अब बिना निशान के थायराइड ऑपरेशन: RMLIMS लखनऊ में पहली सफल ‘स्कारलेस’ सर्जरी

कांख और स्तन के जरिए एंडोस्कोपिक सर्जरी कर 19 वर्षीय युवती का इलाज; आधुनिक तकनीक से दर्द कम, रिकवरी तेज और कॉस्मेटिक फायदा

RMLIMS लखनऊ में पहली स्कारलेस थायराइड सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। 19 वर्षीय युवती पर एंडोस्कोपिक तकनीक से बिना गर्दन पर निशान के ऑपरेशन हुआ, जो आधुनिक और minimally invasive सर्जरी का बड़ा उदाहरण है।

हाइलाइट्स :

  • RMLIMS लखनऊ में पहली स्कारलेस थायराइड सर्जरी
  • 19 वर्षीय युवती पर सफल एंडोस्कोपिक ऑपरेशन
  • कांख और स्तन के जरिए किया गया ऑपरेशन
  • गर्दन पर कोई निशान नहीं, बेहतर कॉस्मेटिक परिणाम
  • मरीज को कम दर्द और तेजी से रिकवरी

लखनऊ । राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी पहली “स्कारलेस” (दागरहित) थायराइड सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की है। एंडोक्राइन सर्जरी विभाग द्वारा की गई यह एंडोस्कोपिक थायराइडेक्टोमी आधुनिक और न्यूनतम आक्रामक तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है।

यह सर्जरी अयोध्या की 19 वर्षीय युवती पर की गई, जिसकी गर्दन के दाहिने हिस्से में बिनाइन थायराइड नोड्यूल था। सर्जरी के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और उसे बहुत कम दर्द के साथ तेजी से रिकवरी मिली।

बिना निशान के सर्जरी: मरीजों के लिए बड़ी राहत

परंपरागत थायराइड सर्जरी में गर्दन पर चीरा लगाया जाता है, जिससे स्थायी निशान रह जाता है। खासकर युवा महिलाओं के लिए यह कॉस्मेटिक और मानसिक चिंता का कारण बनता है।

नई “स्कारलेस” तकनीक में सर्जन कांख और स्तन में छोटे-छोटे चीरे लगाकर हाई-डेफिनिशन लैप्रोस्कोपिक उपकरणों की मदद से थायराइड ग्रंथि को निकालते हैं। इससे गर्दन पर कोई भी दिखाई देने वाला निशान नहीं रहता और मरीज का आत्मविश्वास बना रहता है।

सर्जरी की खास बातें

  • मरीज: अयोध्या की 19 वर्षीय युवती, जिसे बिनाइन थायराइड नोड्यूल था
  • तकनीक: कांख और स्तन में तीन छोटे चीरे लगाकर एंडोस्कोपिक सर्जरी
  • रिकवरी: सर्जरी के कुछ घंटों में सामान्य आहार और गतिविधियां शुरू
  • निशान: गर्दन पर कोई भी दृश्य निशान नहीं
  • सुरक्षा: ‘रिकरेंट लैरिंजियल नर्व’ और ‘पैराथायराइड ग्रंथियों’ की बेहतर सुरक्षा

विशेषज्ञों की टीम ने किया सफल ऑपरेशन

इस जटिल सर्जरी को प्रो. एस.के. मिश्रा के नेतृत्व में एंडोक्राइन सर्जरी विभाग की टीम ने अंजाम दिया। टीम में डॉ. मिथुन राम, डॉ. अश्विनी रहालकर और डॉ. सारा इदरीस शामिल रहे।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन सही प्रशिक्षण और अनुभव के साथ यह सुरक्षित और प्रभावी विकल्प साबित हो रही है—खासतौर पर उन मरीजों के लिए जो गर्दन पर स्थायी निशान से बचना चाहते हैं।

आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की ओर बड़ा कदम

RMLIMS की यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश में उन्नत और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। संस्थान का लक्ष्य है कि प्रदेश के लोगों को विश्वस्तरीय, सस्ती और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

यह “स्कारलेस” सर्जरी न केवल मेडिकल तकनीक की प्रगति को दर्शाती है, बल्कि मरीजों के जीवन की गुणवत्ता और आत्मविश्वास को भी बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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