
“नेपाल में भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड से मृतकों की संख्या 1000 के पार पहुंच गई है। भारतीय दूतावास ने मृत भारतीयों के शवों की पहचान और स्वदेश वापसी के लिए नेपाल सरकार की 9-चरणीय प्रक्रिया साझा की है।“
नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ और भूस्खलन के कारण मरने वालों की संख्या 1000 के पार पहुंच गई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। इस बीच भारत ने नेपाल में मृत विदेशी नागरिकों के शवों की पहचान और उन्हें स्वदेश लाने की प्रक्रिया को लेकर अहम जानकारी साझा की है।
नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने मंगलवार को शवों की पहचान और उनके प्रत्यावर्तन यानी स्वदेश वापसी के लिए नेपाल सरकार की ओर से निर्धारित नौ चरणों वाली प्रक्रिया जारी की। दूतावास के अनुसार, इस प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच से लेकर फोटोग्राफ और विवरण दर्ज करने, पोस्टमार्टम, फोरेंसिक नमूने जुटाने और शव की औपचारिक पहचान तक कई चरण शामिल हैं।
275 भारतीय और 128 भारतीय मूल के लोग लापता
बाढ़ की इस भयावह त्रासदी में कम से कम 275 भारतीय और 128 भारतीय मूल के लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों को प्रभावित किया।
बाढ़ के पानी ने घरों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था बाधित होने के साथ जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।
नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, मंगलवार तक देश में 987 लोगों की मौत की पुष्टि की गई थी और करीब 3,916 लोग लापता हैं। लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। चीन की ओर से रविवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की सूचना थी। इन आंकड़ों के बीच कुल मृतकों की संख्या 1000 के पार पहुंच गई है।
शवों की पहचान के लिए 9 चरणों वाली प्रक्रिया
भारतीय दूतावास ने बताया कि विदेशी नागरिकों के शवों को उनके परिजनों को सौंपने के लिए नेपाल सरकार ने नौ चरण निर्धारित किए हैं। इस प्रक्रिया में सबसे पहले शव से संबंधित आवश्यक दस्तावेज और विवरण तैयार किए जाएंगे।
इसके बाद शव की तस्वीरें और अन्य पहचान संबंधी जानकारियां दर्ज की जाएंगी। पोस्टमार्टम और मौत के कारण की पुष्टि के बाद शव से फिंगरप्रिंट, डीएनए और अन्य फोरेंसिक नमूने लिए जाएंगे।
मृतक के पासपोर्ट या अन्य पहचान दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जाएगा। इसके बाद संबंधित दूतावास या वाणिज्य दूतावास के साथ समन्वय कर शव की औपचारिक पहचान और हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
शुरुआती चार चरण नेपाल के अधिकारी करेंगे
भारतीय दूतावास के मुताबिक, इस प्रक्रिया के शुरुआती चार चरण नेपाल के संबंधित अधिकारी पूरा करेंगे। इसके बाद पहचान और स्वदेश वापसी के लिए संबंधित देश के दूतावास की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
यदि परिजन नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध तस्वीरों और विवरण के आधार पर शव की पहचान कर लेते हैं तो भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर शव को परिजनों को सौंपने और भारत लाने की प्रक्रिया में सहायता करेगा।
बड़ी संख्या में शवों को अस्थायी रूप से दफनाया गया
नेपाल सरकार ने स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को देखते हुए बड़ी संख्या में बरामद शवों को अस्थायी रूप से दफना दिया है। ऐसे शवों की पहचान के लिए डीएनए मिलान की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
दूतावास के अनुसार, नेपाल के अधिकारी शवों से डीएनए नमूने एकत्र कर उनके डीएनए प्रोफाइल तैयार कर रहे हैं। यदि किसी शव की पहचान सामान्य माध्यमों से नहीं हो पाती है या उसे अस्थायी रूप से दफना दिया गया है तो डीएनए मिलान के जरिए पहचान सुनिश्चित की जाएगी।
प्रथम श्रेणी के रिश्तेदारों के डीएनए से होगा मिलान
मृतकों की पहचान के लिए उनके प्रथम श्रेणी के जैविक रिश्तेदारों के डीएनए नमूने लिए जाएंगे। इनमें जैविक माता-पिता, सगे भाई-बहन और जैविक बेटे-बेटियां शामिल हैं।
भारतीय दूतावास ने बताया कि मृतक के प्रथम श्रेणी के रिश्तेदार अपना डीएनए प्रोफाइल ईमेल के माध्यम से भेज सकते हैं। इसके अलावा आवश्यक प्रारंभिक जानकारी के साथ रक्त का नमूना भी उपलब्ध कराया जा सकता है।
परिजन चाहें तो अपने डीएनए प्रोफाइल भारतीय दूतावास को भी उपलब्ध करा सकते हैं। दूतावास इसे नेपाल के संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर पहचान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
दस्तावेजों और फोरेंसिक जांच के बाद होगी स्वदेश वापसी
शव की पहचान होने के बाद पासपोर्ट अथवा अन्य पहचान दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। संबंधित दूतावास और नेपाली अधिकारियों के बीच आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शव को सौंपने की प्रक्रिया शुरू होगी।
इस दौरान हैंडओवर या रिलीज मेमो और प्राप्ति रसीद जैसे दस्तावेज भी तैयार किए जाएंगे। इसके बाद शव को भारत या संबंधित देश वापस भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
राहत और बचाव अभियान लगातार जारी
नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद कई दुर्गम इलाकों में राहत और बचाव अभियान अब भी जारी है। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोग संपर्क मार्गों से कट गए हैं। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ बरामद शवों की पहचान का काम भी प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों के परिजनों के लिए दूतावास ने सहायता और समन्वय की व्यवस्था की है।
भारतीय दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
भारतीय दूतावास ने मृतकों की पहचान और शवों की स्वदेश वापसी से संबंधित जानकारी के लिए तीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। इन नंबरों पर व्हाट्सऐप सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
दूतावास ने प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिजनों से आधिकारिक माध्यमों के जरिए संपर्क बनाए रखने और पहचान प्रक्रिया के लिए जरूरी दस्तावेज तथा डीएनए संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की है।
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