केरलम: PSC चेयरमैन की कुर्सी पर संकट? पूर्व राज्यपाल ने राष्ट्रपति से की हटाने की सिफारिश

केरलम: केरलम के पूर्व राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने अपने कार्यकाल के दौरान केरल लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के चेयरमैन एमआर बैजू को पद से हटाने की सिफारिश की थी। यह कदम आयोग में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद उठाया गया। बताया जा रहा है कि अर्लेकर ने इस संबंध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र भी लिखा था।

राष्ट्रपति को पत्र लिखकर बताई वजह

लोकभवन के सूत्रों के मुताबिक, अर्लेकर ने अपने पत्र में आयोग के कामकाज और उस पर लगे अनियमितताओं के आरोपों का जिक्र किया। उन्होंने इन मामलों की जांच का हवाला देते हुए चेयरमैन को हटाने की सिफारिश की। अधिकारियों के अनुसार, राज्य के इतिहास में इस तरह की कार्रवाई पहले देखने को नहीं मिली है।

केरल लोक सेवा आयोग राज्य में सरकारी पदों पर भर्ती की प्रक्रिया संचालित करता है। ऐसे में आयोग के कामकाज पर उठे सवालों को अहम माना जा रहा है।

पीएससी परीक्षाओं में अनियमितताओं की जांच

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब राज्य योजना बोर्ड के प्रमुख पद के लिए आयोजित पीएससी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की क्राइम ब्रांच जांच कर रही है। बाद में जांच का दायरा बढ़ाकर आयोग की दूसरी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को भी शामिल किया गया।

सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल रहते हुए अर्लेकर को युवा मोर्चा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की ओर से शिकायतें मिली थीं। इसके बाद उन्होंने आयोग के आंतरिक सतर्कता विभाग से रिपोर्ट मांगी। बताया जाता है कि उन्होंने आरोपों से संबंधित पुलिस जांच रिपोर्ट का भी अध्ययन किया।

तबादले से पहले भेजा था पत्र

सूत्रों का कहना है कि तमिलनाडु में तबादले से करीब एक सप्ताह पहले अर्लेकर ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर अपनी सिफारिश के पीछे के कारण बताए थे। उन्होंने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में भी लाने की बात कही है।

23 अक्टूबर को तमिलनाडु स्थानांतरित होने के बाद अर्लेकर केरलम के राज्यपाल पद से मुक्त हो गए। राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है।

फिलहाल, इस मामले में आगे की कार्रवाई और आयोग के चेयरमैन के संबंध में लिए जाने वाले फैसले पर नजर बनी हुई है।

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