मन की बात में पीएम मोदी बोले- बिहार का मखाना पहुंच रहा ग्रीस, त्योहारों पर स्वदेशी उत्पाद खरीदने की अपील

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं, मोटे अनाज की खेती, सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती, वैज्ञानिक नरिंदर सिंह कपानी और अंगदान जैसे विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रामायण आज भी समाज को सेवा, करुणा और समरसता का संदेश देती है। साथ ही उन्होंने युवाओं से देश के वैज्ञानिकों से प्रेरणा लेने और सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की।

महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक

प्रधानमंत्री ने कहा कि 26 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती है। हजारों साल बाद भी उनकी रामायण लोगों को जीवन की महत्वपूर्ण सीख देती है। भगवान राम के जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने सेवा, करुणा, मित्रता और सामाजिक समरसता का महत्व बताया।

पीएम मोदी ने अयोध्या के राम मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि वहां महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी के मंदिर भी बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या के एयरपोर्ट का नाम भी महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है।

मेघालय और नगालैंड में फिर बढ़ रही मोटे अनाज की खेती

प्रधानमंत्री ने मोटे अनाज यानी मिलेट्स की खेती को लेकर पूर्वोत्तर राज्यों में हो रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाए जाने से श्रीअन्न के महत्व को दुनिया भर में पहचान मिली।

मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले के खांडुली गांव का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां दो सहेलियों ने मिलेट्स से कुकीज, केक, मफिन और बच्चों के लिए खाद्य उत्पाद तैयार करने की पहल की। इससे इन उत्पादों की मांग बढ़ी और किसानों ने दोबारा मिलेट्स की खेती शुरू की।

उन्होंने पश्चिम गारो हिल्स के सादोलपाड़ा गांव के किसान चेकजिंग संगमा का भी जिक्र किया, जिन्होंने आधुनिक तरीकों से मोटे अनाज की खेती शुरू की। इससे उनकी आय बढ़ने के साथ गांव में भी जागरूकता आई।

पीएम मोदी ने नगालैंड के कोहिमा जिले के केजोमा गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां एक दशक से अधिक समय तक बंद रही मिलेट्स की खेती 2024 में दोबारा शुरू हुई। वर्ष 2025 में गांव में पहला मिलेट्स उत्सव भी मनाया गया।

रन फॉर यूनिटी में भाग लेने की अपील

प्रधानमंत्री ने कहा कि 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस अवसर पर देशभर में ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन किया जाता है।

उन्होंने लोगों से इस दौड़ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और परिवार, दोस्तों तथा आसपास के लोगों को भी इससे जोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन देश की एकता को मजबूत करने और राष्ट्र के प्रति संकल्प दोहराने का अवसर है।

‘फादर ऑफ फाइबर ऑप्टिक्स’ नरिंदर सिंह कपानी को किया याद

पीएम मोदी ने भारतीय वैज्ञानिक नरिंदर सिंह कपानी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें दुनिया ‘फादर ऑफ फाइबर ऑप्टिक्स’ के नाम से जानती है। उनका जन्म पंजाब के मोगा जिले में हुआ था।

प्रधानमंत्री ने बताया कि फाइबर ऑप्टिक्स के क्षेत्र में कपानी के शोध ने संचार तकनीक को नई दिशा दी। आज इंटरनेट और डिजिटल संचार की दुनिया में इस तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने युवाओं से कपानी जैसे वैज्ञानिकों के जीवन और योगदान के बारे में पढ़ने तथा उनसे प्रेरणा लेने का आग्रह किया।

अंगदान से दूसरों को मिल सकता है नया जीवन

प्रधानमंत्री ने अंगदान के महत्व पर भी बात की। उन्होंने मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी का उदाहरण देते हुए बताया कि सड़क दुर्घटना के बाद उनके परिवार ने अंगदान का फैसला लिया।

उन्होंने कहा कि अंगदान का निर्णय जरूरतमंद लोगों को नया जीवन देने के साथ चिकित्सा अनुसंधान में भी मदद कर सकता है। पीएम मोदी ने लोगों से अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की।

आईआईटी मद्रास में ब्रेन रिसर्च को मिलेगी नई दिशा

प्रधानमंत्री ने चेन्नई स्थित आईआईटी मद्रास में शुरू किए गए ‘सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस केंद्र में मानव मस्तिष्क की हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल 3डी तस्वीरें तैयार की जा रही हैं।

इस परियोजना का लक्ष्य 100 मानव मस्तिष्कों की 3डी मैपिंग करके उनका विस्तृत अध्ययन करना है। इस काम में परम शक्ति सुपरकंप्यूटर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

पीएम मोदी के मुताबिक, इस शोध से मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है। इससे अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों पर भविष्य में होने वाले शोध को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि 100 मानव मस्तिष्कों से जुड़ा डेटा विभिन्न क्षेत्रों के शोधकर्ताओं के लिए ओपन सोर्स के रूप में उपलब्ध कराने की योजना है।

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