“मोदी-पुतिन की बिश्केक में आज अहम बैठक होगी। ऊर्जा, उर्वरक, S-400, रक्षा सहयोग, व्यापार असंतुलन और भुगतान तंत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा की संभावना है।“
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में द्विपक्षीय बैठक करेंगे। यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान होगी। दोनों नेताओं के बीच होने वाली इस वार्ता में भारत-रूस विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की व्यापक समीक्षा के साथ ऊर्जा, उर्वरक, रक्षा, व्यापार और भुगतान व्यवस्था से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
दिसंबर 2025 में हुए वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद मोदी और पुतिन की यह पहली आमने-सामने मुलाकात होगी। दोनों नेता सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भी मुलाकात करेंगे। ऐसे में बिश्केक बैठक को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति पर रहेगा विशेष जोर
पश्चिम एशिया में जारी संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बनी अनिश्चितता के बीच भारत के लिए रूस से कच्चे तेल और उर्वरक की निर्बाध आपूर्ति महत्वपूर्ण है। रूस भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया मास्को यात्रा के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने भारत को ईंधन और उर्वरक की निर्बाध आपूर्ति का आश्वासन दिया था। माना जा रहा है कि मोदी-पुतिन वार्ता में दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों, भुगतान व्यवस्था और वैश्विक परिस्थितियों के बीच ऊर्जा सहयोग को स्थिर बनाए रखने के उपायों पर चर्चा हो सकती है।
S-400 और रक्षा सहयोग भी एजेंडे में
ऊर्जा के अलावा रक्षा सहयोग भी दोनों नेताओं की बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में मजबूत साझेदारी रही है। बैठक में S-400 वायु रक्षा प्रणालियों की शेष डिलीवरी, अतिरिक्त मिसाइलों के स्टाक और भारत में इनके रखरखाव व मरम्मत की सुविधाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।
दोनों देश रक्षा क्षेत्र में सह-उत्पादन और स्पेयर पार्ट्स के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने पर भी काम कर रहे हैं। ऐसे में रक्षा उपकरणों की समय पर आपूर्ति और भारत में रखरखाव क्षमता विकसित करने से जुड़े मुद्दों की समीक्षा भी वार्ता का हिस्सा बन सकती है।
व्यापार असंतुलन दूर करने पर भी होगी चर्चा
भारत-रूस के बीच कारोबार में पिछले कुछ वर्षों में तेजी आई है, लेकिन व्यापार का बड़ा हिस्सा रूस से भारत को होने वाले ऊर्जा निर्यात पर आधारित है। इसी वजह से द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन भारत की प्रमुख चिंताओं में शामिल है।
भारत चाहता है कि रूस अपने बाजार को भारतीय फार्मा, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि और उपभोक्ता उत्पादों के लिए अधिक खोले। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापार को अधिक संतुलित और विविध बनाने पर जोर दिया जा सकता है।
अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच भुगतान व्यवस्था अहम
रूस के साथ कारोबार को लेकर अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के बीच भारत और रूस के लिए सुरक्षित और व्यावहारिक भुगतान व्यवस्था भी महत्वपूर्ण हो गई है। दोनों नेता ऐसे तंत्र को मजबूत करने पर चर्चा कर सकते हैं, जिससे प्रतिबंधों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को सुचारू रूप से जारी रखा जा सके।
भारत की कोशिश रही है कि रूस के साथ व्यापार में भुगतान संबंधी बाधाओं को कम किया जाए। बिश्केक बैठक में दोनों पक्ष मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा के साथ भविष्य के लिए अधिक सुरक्षित और प्रभावी विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।
परमाणु ऊर्जा और हाईटेक सहयोग पर भी नजर
भारत और रूस के बीच सहयोग का दायरा रक्षा और ऊर्जा से आगे बढ़कर परमाणु ऊर्जा, उर्वरक संयंत्र और उच्च तकनीक जैसे क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। दोनों देश इन क्षेत्रों को भविष्य के सहयोग के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में देख रहे हैं।
कुल मिलाकर मोदी-पुतिन की बिश्केक बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति, प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत अपने रणनीतिक हितों को संतुलित करने में जुटा है। ऐसे में बैठक से ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और व्यापार संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिलने की उम्मीद है।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”







