र शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि छात्राएं न केवल अधिक मेहनत कर रही हैं, बल्कि उत्कृष्ट परिणाम भी हासिल कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि पहले माना जाता था कि छात्राएं घर के कामों में अपनी माताओं का हाथ बंटाती हैं, लेकिन अब परिस्थितियां बदलती दिखाई दे रही हैं। संभव है कि अब छात्र घर के कामों में अधिक सहयोग कर रहे हों, इसलिए छात्राओं का प्रदर्शन और बेहतर दिखाई दे रहा है।

‘बेटी पढ़ेगी तो देश आगे बढ़ेगा’

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि छात्राओं की सफलता समाज के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि जब बेटियां पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं तो यह पूरे समाज के लिए प्रेरणा का विषय है।

उन्होंने कहा, “बेटी पढ़ेगी तो आगे बढ़ेगी और जब बेटी आगे बढ़ेगी तो परिवार, समाज और देश भी आगे बढ़ेगा।”

शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में पिछले नौ वर्षों में हुए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले बोर्ड परीक्षाओं में नकल एक बड़ी समस्या थी और कई स्थानों पर फर्जी परीक्षार्थियों के परीक्षा देने के मामले सामने आते थे।

उन्होंने कहा कि अब परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक आधारित हो चुकी है। वर्तमान व्यवस्था में वही छात्र परीक्षा देता है जिसका पंजीकरण होता है। विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है और प्रॉक्सी शिक्षण जैसी प्रवृत्तियों पर प्रभावी रोक लगाई गई है।

परीक्षा का उद्देश्य भय नहीं, आत्मविश्वास होना चाहिए

मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को डराना या परेशान करना नहीं होना चाहिए। परीक्षा ऐसी होनी चाहिए जो छात्रों के भीतर आत्मविश्वास पैदा करे और उन्हें सीखने की प्रक्रिया से जोड़ने का माध्यम बने।

उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र अत्यधिक कठिन बनाकर विद्यार्थियों को परेशान करना किसी भी शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। एक अच्छा शिक्षक और परीक्षक वही है जो विद्यार्थियों की क्षमता को निखारने का काम करे।

भारतीय शिक्षा परंपरा का किया उल्लेख

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भारतीय शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करना भी है।

उन्होंने संस्कृत के प्रसिद्ध वाक्य “सा विद्या या विमुक्तये” का उल्लेख करते हुए कहा कि वही विद्या श्रेष्ठ है जो व्यक्ति को आगे बढ़ने और जीवन में सफलता प्राप्त करने का मार्ग दिखाए।

मुख्यमंत्री ने भगवान राम, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि अगस्त्य तथा भगवान कृष्ण और गुरु संदीपनि के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु, शिक्षा और संस्कार व्यक्ति के जीवन निर्माण की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि समय बदल सकता है, लेकिन शिक्षा और संस्कारों का महत्व कभी कम नहीं होता।

मेधावियों को आगे बढ़ने का संदेश

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं से निरंतर अध्ययन, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के मेधावी विद्यार्थी ही भविष्य में प्रदेश और देश की प्रगति के वाहक बनेंगे।

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