“लखनऊ में हिंदू युवा वाहिनी नेता और महाराणा प्रताप चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या कर दी गई। पुलिस ने चालक समेत छह लोगों को हिरासत में लिया है। फॉर्च्यूनर में गोली मारने के बाद शव नहर में फेंका गया। प्रारंभिक जांच में 50 करोड़ की जमीन के विवाद और रुपये के लेन-देन की बात सामने आई है।“
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में हिंदू युवा वाहिनी के लखनऊ मंडल प्रभारी और महाराणा प्रताप चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या कर दी गई। उन्नाव के रहने वाले धीरेंद्र शनिवार शाम पीजीआई क्षेत्र से लापता हुए थे। रविवार को दुबग्गा थाना क्षेत्र में किसान पथ के पास छोटी नहर से उनका शव बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में पुलिस को उन्नाव में करीब 50 करोड़ रुपये की जमीन को लेकर चल रहे विवाद और रुपये के लेन-देन का मामला सामने आया है।
पुलिस ने धीरेंद्र के चालक रवि तिवारी और उसके साथी दिलीप समेत छह संदिग्धों को हिरासत में लिया है। पुलिस और एसटीएफ की टीमें उनसे पूछताछ कर रही हैं। जांच में सामने आया है कि धीरेंद्र को उनकी फॉर्च्यूनर गाड़ी में ही गोली मारी गई और इसके बाद शव को दुबग्गा क्षेत्र में नहर में फेंक दिया गया।
शनिवार शाम पांच बजे हुआ अपहरण
पुलिस के मुताबिक धीरेंद्र प्रताप सिंह शनिवार शाम करीब पांच बजे पीजीआई क्षेत्र से लापता हुए थे। आशंका है कि चालक रवि तिवारी ने अपने साथियों के साथ मिलकर उनका अपहरण किया। इसके बाद फॉर्च्यूनर में ही गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई और शव को नहर में फेंक दिया गया।
धीरेंद्र मूल रूप से उन्नाव के फतेहपुर चौरासी क्षेत्र के राजेपुर के रहने वाले थे। वर्तमान में वह सेक्टर-11, वृंदावन योजना, पीजीआई क्षेत्र में रह रहे थे। वह हिंदू युवा वाहिनी में लखनऊ मंडल प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और महाराणा प्रताप चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष भी थे।
रात एक बजे तक घर नहीं पहुंचे तो परिजनों को हुई चिंता
परिवार के लोगों के मुताबिक धीरेंद्र अक्सर देर रात घर लौटते थे। शनिवार-रविवार की रात करीब एक बजे तक जब वह घर नहीं पहुंचे तो परिजनों ने उन्हें फोन करना शुरू किया। इस दौरान चालक रवि ने फोन उठाकर बताया कि धीरेंद्र सुशांत गोल्फ सिटी स्थित फीनिक्स पलासियो मॉल में बैठे हैं।
इसके कुछ देर बाद धीरेंद्र और चालक दोनों के मोबाइल फोन बंद हो गए। अनहोनी की आशंका में परिवार ने उनकी तलाश शुरू की। इसी बीच रात करीब 2:30 बजे चालक रवि तिवारी खुद सुशांत गोल्फ सिटी थाने पहुंचा और धीरेंद्र के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई।
पत्नी ने चालक पर जताया शक
धीरेंद्र की पत्नी ममता सिंह भी थाने पहुंचीं। उन्होंने चालक पर शक जताते हुए पुलिस को बताया कि रवि तिवारी ने अपने साथियों के साथ मिलकर उनके पति का अपहरण किया हो सकता है। इसके बाद पुलिस ने चालक से पूछताछ शुरू की।
पुलिस के अनुसार शुरुआत में रवि तिवारी टालमटोल करता रहा, लेकिन कड़ाई से पूछताछ के बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर धीरेंद्र की हत्या करने की जानकारी दी। उसकी निशानदेही पर पुलिस किसान पथ के पास नहर तक पहुंची, जहां धीरेंद्र का शव पड़ा मिला।
माथे और सीने में लगी एक-एक गोली
पुलिस की प्रारंभिक जांच में धीरेंद्र प्रताप सिंह के माथे और सीने में एक-एक गोली लगने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार हत्या फॉर्च्यूनर के अंदर किए जाने की आशंका है। इसके बाद शव को नहर में फेंका गया।
शव बरामद होने के बाद पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मौत की वास्तविक वजह और गोली लगने की परिस्थितियों की विस्तृत जानकारी पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के बाद स्पष्ट होगी।
50 करोड़ की जमीन बनी हत्या की वजह?
