
“मुरादाबाद के उच्च प्राथमिक विद्यालय सिरसवां गौड़ की सहायक अध्यापक सुनीता रानी का उत्तर प्रदेश राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 के लिए चयन हुआ है। 12 बिंदुओं पर उनकी उपलब्धियों और विद्यालय में किए गए उत्कृष्ट कार्यों को चयन का आधार बनाया गया है। शिक्षक दिवस पर लखनऊ में उन्हें सम्मानित किया जाएगा।“
मुरादाबाद: शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य और नवाचारों के लिए मुरादाबाद के उच्च प्राथमिक विद्यालय सिरसवां गौड़ की सहायक अध्यापक सुनीता रानी का चयन उत्तर प्रदेश राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 के लिए किया गया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर पांच सितंबर को लखनऊ में आयोजित समारोह में उन्हें सम्मानित किया जाएगा। विद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने, खेल और गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने समेत 12 प्रमुख उपलब्धियां उनके चयन का आधार बनी हैं।
सुनीता रानी मूल रूप से बुद्धि विहार फेज-2 की निवासी हैं। उन्होंने आठ मार्च 2003 को शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा था। 30 अगस्त 2006 से वह उच्च प्राथमिक विद्यालय सिरसवां गौड़ में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। सामाजिक विषय की शिक्षिका के रूप में उन्होंने बच्चों को किताबों तक सीमित रखने के बजाय विभिन्न गतिविधियों और प्रयोगों के माध्यम से सीखने का अवसर देने पर विशेष जोर दिया।
विद्यालय में बढ़ी विद्यार्थियों की संख्या
सुनीता रानी के कार्यकाल के दौरान विद्यालय में विद्यार्थियों के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वर्ष 2022-23 में विद्यालय में 95 विद्यार्थी थे, जो बढ़कर वर्ष 2026-27 में 135 हो गए। यह वृद्धि विद्यालय के प्रति अभिभावकों और विद्यार्थियों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
शिक्षिका का कहना है कि बच्चों की शिक्षा में किसी प्रकार की कमी न रहे, इसके लिए लगातार प्रयास किए गए। शिक्षण के साथ विद्यार्थियों को अलग-अलग गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया, जिससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी।
खेल-खेल में पढ़ाई और नवाचार पर जोर
सुनीता रानी ने विद्यालय में पारंपरिक शिक्षण पद्धति के साथ कई नवाचारों को अपनाया। खेल-खेल में पढ़ाई, ऑर्गेनिक खेती, क्राफ्ट, प्रयोगात्मक सामाजिक विज्ञान, मिट्टी से आकृतियां बनाने, सिलाई-कढ़ाई और ‘एक दिन-एक विद्यार्थी शिक्षक’ जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सीखने का अवसर दिया गया।
‘मेरा गांव-मेरी डायरी’ गतिविधि के जरिए विद्यार्थियों को अपने गांव और स्थानीय परिवेश को समझने तथा उसके बारे में जानकारी जुटाने के लिए प्रेरित किया गया। इससे बच्चों में अपने आसपास के सामाजिक और प्राकृतिक वातावरण को समझने की क्षमता विकसित हुई।
स्मार्ट कक्षा और नक्षत्रशाला से तकनीकी शिक्षा
विद्यालय में तकनीक आधारित शिक्षा को भी बढ़ावा दिया गया। स्मार्ट कक्षा और नक्षत्रशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को विज्ञान, अंतरिक्ष और वैज्ञानिक सोच से जुड़ी जानकारियां दी गईं।
शिक्षण को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बाल-केंद्रित और गतिविधि आधारित बनाने पर जोर रहा। बच्चों को केवल जानकारी याद कराने के बजाय उनकी समझ, कौशल और व्यवहारिक सीख पर ध्यान दिया गया।
समुदाय के सहयोग से विद्यालय में सुविधाओं का विस्तार
विद्यालय की जरूरतों को पूरा करने के लिए सामुदायिक सहभागिता भी सुनिश्चित की गई। बैंक के सहयोग से विद्यालय में सोलर पैनल और पंखे उपलब्ध कराए गए। इसके साथ ही जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए भी प्रयास किए गए।
विद्यालय और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में किए गए इन प्रयासों से बच्चों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिली।
बालिका शिक्षा और ड्रॉपआउट बच्चों पर विशेष ध्यान
सुनीता रानी ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्कूल चलो अभियान, अभिभावक जागरूकता कार्यक्रम और ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा विद्यालय से जोड़ने के लिए प्रयास किए। अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा जारी रखने और विशेष रूप से बेटियों की पढ़ाई के महत्व के बारे में जागरूक किया गया।
