“उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। कर्मचारियों ने स्टाफ की कमी, बढ़ते हादसों और दमनात्मक कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए योगी सरकार को चेतावनी दी। पढ़ें पूरी खबर।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग और भीषण गर्मी के बीच विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समिति का कहना है कि दिन-रात मेहनत कर बिजली व्यवस्था संभाल रहे कर्मचारियों का सहयोग लेने के बजाय उनका लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि दमन और दबाव के बल पर बिजली व्यवस्था को लंबे समय तक सुचारु रूप से नहीं चलाया जा सकता।
संघर्ष समिति के केंद्रीय संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि प्रदेश में बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है, लेकिन दूसरी ओर कर्मचारियों और संविदा कर्मियों की संख्या में लगातार कमी की जा रही है। इसका सीधा असर बिजली आपूर्ति और कर्मचारियों की सुरक्षा दोनों पर पड़ रहा है।
स्टाफ की कमी से बढ़ रहे हादसे
समिति के अनुसार, सीमित कर्मचारियों के भरोसे लगातार फॉल्ट ठीक कराए जा रहे हैं। ओवरलोडिंग और संसाधनों की कमी के कारण फील्ड में काम करने वाले बिजली कर्मियों को दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
समिति का दावा है कि राजधानी लखनऊ में लगभग 40 प्रतिशत संविदा कर्मियों की कमी कर दी गई है। पहले गर्मी के मौसम में अतिरिक्त गैंग और संविदा कर्मचारियों की व्यवस्था की जाती थी, लेकिन इस बार इसके विपरीत स्टाफ घटा दिया गया।
‘वर्टिकल री-स्ट्रक्चरिंग’ पर उठाए सवाल
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि तथाकथित वर्टिकल री-स्ट्रक्चरिंग के तहत 11 केवी और 33 केवी से जुड़े मेंटेनेंस, सप्लाई, बिलिंग और मीटरिंग कार्यों को अलग-अलग कर दिया गया है। इससे बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है और आम उपभोक्ताओं को यह समझना मुश्किल हो रहा है कि शिकायत किस विभाग में दर्ज कराई जाए।
कर्मचारियों का कहना है कि इसका खामियाजा फील्ड स्टाफ को भुगतना पड़ रहा है। कई जगह उपभोक्ताओं द्वारा बिजली घरों का घेराव, अभद्रता और मारपीट जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
मार्च 2023 के आश्वासन का भी किया जिक्र
संघर्ष समिति ने कहा कि मार्च 2023 के आंदोलन के बाद कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई वापस लेने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक उसे लागू नहीं किया गया। इसके बजाय नई दमनात्मक कार्रवाइयां की जा रही हैं, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
जनता और जनप्रतिनिधियों से सहयोग की अपील
समिति ने प्रदेश की जनता से अपील की कि बिजली कर्मी सीमित संसाधनों और भारी कार्यभार के बावजूद 24 घंटे सेवा दे रहे हैं, इसलिए उनका सहयोग किया जाए। साथ ही सांसदों और विधायकों से भी आग्रह किया गया कि वे बिजली कर्मचारियों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाएं।
क्या है कर्मचारियों की चेतावनी?
संघर्ष समिति ने कहा कि यदि कर्मचारियों का उत्पीड़न और संसाधनों की कमी दूर नहीं की गई तो बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना मुश्किल होगा। हालांकि, समिति ने इस बयान में किसी तत्काल हड़ताल की घोषणा नहीं की है, बल्कि प्रबंधन को कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान की चेतावनी दी है।
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