“लखनऊ स्थित Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences (SGPGI) के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशियलिटी विभाग ने दो बच्चों में पाए गए दुर्लभ कैंसर का सफल इलाज किया। अयोध्या और प्रयागराज के इन बच्चों की 6 से 8 घंटे लंबी जटिल सर्जरी कर उन्हें नया जीवन दिया गया। यह सफलता लिवर कैंसर और पैंक्रियाज ट्यूमर के इलाज में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।“
लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशियलिटी विभाग ने दो बच्चों में पाए गए अत्यंत दुर्लभ और जटिल कैंसर का सफल इलाज कर चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। दोनों मामलों में की गई जटिल सर्जरी सफल रही और अब दोनों बच्चे स्वस्थ होकर नियमित फॉलो-अप में सामान्य जीवन की ओर अग्रसर हैं।

पहला मामला अयोध्या निवासी 10 माह के शिशु का था, जिसके पेट में लगातार बढ़ती गांठ की शिकायत सामने आई थी। विस्तृत जांच में पता चला कि बच्चे को हेपेटोब्लास्टोमा नामक लिवर कैंसर है, जिसने लिवर के 70 प्रतिशत से अधिक हिस्से को प्रभावित कर दिया था। ट्यूमर शरीर की सबसे बड़ी रक्त वाहिका (आईवीसी) के बेहद करीब होने के कारण सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण मानी जा रही थी। पहले बच्चे को चार चक्र कीमोथेरेपी दी गई, जिसके बाद लगभग 6 घंटे लंबी जटिल सर्जरी कर ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटा दिया गया।

दूसरा मामला प्रयागराज के 11 वर्षीय बालक का था, जो पेट दर्द, बुखार, पीलिया और फीके रंग के मल की समस्या से पीड़ित था। जांच में अग्न्याशय (पैंक्रियास) के सिर में बड़ा ट्यूमर पाया गया, जो पित्त नली को दबाकर पीलिया और बार-बार संक्रमण का कारण बन रहा था। बायोप्सी रिपोर्ट में यह ट्यूमर SPEN (Solid Pseudopapillary Epithelial Neoplasm) पाया गया, जो बच्चों में अत्यंत दुर्लभ होता है और सामान्यतः किशोरियों में देखा जाता है। इसके बाद लगभग 8 घंटे तक चली व्हिपल सर्जरी (PPPD) के जरिए ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया।
दोनों सर्जरी का नेतृत्व विभागाध्यक्ष प्रो. बसंत कुमार ने किया। सर्जिकल टीम में डॉ. तरुण कुमार, डॉ. शुचि और डॉ. आनंद शामिल रहे। हेपेटोब्लास्टोमा केस में लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट के डॉ. राहुल और डॉ. यश का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। वहीं एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. शिल्पी और उनकी टीम ने पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षित एनेस्थीसिया प्रबंधन सुनिश्चित किया।

प्रो. बसंत कुमार ने बताया कि बच्चों में कैंसर के मामले अपेक्षाकृत कम होते हैं, लेकिन हाल के वर्षों में जटिल केसों की पहचान बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों में पेट में बिना दर्द की गांठ, लगातार पेट दर्द, पीलिया, बार-बार बुखार या वजन न बढ़ने जैसी समस्या हो तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे जटिल कैंसरों का उपचार केवल उन्हीं केंद्रों पर संभव है, जहां बाल शल्य चिकित्सा, ऑन्कोलॉजी, रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी, लिवर सर्जरी और गहन चिकित्सा जैसी सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हों।

प्रो. बसंत कुमार ने इन सफल ऑपरेशनों का श्रेय संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर. के. धीमन के मार्गदर्शन और टीम के समन्वित प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा कि एसजीपीजीआई में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के कारण बच्चों के जटिल कैंसरों का सफल इलाज संभव हो पा रहा है।

दोनों बच्चे अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और नियमित चिकित्सकीय निगरानी में हैं। यह सफलता एसजीपीजीआई की बाल कैंसर उपचार क्षमता और उन्नत चिकित्सा सेवाओं की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
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