“मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा बयान। ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत कर सकता है मध्यस्थता, PM मोदी ने युद्ध रोकने की अपील की।“
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की संभावित कूटनीतिक भूमिका को लेकर बड़ा संकेत सामने आया है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने बुधवार को कहा कि Iran और United States के बीच जारी तनाव को कम करने में भारत भविष्य में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि उचित समय आने पर भारत इस दिशा में ठोस पहल करेगा और सफल भी हो सकता है।
मोदी की कूटनीति पर भरोसा
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi पहले ही दोनों देशों से युद्ध समाप्त करने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में प्रधानमंत्री का संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण भारत को एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में स्थापित करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन संकट समेत कई वैश्विक मुद्दों पर भारत की संतुलित नीति ने उसकी साख को मजबूत किया है, जिसका लाभ इस मामले में भी मिल सकता है।
परमाणु मुद्दे पर अटकी वार्ता
जानकारी के मुताबिक, Iran और United States के बीच पाकिस्तान में प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता परमाणु कार्यक्रम को लेकर गंभीर मतभेदों के कारण रुक गई है।
यह गतिरोध क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा रहा है और सैन्य टकराव की आशंकाओं को भी जन्म दे रहा है।
सीजफायर बढ़ा, लेकिन भरोसा नहीं
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दो सप्ताह के लिए युद्धविराम (सीजफायर) बढ़ाने की घोषणा की है। इसे दोनों पक्षों को बातचीत के लिए एक और अवसर देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप ने दावा किया कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और सेना प्रमुख Asim Munir के अनुरोध पर लिया गया, ताकि एक संयुक्त शांति प्रस्ताव तैयार किया जा सके।
ईरान ने जताया कड़ा रुख
हालांकि Iran ने इस युद्धविराम को लेकर संदेह व्यक्त किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह केवल समय लेने की रणनीति हो सकती है।
ईरान ने साफ संकेत दिया है कि यदि उस पर दबाव बनाया गया, तो वह सैन्य तरीके से जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह संकट
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के लिए यह स्थिति कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
- ऊर्जा सुरक्षा: भारत की तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है
- प्रवासी भारतीय: खाड़ी देशों में लाखों भारतीय कार्यरत हैं
- रणनीतिक संतुलन: भारत के दोनों पक्षों से अच्छे संबंध
इन्हीं कारणों से भारत इस क्षेत्र में शांति स्थापना के प्रयासों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। Rajnath Singh के बयान और Narendra Modi की पहल यह दर्शाती है कि भारत आने वाले समय में वैश्विक शांति प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”








