
नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात की। दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली के बाद हुई इस बैठक को विपक्षी एकजुटता के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को घेर रहा है। ऐसे में कांग्रेस और राजद के शीर्ष नेताओं की बैठक को गठबंधन की आगे की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
रामलीला मैदान की रैली में तेजस्वी ने उठाया वोट चोरी का मुद्दा
रामलीला मैदान में आयोजित रैली के दौरान तेजस्वी यादव ने वोट चोरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में वोट चोरी की शुरुआत बिहार से हुई। तेजस्वी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उसे ‘दो नंबरी सरकार’ बताया।
उन्होंने महाभारत में शकुनि और उसके पासों का उदाहरण देते हुए चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया। तेजस्वी ने कहा कि यह लड़ाई देश के मतदाताओं और धोखेबाजों के बीच है।

अपने भाषण में उन्होंने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। साथ ही विपक्षी दलों से एकजुट होकर भाजपा को हराने की अपील की। इससे संकेत मिलता है कि राजद वोट चोरी के मुद्दे को केवल बिहार तक सीमित रखने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की साझा मुहिम बनाना चाहता है।
कांग्रेस और राजद की नजदीकी क्यों है अहम?
बिहार की राजनीति में कांग्रेस और राजद का गठबंधन इंडिया ब्लॉक के लिए काफी महत्वपूर्ण है। राजद के पास बिहार में मजबूत संगठन और अपना सामाजिक आधार है, जबकि कांग्रेस का देशभर में राजनीतिक नेटवर्क है। दोनों दलों के बीच बेहतर तालमेल विपक्ष को साझा मुद्दों पर एकजुट रखने और भाजपा के खिलाफ अभियान चलाने में मदद कर सकता है।
वहीं, दोनों दलों के बीच दूरी या सीट बंटवारे को लेकर विवाद विपक्षी एकता के दावों को कमजोर कर सकता है। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में भी दोनों पार्टियों के बीच सीटों को लेकर तालमेल देखने को मिला था। ऐसे में सोनिया गांधी की लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव से मुलाकात को गठबंधन के रिश्तों को मजबूत बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
2027 के यूपी चुनाव पर भी विपक्ष की नजर
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। यहां भाजपा के खिलाफ विपक्षी रणनीति में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच तालमेल अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि, दोनों दलों के सामने सीट बंटवारे और अपने संगठनात्मक हितों को लेकर सहमति बनाने की चुनौती है।
रिपोर्टों के मुताबिक, गठबंधन को लेकर बातचीत के बावजूद सीटों के सवाल पर दोनों दलों के बीच दबाव और मतभेद की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में कांग्रेस और राजद के बीच बेहतर समन्वय का असर विपक्षी गठबंधन की व्यापक रणनीति पर भी पड़ सकता है।
तेजस्वी यादव का उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराने का आह्वान भी इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विपक्ष की कोशिश है कि SIR और वोट चोरी के मुद्दे को चुनावी बहस में बनाए रखा जाए और अलग-अलग राज्यों में इसे साझा अभियान का रूप दिया जाए।
अब देखना होगा कि रामलीला मैदान की रैली और सोनिया गांधी की लालू-तेजस्वी से मुलाकात के बाद विपक्षी एकता का यह संदेश चुनावी तालमेल में कितना असर दिखा पाता है।









