
मेडिकल की स्नातकोत्तर (PG) सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हो सकता है। नीट पीजी प्रवेश व्यवस्था की समीक्षा के लिए बनाई गई 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने मौजूदा पर्सेंटाइल आधारित पात्रता प्रणाली को खत्म कर रैंक आधारित मेरिट व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने नीट पीजी और सुपर स्पेशियलिटी प्रवेश परीक्षा (NEET SS) दोनों में इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। जल्द ही इस संबंध में मसौदा नियम जारी किए जा सकते हैं। इसके बाद संबंधित पक्षों से सुझाव और राय मांगी जाएगी।
समिति का मानना है कि दाखिले की व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ मेडिकल शिक्षा के न्यूनतम मानकों को बनाए रखना भी जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों मांगी थी समीक्षा?
यह पूरा मामला नीट पीजी 2025 की पात्रता के लिए निर्धारित कटऑफ पर्सेंटाइल में भारी कमी किए जाने के बाद सामने आया था। खाली पीजी मेडिकल सीटों को भरने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्वालिफाइंग स्कोर में बड़ी कटौती की थी।
संशोधित व्यवस्था के तहत सामान्य वर्ग का क्वालिफाइंग स्कोर 276 से घटाकर 103 कर दिया गया था। वहीं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए यह स्कोर 235 से घटाकर माइनस 40 कर दिया गया था।
इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए थे। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने पात्रता पर्सेंटाइल में इतनी बड़ी कटौती पर चिंता जताई थी।
अदालत ने कहा था कि इस तरह की कटौती से मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया था कि भले ही यह सरकार का नीतिगत फैसला हो, लेकिन इसकी न्यायिक समीक्षा की जाएगी।
केंद्र सरकार को दिया गया था ऑडिट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मौजूदा नीट दाखिला व्यवस्था का व्यापक ऑडिट करने, उसकी कमियों की पहचान करने और व्यावहारिक समाधान सुझाने का निर्देश दिया था।
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट इसी निर्देश के तहत तैयार की गई है। अब रैंक आधारित मेरिट व्यवस्था के प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नीट पीजी और नीट एसएस के दाखिले के नियमों में बदलाव हो सकता है। हालांकि, नए नियमों को लागू करने से पहले मसौदा जारी कर संबंधित पक्षों की राय ली जाएगी।