विद्यालय में समावेशी शिक्षा को भी प्राथमिकता दी गई। दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा शिक्षण गतिविधियों में अन्य बच्चों के समान अवसर देने का प्रयास किया गया।
खेलों में विद्यार्थियों ने हासिल की बड़ी उपलब्धियां
विद्यालय के विद्यार्थियों ने खेल प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन किया। वर्ष 2025-26 में राज्य स्तर पर विद्यार्थियों ने चार स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक हासिल किए। मंडल स्तर की प्रतियोगिताओं में 12 स्वर्ण, चार रजत और तीन कांस्य पदक प्राप्त किए गए।
विद्यालय की छात्रा दिव्या ने राष्ट्रीय स्तर की स्कूली कुश्ती प्रतियोगिता में भी प्रतिभाग किया। खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास और टीम भावना विकसित करने पर जोर दिया गया।
मीना मंच ने छात्राओं को दिया नेतृत्व का अवसर
विद्यालय में मीना मंच के माध्यम से छात्राओं को अपनी प्रतिभा दिखाने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर मिला। छात्रा सारा बी. ने मंडल स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया और राज्य स्तर पर सम्मान प्राप्त किया।
इस पहल के जरिए छात्राओं को अपनी बात रखने, निर्णय लेने और विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया।
पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती पर भी काम
विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी कई गतिविधियां संचालित की गईं। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण किया गया। विद्यार्थियों को पौधों के संरक्षण और पर्यावरण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया।
इसके अलावा विद्यालय परिसर में ऑर्गेनिक सब्जियों और मशरूम की खेती भी कराई गई। इससे बच्चों को जैविक खेती की जानकारी देने के साथ उन्हें खेती की व्यावहारिक प्रक्रिया से जोड़ने का अवसर मिला।
विद्यालय के भौतिक परिवेश में हुआ सुधार
विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं और भौतिक परिवेश को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया गया। विद्यालय ने 19 पैरामीटर संतृप्त किए, जिसके लिए जिलाधिकारी की ओर से विद्यालय को सम्मानित किया गया।
विद्यालय में बेहतर शैक्षिक माहौल बनाने के साथ-साथ बच्चों के लिए सुविधाजनक और आकर्षक वातावरण तैयार करने के प्रयास किए गए।
पोषण के क्षेत्र में भी मिली सफलता
विद्यालय में बच्चों के पोषण को ध्यान में रखते हुए जैविक सब्जियों और मशरूम की खेती की गई। वहीं विद्यालय की रसोइया ने जिला स्तरीय मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) प्रतियोगिता में सफलता हासिल की।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ उन्हें स्वस्थ खानपान और जैविक उत्पादन के महत्व से परिचित कराना भी रहा।
परिवार और विद्यार्थियों को दिया सफलता का श्रेय
राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चयनित होने पर सुनीता रानी ने इसे गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा में कोई कमी न रहे, यही उनका हमेशा प्रयास रहा है। विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने और बच्चों के विभिन्न गतिविधियों से जुड़ने पर उन्होंने खुशी जताई।
उन्होंने पुरस्कार के लिए चयन का श्रेय अपने परिवार, साथी शिक्षकों और विद्यार्थियों को दिया। उनके पति अनूप सिंह भी शिक्षक हैं और राजकीय हाईस्कूल सेहल में तैनात हैं। उनके पिता किशनलाल भी शिक्षक रह चुके हैं। सुनीता रानी के तीन बेटे अश्वनी कुमार, आशीष और कार्तिक हैं।
पांच सितंबर को लखनऊ में होगा सम्मान
सुनीता रानी का चयन अब उन्हें राज्य स्तर पर सम्मान दिलाने जा रहा है। शिक्षक दिवस यानी पांच सितंबर को लखनऊ में आयोजित समारोह में उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया जाएगा।
उनकी उपलब्धियां यह दर्शाती हैं कि विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल, तकनीक, नवाचार, पर्यावरण, सामुदायिक सहभागिता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को साथ लेकर चलने से शिक्षा को प्रभावी बनाया जा सकता है।
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