लोहिया संस्थान में पहली बार सफल हुई EBUS प्रक्रिया, फेफड़ों के कैंसर की जांच होगी आसान

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ में पहली बार एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड (EBUS) प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई है। यह तकनीक फेफड़ों के कैंसर, टीबी, सारकॉइडोसिस और छाती के लिम्फ नोड्स से जुड़े रोगों के शीघ्र और सटीक निदान में मददगार साबित होगी।

लखनऊ। राजधानी के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस) ने श्वसन चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के श्वसन रोग विभाग ने पहली बार एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड (EBUS) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कर चिकित्सा सेवाओं में नया अध्याय जोड़ा है।

यह उपलब्धि विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अजय कुमार वर्मा के नेतृत्व में उनकी टीम डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. पुलकित गुप्ता, डॉ. मृत्युंजय सिंह और डॉ. सुलक्षणा गौतम के प्रयासों से संभव हुई है।

फेफड़ों के कैंसर के निदान में मिलेगी बड़ी सहायता

विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अजय कुमार वर्मा ने बताया कि एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड (EBUS) तकनीक फेफड़ों के कैंसर तथा छाती के लिम्फ नोड्स से संबंधित बीमारियों के शीघ्र और सटीक निदान में अत्यंत उपयोगी साबित होगी।

उन्होंने कहा कि इस आधुनिक तकनीक के जरिए रोग की पहचान शुरुआती चरण में ही संभव हो सकेगी, जिससे मरीजों का उपचार समय पर शुरू किया जा सकेगा और बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।

टीबी और सारकॉइडोसिस की जांच में भी होगी मदद

श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमंत कुमार ने बताया कि EBUS तकनीक केवल फेफड़ों के कैंसर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षय रोग (टीबी), सारकॉइडोसिस और अन्य श्वसन संबंधी रोगों के निदान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने कहा कि रोगों की शुरुआती अवस्था में पहचान होने से मरीजों को समय पर उपचार मिलेगा और गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकेगा।

मरीजों को अब नहीं जाना पड़ेगा बड़े महानगरों में

अब तक EBUS जैसी उन्नत जांच सुविधाएं देश के चुनिंदा बड़े चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध थीं, लेकिन लोहिया संस्थान में इस सेवा की शुरुआत के बाद उत्तर प्रदेश के मरीजों को इलाज और जांच के लिए दिल्ली या अन्य महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

इससे मरीजों का समय और आर्थिक खर्च दोनों कम होंगे।

निदेशक ने टीम को दी बधाई

संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह ने इस उपलब्धि पर पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि EBUS जैसी अत्याधुनिक तकनीक का संस्थान में आरंभ होना उन्नत श्वसन चिकित्सा सेवाओं को प्रदेशवासियों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि लोहिया संस्थान का रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग लगातार आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपनाकर उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

क्या है EBUS तकनीक?

एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड (Endobronchial Ultrasound – EBUS) एक अत्याधुनिक और न्यूनतम इनवेसिव तकनीक है, जिसमें अल्ट्रासाउंड की मदद से फेफड़ों और छाती के अंदर मौजूद लिम्फ नोड्स तथा अन्य संरचनाओं की जांच की जाती है।

इस प्रक्रिया के माध्यम से बिना बड़ी सर्जरी के ऊतकों के नमूने लेकर जांच की जा सकती है, जिससे रोग का सटीक और शीघ्र निदान संभव हो पाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button