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में उन्नाव की एक जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। बताया जा रहा है कि जमीन की कीमत करीब 50 करोड़ रुपये है और इसे लेकर धीरेंद्र प्रताप सिंह का विवाद चल रहा था। पुलिस को आशंका है कि इसी जमीन की रंजिश में हत्या की साजिश रची गई।
इसके अलावा रुपये के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन विवाद में कौन-कौन लोग शामिल थे और हिरासत में लिए गए छह संदिग्धों की हत्या की साजिश और वारदात में क्या भूमिका थी।
हालांकि पुलिस अभी जमीन विवाद को हत्या की अंतिम वजह नहीं मान रही है। जांच पूरी होने और साक्ष्य सामने आने के बाद ही हत्या के कारण की आधिकारिक पुष्टि होगी।
धीरेंद्र को मिली थी सुरक्षा
धीरेंद्र प्रताप सिंह के साथ दो गनर भी तैनात थे। पुलिस के मुताबिक घटना के समय एक गनर की तबीयत खराब थी, जबकि दूसरा अवकाश पर था। सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े इस पहलू की भी जांच की जा रही है।
धीरेंद्र उन्नाव के चर्चित कुलदीप सिंह सेंगर दुष्कर्म मामले में गवाह भी बताए गए हैं। इसी वजह से उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि उनकी पुरानी भूमिका, किसी पूर्व रंजिश या सुरक्षा से जुड़े किसी पहलू का हत्या से कोई संबंध है या नहीं।
छह संदिग्ध हिरासत में, एसटीएफ भी जांच में शामिल
डीसीपी साउथ मोहम्मद मुस्ताक के मुताबिक मामले के खुलासे के लिए पुलिस की छह टीमें लगाई गई हैं। एसटीएफ भी जांच में शामिल है। चालक रवि तिवारी और उसके साथी दिलीप समेत छह संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
पुलिस सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से हत्या की पूरी कड़ी जोड़ने का प्रयास कर रही है। धीरेंद्र के मोबाइल फोन की लोकेशन, कॉल डिटेल और घटना से पहले उनके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी भी जांच के दायरे में है।
गुमशुदगी से हत्या तक पहुंचा मामला
धीरेंद्र के लापता होने के बाद पहले गुमशुदगी का मामला दर्ज किया गया था। पत्नी की तहरीर और पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों के बाद मुकदमे को अपहरण और हत्या की धाराओं में बदल दिया गया है। अन्य संबंधित धाराएं भी बढ़ाई गई हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि धीरेंद्र को पीजीआई क्षेत्र से कहां ले जाया गया, फॉर्च्यूनर में उनके साथ कौन-कौन लोग मौजूद थे, हत्या में किस हथियार का इस्तेमाल हुआ और शव को नहर तक कैसे पहुंचाया गया।
घटनास्थल से कार बरामद
धीरेंद्र की फॉर्च्यूनर भी पुलिस को मिली है। कार की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। पुलिस को आशंका है कि हत्या के महत्वपूर्ण साक्ष्य कार के भीतर से मिल सकते हैं। वाहन से मिले साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर वारदात की टाइमलाइन तैयार की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि हिरासत में लिए गए संदिग्धों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के मिलान के बाद हत्या की पूरी साजिश का खुलासा हो सकेगा।
कई सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस
धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या के मामले में पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। हत्या की साजिश कब और कहां रची गई, जमीन विवाद में कौन-कौन लोग शामिल थे, चालक के साथ वारदात में शामिल अन्य लोगों की क्या भूमिका थी और हत्या के बाद शव को नहर में फेंकने की योजना किसने बनाई—इन सभी बिंदुओं पर जांच चल रही है।
फिलहाल पुलिस और एसटीएफ की टीमें मामले की तह तक पहुंचने में जुटी हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर हत्या की पूरी कहानी स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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