“पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि गाय पालना आज घाटे का सौदा बन गया है। उन्होंने दूध की कीमत बढ़ाने और नकली खोया, पनीर, घी व अन्य डेयरी उत्पादों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। पढ़ें पूरा बयान।“
गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने गौरक्षा और गौपालन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में गाय पालना घाटे का सौदा बन गया है और केवल भाषण या प्रतीकात्मक आंदोलन से गौरक्षा संभव नहीं है। उनके अनुसार यदि वास्तव में गायों की रक्षा करनी है तो सबसे पहले नकली डेयरी उत्पादों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी।
गोंडा के विष्णोहरपुर गांव स्थित अपने पैतृक आवास पर मीडिया से बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि सरकार और संत समाज गौरक्षा की बात तो करते हैं, लेकिन जमीन पर आर्थिक परिस्थितियां गौपालकों के पक्ष में नहीं हैं।
‘दूध का दाम बढ़ेगा तो गौपालन भी बढ़ेगा’
पूर्व सांसद ने कहा कि एक गौपालक को एक किलो दूध उत्पादन करने में लगभग 100 से 125 रुपये तक का खर्च आता है, जबकि बाजार में दूध 35 से 40 रुपये प्रति किलो के आसपास बिकता है। ऐसी स्थिति में गौपालन लाभ का नहीं बल्कि नुकसान का सौदा बन गया है।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि गौपालन को बढ़ावा देना है तो दूध का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए। उनके अनुसार जब तक गौपालक को आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा, तब तक गौरक्षा की बातें व्यावहारिक नहीं होंगी।
नकली डेयरी उत्पादों पर कार्रवाई की मांग
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि बाजार में नकली खोया, नकली पनीर, नकली घी और नकली मिठाइयों की बिक्री से असली दूध की मांग और कीमत दोनों प्रभावित होती हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन नकली उत्पादों पर प्रभावी रोक लगाई जाए तो असली दूध की कीमत बढ़ेगी और इसका सीधा लाभ गौपालकों को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि गौरक्षा के लिए आंदोलन चलाने से अधिक जरूरी है कि दूध और फैट का उचित मूल्य तय करने की दिशा में प्रयास किए जाएं।
गौशालाओं को लेकर भी जताई चिंता
पूर्व सांसद ने कहा कि वर्तमान समय में गौपालन के लिए मजदूर मिलना भी कठिन हो गया है। उन्होंने दावा किया कि जिन लोगों को सरकारें आर्थिक रूप से सक्षम मानती हैं, वही आज गौशालाओं में काम कर रहे हैं, जबकि पारंपरिक गौपालकों की संख्या लगातार घट रही है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की यात्रा पर क्या बोले?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गौरक्षा यात्रा पर प्रतिक्रिया देते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वह उनके बयानों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन उनका मानना है कि गौरक्षा का स्थायी समाधान आर्थिक मॉडल मजबूत करने में है, न कि केवल भाषणों या प्रतीकात्मक आंदोलनों में।
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