“Yogi Adityanath ने ऊर्जा संकट के बीच यूपी में 7 बड़े फैसले लिए हैं। मंत्रियों और अफसरों का काफिला 50% घटेगा, सरकारी बैठकें ऑनलाइन होंगी और कंपनियों को 2 दिन वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी जाएगी। जानें पूरी खबर।“
हाइलाइट्स :
- यूपी में मंत्रियों और अफसरों का काफिला 50% घटेगा
- सप्ताह में एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करेंगे मंत्री-विधायक
- सरकारी बैठकें, सेमिनार और वर्कशॉप होंगी ऑनलाइन
- सचिवालय की 50% बैठकें वर्चुअल मोड में होंगी
- बड़ी कंपनियों को 2 दिन वर्क फ्रॉम होम की एडवाइजरी
- रात 10 बजे बाद सजावटी लाइटों के सीमित इस्तेमाल के निर्देश
- पीएम सूर्य घर योजना और EV को बढ़ावा देने पर जोर
- पीएम मोदी की अपील के बाद योगी सरकार का बड़ा फैसला
लखनऊ। वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ती आर्थिक चुनौतियों के बीच योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री आवास पर मंगलवार शाम हुई उच्चस्तरीय बैठक में सरकारी खर्च, ईंधन खपत और संसाधनों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में सभी प्रमुख विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रधान सचिव मौजूद रहे।
सरकार ने तय किया है कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों के काफिले में शामिल वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत तक घटाई जाएगी। साथ ही सप्ताह में एक दिन मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को सार्वजनिक परिवहन, बस या मेट्रो का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सरकारी बैठकों, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप को अधिकतम वर्चुअल मोड में आयोजित किया जाए। राज्य सचिवालय की 50 प्रतिशत बैठकों को भी ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और संस्थानों में बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां सप्ताह में दो दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करने के लिए एडवाइजरी जारी की जाए। सरकार का मानना है कि इससे ईंधन की खपत और ट्रैफिक दबाव दोनों में कमी आएगी।
सरकार ने रात 10 बजे के बाद सजावटी लाइटों के सीमित उपयोग पर भी जोर दिया है। इसके अलावा पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है, ताकि ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग बढ़ सके।
मुख्यमंत्री की जनता से 10 बड़ी अपीलें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से ऊर्जा बचत और आत्मनिर्भरता को लेकर कई अपीलें भी कीं। उन्होंने कहा कि सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाया जाए और लोग मेट्रो, बस, पीएनजी, कार पूलिंग, साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करें।
सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में भी बस एवं सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही है। कार्यालयों में अलग-अलग बैच में समय निर्धारण की सलाह दी गई है, ताकि ट्रैफिक और ईंधन की खपत कम हो सके।
मुख्यमंत्री ने अगले छह महीने तक गैर-जरूरी विदेश यात्राएं टालने, देश में ही डेस्टिनेशन वेडिंग को बढ़ावा देने और ओडीओपी व जीआई टैग वाले स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने खाद्य तेल के सीमित उपयोग और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
पीएम मोदी की अपील के बाद तेज हुई कवायद
दरअसल, नरेंद्र मोदी ने 10 और 11 मई को सार्वजनिक कार्यक्रमों में पेट्रोल-डीजल, गैस और अन्य संसाधनों के संयमित उपयोग की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने लोगों से कारपूलिंग अपनाने, मेट्रो का उपयोग बढ़ाने, विदेश यात्राएं सीमित करने और एक वर्ष तक सोना न खरीदने की भी सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि वैश्विक हालात और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री की अपील के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे प्रशासनिक स्तर पर लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य राज्यों में भी इसी तरह के कदम देखने को मिल सकते हैं।
विपक्ष ने उठाए सवाल
सरकार के फैसलों और प्रधानमंत्री की अपील को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि सरकार जनता पर बोझ डाल रही है और यह आर्थिक नीतियों की विफलता का संकेत है। वहीं अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार अर्थव्यवस्था और विदेश नीति दोनों को संभालने में विफल रही है।
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