
नई दिल्ली : महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले के मुख्य आरोपी और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। लंबे समय से फरार चल रहे सौरभ के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। ओमान में हिरासत में लिए जाने के बाद सीबीआई की टीम उसे भारत लेकर आई।
सोमवार को सौरभ को दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय से रायपुर की अदालत में पेश करने के लिए ले जाया गया। वह सीबीआई के दो मामलों में वांछित है, जिनमें चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी उसके खिलाफ एक मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की है।

इस मामले में सट्टेबाजी के बड़े नेटवर्क, करोड़ों रुपये के लेनदेन और कई लोगों की कथित भूमिका की जांच चल रही है। आइए जानते हैं कि महादेव बेटिंग एप क्या था, इसका नेटवर्क कैसे काम करता था और जांच में अब तक क्या सामने आया है।
महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप क्या था?
महादेव ऑनलाइन बुक एक ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म था। इसके जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन और कार्ड गेम जैसे खेलों पर पैसे लगाने की सुविधा दी जाती थी। इसमें पोकर, तीन पत्ती, ड्रैगन टाइगर और वर्चुअल क्रिकेट जैसे गेम भी शामिल थे।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए भारतीय चुनावों के नतीजों पर भी सट्टा लगाया जाता था। यह सिर्फ एक एप नहीं था, बल्कि कई वेबसाइटों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का बड़ा नेटवर्क था।
ईडी के मुताबिक, इसके मुख्य प्रमोटर छत्तीसगढ़ के भिलाई निवासी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल थे। दोनों ने मिलकर इस नेटवर्क को खड़ा किया। 2019-20 के दौरान इसका कारोबार तेजी से बढ़ा और बाद में दोनों दुबई से इसे संचालित करने लगे।
लोगों को कैसे जोड़ा जाता था?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क को फैलाने के लिए फ्रेंचाइजी मॉडल अपनाया गया था। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसके पैनल और ब्रांच बनाए गए थे।
इन पैनलों के संचालक लोगों की आईडी बनाते और उनसे सट्टेबाजी के लिए पैसे लेते थे। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए भी लोगों तक पहुंच बनाई जाती थी।
इस व्यवस्था में विदेश में बैठे प्रमोटर तकनीक और पैसों का नियंत्रण संभालते थे, जबकि भारत में मौजूद पैनल संचालक ग्राहकों को जोड़ने और स्थानीय स्तर पर कारोबार चलाने का काम करते थे।
सट्टेबाजी की रकम कैसे छिपाई जाती थी?
जांच एजेंसियों का आरोप है कि सट्टेबाजी से मिलने वाले पैसों को छिपाने के लिए कई बैंक खातों और कंपनियों का इस्तेमाल किया जाता था। रकम को म्यूल बैंक खातों के जरिए अलग-अलग खातों में भेजा जाता था। इसके बाद शेल कंपनियों और कई स्तर के लेनदेन के माध्यम से पैसों का असली स्रोत छिपाने की कोशिश की जाती थी।
सीबीआई के मुताबिक, कथित कमाई का एक हिस्सा हवाला के जरिए विदेश भेजा जाता था। वहीं, ईडी ने आरोप लगाया कि बेटिंग से मिले पैसों का कुछ हिस्सा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के जरिए भारतीय शेयर बाजार में भी लगाया गया।
सीबीआई की जांच में सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी दिए जाने की बात भी सामने आई है। एजेंसी इस पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
मामला जांच एजेंसियों तक कैसे पहुंचा?
साल 2021 में पुलिस को इस नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर सट्टेबाजी किए जाने की जानकारी मिली। इसके बाद 30 मार्च 2022 को दुर्ग पुलिस ने छापेमारी कर इस रैकेट का खुलासा किया।
महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामलों में छत्तीसगढ़ और दूसरे राज्यों की पुलिस ने एफआईआर दर्ज कीं। इनमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे आरोप लगाए गए।
अक्टूबर 2022 में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच शुरू की। बाद में आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में दर्ज एफआईआर को भी जांच में शामिल किया गया। छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने भी इस मामले से जुड़े केस अपने हाथ में लिए।
दुबई में 200 करोड़ रुपये की शादी से कैसे बढ़ी चर्चा?
फरवरी 2023 में सौरभ चंद्राकर ने दुबई में शादी की। ईडी के मुताबिक, इस समारोह पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
मेहमानों को लाने के लिए प्राइवेट जेट किराये पर लिए गए और लग्जरी होटलों में ठहरने की व्यवस्था की गई। शादी में कई बॉलीवुड कलाकारों और गायकों के शामिल होने की बात भी सामने आई। इनमें सनी लियोनी, नेहा कक्कड़, आतिफ असलम, राहत फतेह अली खान, टाइगर श्रॉफ और भाग्यश्री के नाम बताए गए।
ईडी का दावा है कि इस आयोजन के लिए करीब 112 करोड़ रुपये हवाला के जरिए एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को दिए गए थे। वहीं, होटल बुकिंग पर लगभग 42 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
शादी के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस आयोजन पर खर्च हुई रकम और उसके स्रोत को लेकर जांच एजेंसियों की दिलचस्पी बढ़ गई।
नेताओं और अधिकारियों पर क्या आरोप लगे?
