“विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी ने 14 साल पुराने Income Tax विवाद के बाद 700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वापस हासिल की। RTI से मिले 1999 के एंट्री रजिस्टर ने टैक्स छूट के दावे को मजबूत किया।“
बेंगलुरु। विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (VTU) को आयकर विभाग के साथ करीब 14 साल से चल रहे विवाद में बड़ी राहत मिली है। विश्वविद्यालय अब 700 करोड़ रुपये से अधिक की अपनी वह रकम वापस पाने की स्थिति में है, जो लंबे समय से आयकर विवाद और बैंक खातों के फ्रीज होने के कारण प्रभावित रही।
इस मामले में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत प्राप्त 1999 का एक महत्वपूर्ण एंट्री रजिस्टर निर्णायक साबित हुआ। इस दस्तावेज से यह साबित करने में मदद मिली कि विश्वविद्यालय ने स्थापना के शुरुआती दौर में ही आयकर अधिनियम की धारा 12(A) के तहत टैक्स छूट के लिए आवेदन किया था।
2012-13 में फ्रीज कर दिए गए थे बैंक खाते
आयकर विभाग ने कथित टैक्स बकाया को लेकर वर्ष 2012-13 में VTU के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था। इससे विश्वविद्यालय को कई वर्षों तक गंभीर वित्तीय मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मामला अलग-अलग कानूनी स्तरों तक पहुंचा और विश्वविद्यालय को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।
आयकर विभाग का तर्क था कि VTU ने आयकर अधिनियम की धारा 12(A) के तहत वैध छूट हासिल नहीं की थी। इसी आधार पर विभाग ने विश्वविद्यालय की स्थापना के समय से करीब 250 करोड़ रुपये के टैक्स की मांग की।
VTU ने इस मांग को चुनौती दी, लेकिन आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक विभिन्न चरणों में उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
पुराने दस्तावेज नहीं मिलने से अटका था दावा
VTU के कुलपति प्रो. एस. विद्याशंकर के अनुसार, विश्वविद्यालय को पहले से जानकारी थी कि स्थापना के बाद टैक्स छूट के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन उसके पास इस दावे को साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज मौजूद नहीं थे।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने विवाद से जुड़े पुराने दस्तावेजों की दोबारा समीक्षा शुरू की। इसी दौरान वर्ष 1999 में टैक्स छूट के आवेदन से संबंधित संदर्भ सामने आया। इसके बाद विश्वविद्यालय ने आयकर विभाग के पास RTI आवेदन दाखिल किया।
RTI के जरिए प्राप्त 1999 का एंट्री रजिस्टर इस पूरे मामले में अहम दस्तावेज बनकर सामने आया। इसी रिकॉर्ड के आधार पर विश्वविद्यालय ने अपने पुराने दावे को मजबूती के साथ आयकर विभाग के सामने रखा और रकम की वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
450 करोड़ रुपये का था विश्वविद्यालय का कोष
बैंक खाते फ्रीज किए जाने के समय VTU के विभिन्न बैंक खातों में करीब 450 करोड़ रुपये का कोष था। यह रकम परीक्षा शुल्क, संबद्ध कॉलेजों से प्राप्त भुगतान और कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण से मिलने वाले वार्षिक प्रतिपूर्ति भुगतान से तैयार हुई थी।
इसके अलावा विश्वविद्यालय की करीब 250 करोड़ रुपये की एक अन्य रकम भी इस विवाद से प्रभावित रही। दोनों रकम को मिलाकर अब विश्वविद्यालय को 700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वापस मिलने की उम्मीद है।
10 साल के लिए जमा करने की तैयारी
रकम की वापसी से विश्वविद्यालय को लंबे समय के बाद वित्तीय स्थिरता मिलने की उम्मीद है। वर्षों तक खातों पर लगी रोक के कारण संस्थान पर आर्थिक दबाव बना हुआ था।
विश्वविद्यालय की योजना बरामद होने वाली रकम को किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में 10 वर्ष की अवधि के लिए जमा करने की है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मूलधन को सुरक्षित रखा जाएगा और तत्काल खर्च करने के बजाय उससे मिलने वाले ब्याज का उपयोग किया जाएगा।
11वें वर्ष से वेतन में इस्तेमाल होगा ब्याज
VTU की योजना के अनुसार जमा राशि से मिलने वाले ब्याज का उपयोग 11वें वर्ष से विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के वेतन भुगतान में किया जा सकता है। इससे संस्थान को कर्मचारियों के वेतन और अन्य नियमित खर्चों के लिए आय का एक स्थायी स्रोत मिलने की उम्मीद है।
विश्वविद्यालय का उद्देश्य मूल कोष को सुरक्षित रखते हुए उससे मिलने वाली आय का इस्तेमाल संस्थान की दीर्घकालिक वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में करना है। 14 साल पुराने आयकर विवाद में मिले इस रिकॉर्ड ने VTU को न सिर्फ बड़ी रकम वापस पाने का रास्ता दिखाया है, बल्कि भविष्य की वित्तीय योजना को भी मजबूत आधार दिया है।
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