UP चुनाव 2027: क्या ओवैसी की AIMIM से बीजेपी को होगा फायदा? बाबा रामदेव के बयान से छिड़ी बहस

UP चुनाव 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा सियासी सवाल उठने लगा है। क्या असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के चुनाव लड़ने से बीजेपी को फायदा होता है? योग गुरु बाबा रामदेव ने इस मुद्दे पर बयान देकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। 26 अक्टूबर 2026 को संभल के बबराला में आर्य महासम्मेलन के बाद उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में ओवैसी की मौजूदगी से कुछ वर्गों के वोट बंट सकते हैं और इसका फायदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मिल सकता है। लेकिन क्या चुनावी आंकड़े भी इस दावे की पुष्टि करते हैं? आइए, समझते हैं।

बाबा रामदेव के बयान के पीछे वोटों के बंटवारे का गणित है। जब किसी सीट पर बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच कड़ा मुकाबला होता है, तो तीसरी पार्टी की मौजूदगी नतीजे को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, यह मान लेना सही नहीं है कि तीसरी पार्टी को मिलने वाले सभी वोट किसी एक विपक्षी दल को ही मिलते। मतदाताओं की पसंद उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दों और राजनीतिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है।

इसकी एक मिसाल नवंबर 2022 के बिहार के गोपालगंज विधानसभा उपचुनाव में देखने को मिली। यहां बीजेपी की कुसुम देवी ने आरजेडी के मोहन प्रसाद गुप्ता को 1,794 वोटों से हराया, जबकि AIMIM के उम्मीदवार अब्दुल सलाम को 12,214 वोट मिले। इस नतीजे के बाद विपक्षी वोटों के बंटवारे पर चर्चा हुई। हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि AIMIM चुनाव नहीं लड़ती तो जीत किसकी होती।

फरवरी 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुस्तफाबाद सीट पर भी विपक्षी वोटों के बंटवारे को लेकर सवाल उठे। यहां बीजेपी के मोहन सिंह बिष्ट ने 85,215 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। आम आदमी पार्टी के अदील अहमद खान को 67,637, AIMIM के ताहिर हुसैन को 33,474 और कांग्रेस के अली मेहदी को 11,763 वोट मिले। बीजेपी की जीत के बाद इस सीट पर विपक्षी वोटों के बंटवारे की चर्चा हुई, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि AIMIM के उम्मीदवार के मैदान में न होने पर उसके मतदाता किसे वोट देते।

हालांकि, हर चुनाव में AIMIM की मौजूदगी से बीजेपी को ही फायदा हो, ऐसा जरूरी नहीं है। महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के चुनावी नतीजे बताते हैं कि इसका असर सीट और स्थानीय समीकरण के हिसाब से बदल सकता है। बिहार के सीमांचल क्षेत्र में AIMIM ने अपनी अलग राजनीतिक ताकत भी दिखाई है। इसलिए पार्टी को केवल वोट काटने वाली पार्टी कहना पूरी तस्वीर नहीं बताता।

अब सवाल उत्तर प्रदेश का है, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। बाबा रामदेव का दावा कितना सही साबित होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि AIMIM किन सीटों पर उम्मीदवार उतारती है, वहां मुख्य मुकाबला किन दलों के बीच होता है और मतदाताओं का रुझान क्या रहता है। फिलहाल, यह कहना जल्दबाजी होगी कि ओवैसी की पार्टी के चुनाव लड़ने से बीजेपी की जीत तय हो जाएगी। असली तस्वीर चुनाव के दौरान सीटवार मुकाबले और नतीजों से ही साफ होगी।

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