जांच के दौरान इस मामले में राजनीतिक लोगों और सरकारी अधिकारियों की कथित भूमिका भी सामने आई। ईडी ने आरोप लगाया कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी।
साल 2025 में इस मामले में दर्ज सीबीआई की एफआईआर में भूपेश बघेल को आरोपी बनाया गया। हालांकि, बघेल ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया है और इन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
सीबीआई पुलिस अधिकारियों, नौकरशाहों और अन्य बिचौलियों की कथित भूमिका की भी जांच कर रही है। एजेंसियों का आरोप है कि नेटवर्क को संरक्षण देने के लिए कुछ लोगों को पैसे दिए गए थे।
गिरफ्तारी से बचने के लिए विदेशी पासपोर्ट का सहारा?
ईडी की कार्रवाई तेज होने के बाद सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल की विदेशी नागरिकता का मामला भी सामने आया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों के वानुआतु के पासपोर्ट पेश किए गए थे।
दस्तावेजों के मुताबिक, सौरभ को 6 मई 2022 और रवि उप्पल को 28 जून 2022 को पासपोर्ट जारी किए गए थे। इनकी वैधता 2032 तक बताई गई थी। जांच एजेंसियों को आशंका थी कि विदेशी नागरिकता का इस्तेमाल भारतीय कानून और प्रत्यर्पण की कार्रवाई से बचने के लिए किया जा सकता है।
दुबई में शिव महापुराण कथा का आयोजन
दिसंबर 2024 में सौरभ चंद्राकर और उसके परिवार ने दुबई के ली मेरिडियन होटल एंड कॉन्फ्रेंस सेंटर में पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा का आयोजन कराया था। यह कथा 9 से 11 दिसंबर तक चली।
कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें सौरभ अपनी पत्नी और परिवार के साथ कथा सुनता दिखाई दिया। उसका कारोबारी साझेदार रवि उप्पल भी पंडित प्रदीप मिश्रा से आशीर्वाद लेता नजर आया।
ईडी ने 94,400 करोड़ रुपये की कमाई का दावा किया
ईडी ने 24 सितंबर को रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में इस मामले में अपनी छठी अभियोजन शिकायत दाखिल की। एजेंसी ने दावा किया कि महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़ी वेबसाइटों ने पिछले 10 वर्षों में करीब 94,400 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित कमाई की।
ईडी के मुताबिक, महादेव एप विदेश में होस्ट की गई कई अवैध बेटिंग वेबसाइटों का नेटवर्क था। एजेंसी ने अदालत को बताया कि मुख्य प्लेटफॉर्म अब भी सक्रिय था और बड़ी संख्या में पैनलों के जरिए काम कर रहा था।
इस शिकायत में 42 लोगों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया। हालांकि, ईडी ने स्पष्ट किया कि 94,400 करोड़ रुपये का आंकड़ा शुरुआती अनुमान है और नए सबूत मिलने पर इसमें बदलाव हो सकता है।
एजेंसी का यह भी दावा है कि भिलाई, रायपुर, भोपाल और दिल्ली जैसे शहरों में पैनल चलाने वाले कुछ लोगों ने 3.5 करोड़ से 60 करोड़ रुपये तक कमाए। आरोप है कि इस रकम से संपत्तियां, सोना, गाड़ियां और महंगी साड़ियां खरीदी गईं।
अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई?
महादेव बेटिंग एप मामले में ईडी और सीबीआई ने कई स्तरों पर कार्रवाई की है। इसमें गिरफ्तारियां, छापेमारी, संपत्तियों को अटैच करना और अदालत में शिकायतें दाखिल करना शामिल है।
22 अवैध एप और वेबसाइट ब्लॉक
5 नवंबर 2023 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने महादेव बुक ऑनलाइन समेत 22 अवैध बेटिंग एप और वेबसाइट को ब्लॉक करने के आदेश जारी किए थे। यह कार्रवाई ईडी की जांच और उसके अनुरोध के बाद की गई थी।
मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक, उस समय महादेव मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस के कांस्टेबल भीम सिंह यादव और असीम दास को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया गया था।
ईडी ने गिरफ्तारियां और छापेमारी की
ईडी के मुताबिक, इस मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एजेंसी ने देशभर में 190 ठिकानों पर तलाशी ली है। छह अभियोजन शिकायतों में 116 आरोपियों की पहचान की गई है।
करोड़ों रुपये की संपत्तियां अटैच
ईडी ने महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज से जुड़े मामलों में कई संपत्तियां अटैच, जब्त और फ्रीज की हैं।
10 जुलाई की कार्रवाई में विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों की करीब 940.77 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अटैच की गईं। इनमें आवासीय संपत्तियां, जमीन, इक्विटी शेयर और अन्य सिक्योरिटीज शामिल हैं।
ईडी के मुताबिक, नेटवर्क की कथित कमाई को शेल कंपनियों और कई स्तर के लेनदेन के जरिए विकास गर्ग से जुड़ी कंपनियों तक पहुंचाया गया था।
इस कार्रवाई से पहले मामले में करीब 2,825 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी थीं। नई कार्रवाई के बाद यह आंकड़ा करीब 3,800 करोड़ रुपये हो गया था।
मार्च 2026 में ईडी ने सौरभ चंद्राकर और उसके नेटवर्क से जुड़ी करीब 1,700 करोड़ रुपये की 20 अचल संपत्तियां अटैच की थीं। इनमें दुबई की 18 और नई दिल्ली की दो संपत्तियां शामिल थीं। इन संपत्तियों में बुर्ज खलीफा का अपार्टमेंट, दुबई हिल्स एस्टेट के लग्जरी विला और अपार्टमेंट, बिजनेस बे और एसएलएस होटल एंड रेजिडेंसेज की प्रॉपर्टी शामिल बताई गई हैं।









