संसद विशेष सत्र: हरिवंश तीसरी बार निर्विरोध उपसभापति, महिला आरक्षण पर गरमाई सियासत

महिला आरक्षण अधिनियम 2023 लागू, संशोधन बिल पर आज वोटिंग; परिसीमन और 2029 लागू करने को लेकर पक्ष-विपक्ष आमने-सामने

संसद विशेष सत्र 2026 में हरिवंश नारायण सिंह तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुने गए। नरेंद्र मोदी ने दी बधाई। महिला आरक्षण बिल (Nari Shakti Vandan Act) पर लोकसभा में बहस और वोटिंग की तैयारी। जानें पूरा अपडेट, विश्लेषण और प्रभाव।

नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन राजनीतिक हलचल तेज रही। राज्यसभा में जेडीयू सांसद हरिवंश नारायण सिंह को लगातार तीसरी बार निर्विरोध उपसभापति चुना गया। वहीं लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक और परिसीमन को लेकर तीखी बहस देखने को मिली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश को बधाई देते हुए कहा कि यह लगातार तीसरी जीत उनके अनुभव, संतुलन और सदन को साथ लेकर चलने की क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में राज्यसभा की गरिमा और प्रभावशीलता और बढ़ेगी।

हरिवंश को सर्वसम्मति से मिला समर्थन

राज्यसभा में उपसभापति पद के लिए हरिवंश के नाम पर आम सहमति बनी। नामांकन की अंतिम तिथि तक सभी प्रस्ताव उनके पक्ष में आए, जिससे उनका निर्विरोध चुना जाना तय हो गया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी उन्हें बधाई देते हुए उनके अनुभव की सराहना की।

महिला आरक्षण कानून लागू, लेकिन लागू होने पर संशय

केंद्र सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ यानी महिला आरक्षण अधिनियम 2023 को 16 अप्रैल 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देता है।

हालांकि, सरकार के अनुसार यह आरक्षण तुरंत लागू नहीं होगा। इसे अगली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही लागू किया जा सकेगा, जिससे इसके 2029 या उसके बाद लागू होने की संभावना है।

लोकसभा में लंबी बहस, 18 घंटे तक चर्चा संभव

लोकसभा में संविधान संशोधन और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर लंबी बहस चल रही है। स्पीकर ओम बिरला ने जरूरत पड़ने पर चर्चा को 18 घंटे तक बढ़ाने का संकेत दिया है। आज शाम इन विधेयकों पर वोटिंग प्रस्तावित है।

सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी आज इस मुद्दे पर सदन में अपनी बात रखेंगे।

परिसीमन और समय को लेकर विपक्ष का विरोध

महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है, तो इसे तुरंत लागू करना चाहिए।

वहीं राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि यह कदम राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया है और इसका उद्देश्य भविष्य के चुनावों में बढ़त हासिल करना है।

सरकार का पक्ष: प्रक्रिया जरूरी

संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है और इसे गलत तरीके से पेश नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले कानून लागू करना और फिर संशोधन करना तकनीकी आवश्यकता है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

लोकसभा में भाजपा सांसद कंगना रनौत ने प्रधानमंत्री मोदी को “नारीवाद का ध्वजवाहक” बताते हुए महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया। वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि परिसीमन में किसी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा।

क्या है आगे का रास्ता?

सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, परिसीमन के बाद लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती हैं, ताकि महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। सीटों का आवंटन रोटेशन के आधार पर किया जाएगा।

संसद का यह विशेष सत्र न केवल महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक मुद्दे को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि परिसीमन और चुनावी गणित को लेकर नई राजनीतिक बहस भी खड़ी कर रहा है। अब सबकी नजरें आज होने वाली वोटिंग और आगे की रणनीति पर टिकी हैं।

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