
“US-Iran War LIVE: ईरान ने अमेरिकी हमलों में 18 लोगों की मौत और 108 के घायल होने का दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर फिर हमला कर सकता है। हॉर्मुज संकट से तेल और वैश्विक बाजारों पर दबाव बढ़ा।“
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना की ओर से ईरान पर किए गए ताजा हमलों में 18 लोगों की मौत और 108 लोगों के घायल होने का दावा ईरान के स्वास्थ्य मंत्री मोहम्मद-रेजा जफरघांदी ने किया है। ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि अमेरिकी हमलों में नागरिक ठिकानों और बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।
वहीं, अमेरिका का कहना है कि उसकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बनाए जा रहे सैन्य उपकरणों को निशाना बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सेना जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ कभी भी एक और हमला कर सकती है।
ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों पर भी किए हमले
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाया। ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई के अलावा कुवैत और बहरीन में भी हमले किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इन हमलों में तत्काल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई।
ईरान के नए सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल प्रमुख मोहसेन रेजाई ने कहा कि युद्ध के मैदान, कूटनीति और आर्थिक मोर्चे पर ईरान की नई रणनीति अमेरिकी दबाव को चुनौती देगी।
शादी समारोह को निशाना बनाए जाने का दावा
ईरानी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि मंगलवार रात हुए अमेरिकी हमले में दक्षिणी ईरान में एक शादी समारोह भी प्रभावित हुआ, जिसमें लोगों के मारे जाने की बात कही गई है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार ताजा हमलों में 18 लोगों की मौत हुई है, जबकि 108 लोग घायल हुए हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि वह शादी समारोह पर हमले से संबंधित रिपोर्टों की जांच कर रहा है। अमेरिकी सेना का कहना है कि वह नागरिकों को कभी निशाना नहीं बनाती।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी कथित नागरिक हताहतों पर गंभीर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सैन्य कार्रवाई तत्काल रोकने की अपील की है।
ट्रंप ने कहा- कभी भी कर सकते हैं अगला हमला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान की ओर से तैयार किए जा रहे रडार, मिसाइल और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता से जुड़े उपकरणों को नष्ट कर दिया है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना के पास जलडमरूमध्य पर मजबूत नियंत्रण है और जरूरत पड़ने पर अमेरिका ईरान पर फिर हमला कर सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान के साथ युद्ध बहुत ज्यादा लंबा नहीं चलेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह दावा भी किया कि अमेरिकी सेना हॉर्मुज क्षेत्र में बारूदी सुरंगों को हटाने और तेल ले जाने वाले जहाजों के संचालन को जारी रखने में जुटी है।
हॉर्मुज का नाम अपने नाम पर रखने से ट्रंप का इनकार
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को अपने नाम पर रखने की चर्चाओं के बीच ट्रंप ने इससे इनकार किया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह रणनीतिक जलमार्ग का नाम बदलकर अपने नाम पर रखने की योजना बना रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है और यह बात केवल चर्चा के तौर पर सामने आई थी।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।
सऊदी अरब का ईरान पर तेल टैंकर पर हमले का आरोप
सऊदी अरब ने ईरान पर उसके तेल टैंकर ‘सिद्र’ को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय निशाना बनाने का आरोप लगाया है। सऊदी विदेश मंत्रालय के अनुसार इस हमले में टैंकर के चालक दल के कुछ सदस्यों की मौत हुई।
रियाद ने ईरान की ओर से जॉर्डन, बहरीन और कुवैत को निशाना बनाए जाने की भी निंदा की है। सऊदी अरब ने इन देशों के साथ एकजुटता जताते हुए उनकी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए उठाए जाने वाले कदमों का समर्थन किया है।
हॉर्मुज में 56 जहाज ईरान की ब्लैकलिस्ट में
ईरान के पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले 11 और जहाजों को कथित ‘नॉन-कंप्लायंस’ के आधार पर ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इसके साथ ही ब्लैकलिस्ट किए गए जहाजों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है।
ईरानी प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि ब्लैकलिस्ट किए गए जहाजों के साथ सहयोग करने वाले अन्य जहाजों को भी सूची में शामिल किया जा सकता है। इससे पहले से तनावग्रस्त समुद्री मार्ग में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
अमेरिका ने ईरान को दी प्रतिबंधों की चेतावनी
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि ईरान पर अमेरिकी दबाव तब तक जारी रहेगा, जब तक वह परमाणु हथियारों की महत्वाकांक्षा छोड़ने और मध्य पूर्व में सशस्त्र समूहों को समर्थन देने से पीछे नहीं हटता।
रूबियो ने उन देशों को भी चेतावनी दी जो अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में ईरान की मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे देशों पर भी अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
भारत और ईरान के बीच संभावित व्यापार समझौते से जुड़े सवाल पर रूबियो ने कहा कि उन्हें भारत और ईरान के बीच किसी व्यापार समझौते की जानकारी नहीं है। उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
भारत पर भी पड़ सकता है युद्ध का असर
अमेरिका-ईरान युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की बात कही गई है, जो युद्ध शुरू होने के मुकाबले 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी दबाव बढ़ सकता है। महंगा कच्चा तेल परिवहन लागत, महंगाई और आयात बिल पर असर डाल सकता है।
अमेरिकी शेयर बाजार में भी गिरावट
ईरान युद्ध के फिर तेज होने और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से अमेरिकी शेयर बाजार पर भी दबाव देखने को मिला। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। एसएंडपी 500 में 0.33 प्रतिशत और नैस्डैक कंपोजिट में 0.12 प्रतिशत की गिरावट रही।
निवेशकों को युद्ध के चलते तेल की कीमतों और महंगाई के और बढ़ने की चिंता है। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक बाजारों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
यूएई के राष्ट्रपति से ट्रंप की फोन पर बातचीत
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व की ताजा स्थिति और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर चर्चा की।
यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार बातचीत में दोनों देशों के बीच सहयोग और साझा हितों के समर्थन में संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
छह महीने से जारी है युद्ध
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष करीब छह महीने से जारी है। इस दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव के साथ-साथ आर्थिक प्रतिबंध और समुद्री नाकेबंदी जैसे कदम भी देखने को मिले हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से दुनिया के लिए चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि वैश्विक तेल व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। यदि यहां लंबे समय तक तनाव बना रहा तो इसका असर तेल आपूर्ति, कीमतों, महंगाई और वैश्विक व्यापार पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।
संघर्ष के बीच संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की अपील की है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल तनाव कम होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं।
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