
“SCO Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई, टेरर फंडिंग और सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करने पर जोर दिया। पीएम ने सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर को भारत की प्राथमिकता बताया।“
बिश्केक: SCO Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए केवल कार्रवाई और प्रतिक्रिया तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। आतंकवाद की पूरी इकोसिस्टम को खत्म करना होगा, जिसमें टेरर फाइनेंसिंग, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाह शामिल हैं। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ किसी भी तरह के दोहरे मापदंड से बचने की जरूरत पर भी जोर दिया।
किर्गिज गणराज्य की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की प्राथमिकताओं को Security, Connectivity और Opportunity के तीन स्तंभों के रूप में सामने रखा। भारत सरकार के अनुसार यह शिखर सम्मेलन SCO की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित हो रहा है। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है।
आतंकवाद पर पीएम मोदी का सख्त रुख
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए आतंकवाद एक गंभीर चुनौती है और इसके खिलाफ सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने आतंकवाद के पूरे नेटवर्क को निशाना बनाने की जरूरत बताई।
मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल किसी घटना के बाद जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसके पीछे मौजूद फंडिंग नेटवर्क, भर्ती तंत्र, कट्टरपंथ फैलाने वाली व्यवस्था और आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने वाले ठिकानों पर भी कार्रवाई जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक और निर्णायक कार्रवाई की वकालत करता रहा है।
SCO के लिए भारत के तीन मंत्र
प्रधानमंत्री मोदी ने SCO के संदर्भ में भारत की प्राथमिकताओं को तीन प्रमुख स्तंभों में रखा है।
1. Security यानी सुरक्षा
मोदी ने सुरक्षा को सबसे पहली जरूरत बताते हुए आतंकवाद, संगठित अपराध, सूचना सुरक्षा और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी चुनौतियों के खिलाफ प्रभावी सहयोग की बात कही।
उन्होंने SCO के तहत सुरक्षा से जुड़े तंत्र को ज्यादा प्रभावी बनाने और समय पर समन्वय तथा कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार केवल संस्थागत ढांचा बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे जमीन पर परिणाम देने वाला प्रभावी तंत्र बनाना होगा।
2. Connectivity यानी बेहतर संपर्क
मोदी ने SCO में कनेक्टिविटी को दूसरा महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि बेहतर संपर्क व्यवस्था से बाजारों को जोड़ने, व्यापार को आसान बनाने और विकास के नए अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।
भारत का जोर सड़क, रेल और हवाई संपर्क के साथ-साथ सरल कस्टम प्रक्रिया, बेहतर लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक आवाजाही को आसान बनाने पर है।
हालांकि, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि कनेक्टिविटी परियोजनाओं में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।
3. Opportunity यानी लोगों के लिए अवसर
प्रधानमंत्री मोदी ने SCO सहयोग का तीसरा स्तंभ Opportunity यानी अवसर को बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सहयोग का वास्तविक लाभ आम लोगों तक पहुंचना चाहिए।
मोदी ने युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर, स्टार्टअप के लिए नए बाजार, किसानों तक तकनीक की पहुंच और नागरिकों के जीवन में सुधार को विकास की कसौटी बताया।
उन्होंने कहा कि SCO की साझेदारी केवल सरकारों तक सीमित न रहकर People-driven partnerships की दिशा में आगे बढ़नी चाहिए।
‘विजन से परिणाम’ की ओर बढ़ने की अपील
प्रधानमंत्री ने SCO देशों से अपील की कि संगठन को केवल घोषणाओं और विजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अब जरूरत ऐसे सहयोग की है, जिसका प्रत्यक्ष लाभ सदस्य देशों और उनके नागरिकों को मिले।
भारत ने SCO के मंच पर सुरक्षा, संपर्क और अवसर को अपनी प्राथमिकताओं के रूप में सामने रखा है। प्रधानमंत्री की यात्रा के आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक वह SCO Summit के दौरान विभिन्न सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर रहे हैं।
मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात ने खींचा ध्यान
बिश्केक में SCO Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी आमने-सामने नजर आए। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया और कुछ समय बातचीत करते हुए दिखाई दिए।
SCO Summit में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई देशों के शीर्ष नेता शामिल हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की पुतिन के साथ 31 अगस्त को द्विपक्षीय बैठक भी हुई थी, जिसमें दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संबंधों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई।
अफगानिस्तान और पश्चिम एशिया पर भी भारत की चिंता
प्रधानमंत्री मोदी ने अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता को पूरे यूरेशियाई क्षेत्र की सुरक्षा से जोड़ते हुए वहां के लोगों के विकास और मानवीय जरूरतों के लिए भारत के योगदान को जारी रखने की बात कही।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय संघर्षों का प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता। इसका असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन पर भी पड़ता है।
भारत ने ऐसे विवादों को संवाद और कूटनीति के जरिए हल करने की आवश्यकता दोहराई है। प्रधानमंत्री ने 31 अगस्त को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की थी और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की थी।
SCO Summit 2026 क्यों है महत्वपूर्ण?
SCO Summit 2026 ऐसे समय में हो रहा है जब एशिया और यूरेशिया में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और भू-राजनीतिक तनाव जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं।
SCO के मंच पर भारत का जोर सुरक्षा के साथ आर्थिक और मानवीय सहयोग बढ़ाने पर है। भारत के लिए मध्य एशिया के साथ संपर्क और व्यापारिक रिश्ते भी महत्वपूर्ण हैं।
यह शिखर सम्मेलन SCO की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रहा है। भारत 2017 से संगठन का पूर्ण सदस्य है और इस मंच पर क्षेत्रीय सुरक्षा एवं सहयोग के मुद्दों को लगातार प्रमुखता देता रहा है।
World Nomad Games में भी शामिल हुए PM मोदी
SCO Summit से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने बिश्केक में आयोजित छठे World Nomad Games के उद्घाटन समारोह में भी हिस्सा लिया। उन्होंने भारतीय दल के सदस्यों से मुलाकात की।
भारत सरकार के मुताबिक भारतीय दल में 87 सदस्य शामिल हैं, जिनमें 73 खिलाड़ी, 10 सांस्कृतिक प्रतिनिधि और वैज्ञानिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले चार प्रतिभागी शामिल हैं।
भारत-रूस संबंधों पर भी चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, मोबिलिटी और लोगों के बीच संबंधों की समीक्षा की गई।
दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए। भारत ने पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र में जारी संघर्षों के संदर्भ में संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाने की आवश्यकता दोहराई।
SCO Summit 2026 का बड़ा संदेश
बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन का मुख्य संदेश स्पष्ट रहा—सुरक्षा के बिना विकास संभव नहीं, बेहतर कनेक्टिविटी के बिना क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग अधूरा है और सहयोग का अंतिम लाभ आम लोगों तक पहुंचना चाहिए।
आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई, संप्रभुता के सम्मान के साथ कनेक्टिविटी और युवाओं के लिए अवसर पैदा करने की भारत की प्राथमिकता SCO Summit 2026 में उसके एजेंडे के केंद्र में रही।
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