“महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम। शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने की खबरों के बीच आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों पर हमला बोलते हुए कहा कि उनकी वफादारी और साख बिकाऊ है। जानिए पूरा राजनीतिक घटनाक्रम, उद्धव ठाकरे गुट की प्रतिक्रिया और महाराष्ट्र की राजनीति पर इसका असर।“
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसदों के संभावित रूप से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की खबरों के बीच पार्टी नेता आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने राजनीतिक लाभ और व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए अपनी वफादारी तथा राजनीतिक साख को बेच दिया है।
राज्य की राजनीति में चल रहे कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बीच सामने आए इस घटनाक्रम ने उद्धव ठाकरे गुट की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लोकसभा चुनाव के बाद यह पार्टी के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर साधा निशाना
आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जो सांसद पाला बदल रहे हैं, उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनकी निष्ठा और विश्वसनीयता बिकाऊ है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेता जनता के जनादेश और अपने राजनीतिक सिद्धांतों के साथ समझौता कर रहे हैं।
उन्होंने लिखा कि मौजूदा सत्ता पक्ष राजनीतिक लाभ के लिए सरकारी संसाधनों और सार्वजनिक धन का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है।
INDIA गठबंधन और जनता से विश्वासघात का आरोप
आदित्य ठाकरे ने कहा कि लोकसभा चुनाव में इन सांसदों की जीत केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता की वजह से नहीं हुई थी, बल्कि उन्हें महाविकास अघाड़ी (MVA) और INDIA गठबंधन का व्यापक समर्थन मिला था।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान इन सांसदों ने कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और शिवसेना (UBT) के नेताओं से अपने क्षेत्रों में प्रचार करने का अनुरोध किया था। जनता ने भी एनडीए के खिलाफ और विपक्षी गठबंधन की विचारधारा के समर्थन में मतदान किया था।
ऐसे में चुनाव जीतने के बाद राजनीतिक लाभ के लिए पाला बदलना मतदाताओं के भरोसे के साथ धोखा है।
पार्टी बैठक से गायब रहे छह सांसद
हाल ही में उद्धव ठाकरे गुट ने दिल्ली में अपने सभी सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। पार्टी की ओर से व्हिप भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद छह सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए।
बैठक में केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे उपस्थित रहे। इन नेताओं ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में विश्वास जताते हुए पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
इसी के बाद से बगावत की अटकलें तेज हो गई थीं।
क्यों नाराज हैं बागी सांसद?
दूसरी ओर, बागी सांसदों का दावा है कि वे पार्टी की बदलती राजनीतिक दिशा और कांग्रेस के साथ बढ़ती नजदीकियों से असहज हैं। उनका कहना है कि शिवसेना (UBT) अपनी मूल हिंदुत्ववादी विचारधारा से दूर हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, सांसदों का एक बड़ा समूह एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को ही बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा का वास्तविक उत्तराधिकारी मानता है।
महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि छह सांसद औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो यह उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक और संगठनात्मक झटका साबित हो सकता है। वहीं शिंदे गुट को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी और आगामी स्थानीय निकाय तथा विधानसभा चुनावों में इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है।
महाराष्ट्र में पहले ही शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विभाजन के बाद राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं। ऐसे में यह नया घटनाक्रम राज्य की राजनीति को एक बार फिर नई दिशा दे सकता है।
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