बसंत कुमार मेघवाल ने अमेरिका में रचा इतिहास, हाई जंप में जीता सिल्वर; मां बोलीं- बेटे के लिए बनाऊंगी खीर-हलवा

बसंत कुमार मेघवाल ने अमेरिका के यूजीन में विश्व एथलेटिक्स U20 चैंपियनशिप की हाई जंप स्पर्धा में 2.21 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल जीता। अनूपगढ़ के सरकारी स्कूल से शुरू हुआ उनका सफर अब अंतरराष्ट्रीय इतिहास बन गया है।

श्रीगंगानगर। राजस्थान के अनूपगढ़ जिले के गांव 12 एबी से निकले 19 वर्षीय बसंत कुमार मेघवाल ने अमेरिका में भारत का नाम रोशन कर दिया है। यूजीन, ओरेगन में आयोजित विश्व एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप की पुरुष हाई जंप स्पर्धा में बसंत ने 2.21 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ वह विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के किसी भी आयु वर्ग की हाई जंप स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं।

बसंत की इस ऐतिहासिक कामयाबी की खबर जैसे ही उनके गांव और परिवार तक पहुंची, खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार के लिए यह उपलब्धि सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, आर्थिक मुश्किलों और बेटे के सपने पर जताए गए भरोसे का नतीजा है।

एक-एक छलांग के साथ बढ़ता गया रोमांच

फाइनल मुकाबले में बसंत ने शानदार आत्मविश्वास दिखाया। उन्होंने 2.06 मीटर की ऊंचाई पहले प्रयास में पार की। इसके बाद 2.12 मीटर और 2.17 मीटर की ऊंचाई भी उन्होंने सफलतापूर्वक पार कर ली।

इसके बाद 2.21 मीटर की ऊंचाई सामने थी। बसंत ने दूसरे प्रयास में इसे पार कर अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की बराबरी कर ली और पदक पक्का कर लिया।

फाइनल में शीर्ष तीन खिलाड़ियों ने 2.21 मीटर की ऊंचाई पार की। हालांकि कोई भी खिलाड़ी 2.24 मीटर की ऊंचाई पार नहीं कर सका। इसके बाद असफल प्रयासों के आधार पर पदक का फैसला हुआ। अल्जीरिया के युनेस अयाची ने 2.21 मीटर पहले प्रयास में पार कर स्वर्ण जीता। बसंत ने दूसरे प्रयास में यह ऊंचाई पार की, जिसके चलते उन्हें रजत पदक मिला।

एक ही सीजन में 10 सेंटीमीटर का सुधार

बसंत की कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने एक ही सीजन में अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन में 10 सेंटीमीटर का सुधार किया है। उनका पिछला सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2.11 मीटर था, जिसे उन्होंने बढ़ाकर 2.21 मीटर कर दिया।

इससे पहले मई 2026 में हांगकांग में आयोजित एशियाई अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में बसंत ने 2.20 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता था। अप्रैल 2026 में बेंगलुरु के तुमकुर में आयोजित अंडर-20 एथलेटिक्स फेडरेशन चैंपियनशिप में भी उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया था।

सरकारी स्कूल से शुरू हुआ विश्व चैंपियन बनने का सफर

बसंत का सफर किसी बड़े खेल संस्थान से नहीं, बल्कि गांव के सरकारी स्कूल के मैदान से शुरू हुआ। उन्होंने पहली से 11वीं कक्षा तक गांव के सरकारी विद्यालय में पढ़ाई की। इसी दौरान उनकी हाई जंप में रुचि बढ़ी।

स्कूल के शारीरिक शिक्षक इकबाल सिंह ने उनकी प्रतिभा पहचानी और उन्हें शुरुआती प्रशिक्षण दिया। इसके बाद बसंत ने श्रीगंगानगर के खालसा स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2023 में उन्होंने करीब छह महीने तक विशेष प्रशिक्षण लिया।

साल 2024 में उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के बेंगलुरु केंद्र के लिए चयन परीक्षा दी और चयनित हुए। इसके बाद उनकी खेल यात्रा को नई दिशा मिली। हाई जंप की राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी सहाना कुमारी का मार्गदर्शन भी उन्हें मिला।

बेटे के सपने के लिए परिवार ने लिया कर्ज

बसंत की सफलता के पीछे उनके परिवार का संघर्ष भी उतना ही बड़ा है। उनके पिता गंगाराम मेघवाल वाहन चालक हैं, जबकि मां रोशनी देवी गृहिणी होने के साथ पशुपालन करती हैं।

परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं थी, लेकिन बेटे के खेल सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। पिता के मुताबिक, बसंत की ट्रेनिंग और तैयारी के लिए रिश्तेदारों और परिचितों से कर्ज तक लेना पड़ा।

अगस्त 2025 में बसंत का भारतीय नौसेना में चयन हुआ। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार आया और पुराने कर्ज को चुकाने का रास्ता भी खुला।

मां बोलीं- बेटा आएगा तो खीर और हलवा बनाऊंगी

बसंत की ऐतिहासिक जीत के बाद उनकी मां रोशनी देवी खुशी से फूली नहीं समा रही हैं। उन्हें अब बेटे के घर लौटने का इंतजार है।

उन्होंने कहा कि जब बसंत घर आएगा तो उसकी पसंद का खाना बनाया जाएगा। बेटे को खीर और हलवा पसंद है, इसलिए वह उसके लिए खास तौर पर खीर और हलवा बनाएंगी। बेटे की जीत के बाद पूरे परिवार में जश्न का माहौल है।

पिता को अब ओलंपिक पदक की उम्मीद

बसंत के पिता गंगाराम मेघवाल ने बेटे की सफलता पर गर्व जताते हुए कहा कि यह सिर्फ उनके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे देश की खुशी है। उन्हें उम्मीद है कि बसंत आने वाले वर्षों में लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार करेगा और ओलंपिक में भी भारत के लिए पदक जीतेगा।

भाई ने मोबाइल पर देखा मुकाबला

बसंत के छोटे भाई जसवंत मेघवाल ने बताया कि मुकाबले के दौरान वह मोबाइल पर लगातार अपने बड़े भाई का प्रदर्शन देख रहे थे। बसंत ने उन्हें लाइव मुकाबला देखने का लिंक भेजा था।

सुबह से वह मुकाबले पर नजर बनाए हुए थे। इसके बाद बसंत ने फोन कर बताया कि वह दूसरे स्थान पर रहा है और विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हाई जंप में भारत के लिए पदक जीतने वाला पहला खिलाड़ी बन गया है।

गांव में जश्न, युवाओं के लिए बने प्रेरणा

बसंत की कामयाबी की खबर गांव पहुंचते ही जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने इसे पूरे अनूपगढ़ क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बताया।

सरकारी स्कूल के मैदान से शुरू हुआ बसंत का सफर अब अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंच चुका है। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेलों में बड़ा मुकाम हासिल करने का सपना देखते हैं। बसंत ने साबित किया है कि प्रतिभा, मेहनत, परिवार का साथ और सही मार्गदर्शन मिले तो छोटे गांव से निकलकर भी विश्व मंच पर इतिहास रचा जा सकता है।

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