“दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के धरने को सोनम वांगचुक का समर्थन मिला है। शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर उन्होंने 28 जून 2026 से भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने केंद्र सरकार को 27 जून तक जवाबदेही तय करने का समय दिया है।“
नई दिल्ली। देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी धरना प्रदर्शन को गुरुवार को नया बल मिला, जब पर्यावरण कार्यकर्ता और लद्दाख के सामाजिक नेता सोनम वांगचुक ने आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार 27 जून तक जनता के सवालों पर जवाबदेही नहीं दिखाती है तो वह 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
वांगचुक के इस ऐलान के बाद आंदोलन से जुड़े छात्रों और समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है। आंदोलनकारी इसे अपनी मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने का अवसर मान रहे हैं।
सरकार को दिया 27 जून तक का समय
सोनम वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता की चिंताओं को गंभीरता से सुने और उनके प्रति जवाबदेह बने। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दी है।
उन्होंने कहा कि सरकार को 27 जून तक का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।
“टकराव नहीं, संवाद हमारा उद्देश्य”
वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं है, बल्कि सरकार और जनता के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन किसी भी लोकतंत्र को मजबूत बनाने का माध्यम होते हैं और जनता की आवाज को सुनना सरकार की जिम्मेदारी है।
छह दिनों से जारी है धरना
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का धरना पिछले छह दिनों से जारी है। आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील कर रहे हैं।
धरने के दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।
वांगचुक के समर्थन से आंदोलन को मिलने लगी राष्ट्रीय पहचान
आंदोलनकारियों का कहना है कि सोनम वांगचुक के समर्थन और भूख हड़ताल की घोषणा से उनकी आवाज को और मजबूती मिलेगी। उनका मानना है कि देश के विभिन्न हिस्सों से अधिक लोग अब इस आंदोलन से जुड़ सकते हैं और शिक्षा से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन सकते हैं।
लोकतांत्रिक और अहिंसक आंदोलन की अपील
सोनम वांगचुक ने युवाओं और समर्थकों से अपील की कि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखें। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में रहकर ही किसी भी जन आंदोलन को सफल बनाया जा सकता है।
उन्होंने युवाओं से देश के महत्वपूर्ण मुद्दों के प्रति जागरूक रहने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी निभाने का भी आह्वान किया।
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