“उत्तर प्रदेश में गंगा-यमुना समेत कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। प्रयागराज, वाराणसी, बलिया, गाजीपुर, मीरजापुर, फर्रुखाबाद और चित्रकूट समेत कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रहे नदी के जलस्तर ने बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। गंगा-यमुना समेत प्रदेश की कई प्रमुख नदियां तेजी से उफान पर हैं। प्रयागराज से लेकर बलिया तक नदी किनारे बसे इलाकों में हालात लगातार चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं। कई स्थानों पर पानी घाटों और निचले इलाकों तक पहुंच गया है, जबकि कुछ जिलों में गांवों के संपर्क मार्ग प्रभावित हुए हैं।
प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में करीब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है। बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने संगम क्षेत्र में नावों के परिचालन पर रोक लगा दी है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं।
प्रयागराज में संगम क्षेत्र में नावों के संचालन पर रोक
शुक्रवार शाम चार बजे फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 80.81 मीटर और छतनाग में 80.11 मीटर दर्ज किया गया। नैनी में यमुना का जलस्तर 80.51 मीटर पहुंच गया। गंगा और यमुना के लिए खतरे का निशान 84.73 मीटर है।
संगम क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने से निचले हिस्सों में दबाव बढ़ रहा है। बंधवा स्थित बड़े हनुमानजी मंदिर को लेकर भी श्रद्धालुओं में विशेष चिंता है। जलस्तर 81 मीटर तक पहुंचने पर मंदिर में महास्नान की मान्यता है। मौजूदा रफ्तार बनी रही तो सोमवार तक मंदिर परिसर में बाढ़ का पानी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
वाराणसी में घाटों तक पहुंचा गंगा का पानी
वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नदी करीब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है। शुक्रवार शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 68.90 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 71.262 मीटर से 2.34 मीटर नीचे है।
बढ़ते जलस्तर का असर वाराणसी के घाटों पर साफ दिखाई देने लगा है। राजेंद्र प्रसाद घाट की फर्श तक पानी पहुंच गया है। दशाश्वमेध स्थित जल पुलिस कार्यालय भी पानी की चपेट में आ गया है। मणिकर्णिका घाट पर छत से और हरिश्चंद्र घाट की गलियों में शवदाह कराया जा रहा है। गंगा आरती के आयोजन में भी बदलाव करना पड़ा है और दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती छत पर कराई जा रही है।
ड्रोन से निगरानी, प्रशासन अलर्ट
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए वाराणसी में पुलिस कमिश्नरेट और एनडीआरएफ की टीमें ड्रोन के माध्यम से नदी और आसपास के इलाकों की निगरानी कर रही हैं। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव अभियान तेज किया जा सके।
बलिया में खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा
बलिया में बाढ़ की स्थिति अधिक गंभीर होती जा रही है। गायघाट गेज पर गंगा का जलस्तर 58.41 मीटर दर्ज किया गया, जबकि यहां खतरे का निशान 57.61 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से करीब 80 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
गंगा का पानी कई बस्तियों में पहुंच गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार राहत कार्य किए जा रहे हैं।
गाजीपुर और मीरजापुर में भी तेजी से बढ़ रहा पानी
गाजीपुर में गंगा का जलस्तर 61.890 मीटर पहुंच गया है। यह चेतावनी बिंदु से महज 21 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ की आशंका बनी हुई है।
मीरजापुर में गंगा का जलस्तर तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। 12 घंटे में नदी का जलस्तर 32 सेंटीमीटर बढ़कर 74.140 मीटर पहुंच गया। प्रशासन की ओर से नदी के आसपास के इलाकों की निगरानी की जा रही है।
फर्रुखाबाद में 63 गांव प्रभावित
फर्रुखाबाद में भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। यहां नदी 136.95 मीटर पर बह रही है, जो खतरे के निशान से महज 15 सेंटीमीटर नीचे है। बाढ़ के कारण 63 गांवों की 50 हजार से अधिक आबादी प्रभावित बताई जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्गों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ है। बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन की टीमें सक्रिय हैं।
चित्रकूट में मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी भी खतरे के निशान से करीब 20 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के इलाकों में चिंता बढ़ गई है। वहीं उन्नाव में गंगा चेतावनी बिंदु से 29 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है।
लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण नदी किनारे के गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
बांदा में बिजली गिरने से पशुपालक की मौत
बांदा में बारिश के दौरान बिजली गिरने से 40 वर्षीय पशुपालक सतीश की मौत हो गई। क्षेत्र में 32 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच ग्रामीण इलाकों में मौसम संबंधी घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
बिजनौर में तटबंध को लेकर बढ़ी चिंता
बिजनौर में गंगा की तेज धारा रावली-बैराज तटबंध से टकरा रही है। करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से एसीबीएम तकनीक से तैयार किए गए तटबंध के लगभग 100 मीटर हिस्से के बैठने से खतरा बढ़ गया है।
स्थिति को देखते हुए सिंचाई विभाग ने बचाव कार्य शुरू कर दिया है। रेत की बोरियों और सीमेंट के पिंजरों की मदद से तटबंध को सुरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। विभागीय टीमें लगातार मौके पर निगरानी कर रही हैं।
अमरोहा और संभल में भी बढ़ा जलस्तर
अमरोहा में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 90 सेंटीमीटर नीचे है, जबकि संभल में यह खतरे के निशान से 55 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ने के कारण कई गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भर गया है।
कई जिलों में प्रशासन की बढ़ी सक्रियता
गंगा-यमुना समेत प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। नदी किनारे बसे गांवों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। राहत और बचाव दलों को भी सक्रिय रखा गया है।
फिलहाल प्रयागराज, वाराणसी, बलिया, गाजीपुर, मीरजापुर, फर्रुखाबाद, चित्रकूट, उन्नाव और बिजनौर समेत कई जिलों में नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। जलस्तर बढ़ने की रफ्तार जारी रहने पर आने वाले दिनों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।









