
तेहरान : ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच अब कूटनीतिक हलचल भी तेज होती दिखाई दे रही है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई ने क्षेत्र में जारी ‘न युद्ध, न शांति’ की स्थिति को खत्म करने का आह्वान किया है। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि उनकी सरकार सर्वोच्च नेता के निर्देशों को लागू करने के लिए पूरी क्षमता के साथ काम करेगी। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका की ओर से ईरान पर नए हमलों की आशंका जताई जा रही है और दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू करने की कोशिशें भी जारी हैं।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के मुताबिक, बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में देश के मौजूदा हालात, राष्ट्रीय ताकत बढ़ाने और बाहरी खतरों से निपटने की रणनीति पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने सभी सरकारी विभागों को बदलती परिस्थितियों के लिए सतर्क और तैयार रहने का निर्देश दिया। उन्होंने मंत्रियों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और देश की क्षमताओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
पेजेश्कियान ने प्रतिबंधों और बाहरी दबाव का सामना करने के लिए राष्ट्रीय मजबूती बढ़ाने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि विरोधी देशों को यह नहीं समझना चाहिए कि वे ईरानी जनता की इच्छाशक्ति को कमजोर कर सकते हैं या देश को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर सकते हैं। उनके बयान से संकेत मिलता है कि ईरान मौजूदा दबाव के बीच अपनी तैयारियों और राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।

कैबिनेट बैठक में कूटनीतिक गतिविधियों पर भी चर्चा हुई। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने क्षेत्रीय बातचीत और हाल की राजनयिक मुलाकातों के बारे में जानकारी दी। इसमें कतर के प्रतिनिधिमंडल और पाकिस्तान के सेना प्रमुख की यात्राओं के दौरान हुई चर्चाओं का भी जिक्र किया गया। इन संपर्कों को ऐसे समय अहम माना जा रहा है, जब पश्चिम एशिया में तनाव के बीच बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिशें जारी हैं।
इसी बीच, अमेरिका की ओर से भी ईरान के साथ बातचीत बहाल करने की कोशिश किए जाने की खबर सामने आई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शांति वार्ता दोबारा शुरू करने की संभावना तलाशने के लिए ईरान के वरिष्ठ नेता मोहसेन रेजाई तक सीधा संदेश पहुंचाया है। रेजाई ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव हैं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के पूर्व कमांडर रह चुके हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर भेजे गए संदेश का मकसद यह पता लगाना था कि क्या वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत शुरू करने के लिए कोई ढांचा तैयार किया जा सकता है। हालांकि, इस पहल से बातचीत की औपचारिक शुरुआत या किसी समझौते पर सहमति बन जाने की पुष्टि नहीं होती।
फिलहाल, पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और अमेरिका की अगली रणनीति को लेकर अनिश्चितता है। ऐसे माहौल में ईरान के सर्वोच्च नेता का ‘न युद्ध, न शांति’ की स्थिति समाप्त करने का आह्वान और अमेरिका की ओर से बातचीत का रास्ता तलाशने की खबरें महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। अब देखना होगा कि दोनों देश कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाते हैं या तनाव एक बार फिर बढ़ता है।








