कर्नाटक की मतदाता सूची से हटे करीब 99 लाख नाम, अंतिम लिस्ट में 4.55 करोड़ वोटर

बेंगलुरु। कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के मुताबिक, अब राज्य में कुल 4,55,00,011 मतदाता हैं। एसआईआर से पहले यह संख्या 5,54,32,314 थी। इस तरह अंतिम सूची में करीब 99.32 लाख मतदाता कम हो गए हैं।

अंतिम मतदाता सूची में 2,25,40,493 पुरुष और 2,29,12,355 महिला मतदाता शामिल हैं। वहीं, तीसरे लिंग के 2,841 मतदाता दर्ज किए गए हैं। राज्य में 18 से 19 साल की उम्र के 6.83 लाख से अधिक मतदाता भी हैं।

दावे और आपत्तियों के दौरान जुड़े 10 लाख से ज्यादा नाम

24 अगस्त से 23 सितंबर तक चले दावे और आपत्तियों के चरण में मतदाता सूची में 10,08,038 नए मतदाता जोड़े गए, जबकि 1,88,324 नाम हटाए गए। इसके अलावा, 8,96,519 प्रविष्टियों में सुधार किया गया। आवेदनों की जांच और निपटारे की प्रक्रिया 22 अक्टूबर तक चली।

हटाए गए नामों में 1,24,327 ऐसे मतदाता थे, जो स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए थे। वहीं, 61,960 नाम अन्य श्रेणी में हटाए गए। इनमें सुनवाई के दौरान अयोग्य पाए गए मतदाता शामिल थे। इसके अलावा, 1,091 मृत मतदाताओं, 762 दोहरी प्रविष्टियों और 184 अनुपस्थित मतदाताओं के नाम भी हटाए गए।

नए जुड़े मतदाताओं में 8,77,104 नाम फॉर्म 6 के जरिए, 2,312 नाम फॉर्म 6A के जरिए और 1,28,622 नाम फॉर्म 8 के जरिए जोड़े गए। फॉर्म 8 का इस्तेमाल स्थान परिवर्तन से जुड़ी जानकारी में बदलाव के लिए किया गया।

30 जून को शुरू हुई थी एसआईआर प्रक्रिया

कर्नाटक में एसआईआर की शुरुआत 30 जून को हुई थी। इस प्रक्रिया के तहत राज्य के करीब 5.54 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन किया गया। वर्ष 2002 के बाद राज्य में इस तरह की यह पहली बड़ी कवायद थी। बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर फॉर्म जुटाए और मतदाताओं के विवरण की जांच की।

अगस्त में जारी हुई थी ड्राफ्ट सूची

24 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 4.46 करोड़ मतदाताओं के नाम थे। उस समय लगभग 1.08 करोड़ नाम सूची में शामिल नहीं थे। इन नामों को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लिकेट और अन्य श्रेणियों में रखा गया था।

इसके बाद चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां आमंत्रित कीं। जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड पुरानी सूची से मेल नहीं खाते थे या जिनकी जानकारी में विसंगतियां मिली थीं, उनके दस्तावेजों का सत्यापन किया गया। आयोग ने ऐसे 43.81 लाख मतदाताओं की पहचान कर उन्हें नोटिस जारी किए और पात्रता साबित करने का मौका दिया।

सत्यापन और सुनवाई की प्रक्रिया 22 अक्टूबर को पूरी हुई। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई।

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