महंगाई-बेरोजगारी से ध्यान भटकाने के लिए भाजपा निकाल रही पदयात्रा: अखिलेश यादव, चुनाव आयोग पर भी साधा निशाना

लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा की पदयात्रा पर निशाना साधते हुए महंगाई, बेरोजगारी और ट्रैफिक जाम का मुद्दा उठाया। चुनाव आयोग से आधार को मतदाता सूची से जोड़ने की मांग भी की।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा की पदयात्रा को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि वह महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अन्य जनसमस्याओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए पदयात्रा निकाल रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास जनता के सवालों का कोई जवाब नहीं है, इसलिए वह सड़कों पर उतरकर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है।

गुरुवार को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी मुख्यालय में आयोजित बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा पदयात्रा के नाम पर सत्ता के संरक्षण में पूरे प्रदेश में अराजकता फैला रही है। इससे व्यापारी, छात्र और आम नागरिक परेशान हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार के पास अपनी उपलब्धियां बताने के लिए कुछ नहीं है। इसी वजह से जनता के बीच ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनसे आम लोगों को असुविधा हो रही है।

लखनऊ और कानपुर में ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भाजपा पर निशाना

अखिलेश यादव ने भाजपा की पदयात्रा को लेकर लखनऊ और कानपुर की यातायात व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि लखनऊ में भाजपा की पदयात्रा के कारण ट्रैफिक अराजकता की स्थिति पैदा हुई और लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।

सपा प्रमुख ने कहा कि त्योहारों के मौसम में कानपुर जैसे पहले से ही जाम की समस्या से जूझ रहे शहर में पदयात्रा निकालकर लोगों की मुश्किलें बढ़ाई गईं। उनके मुताबिक, व्यापारियों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को ऐसी गतिविधियों के कारण अतिरिक्त परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।

उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार को महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, अन्याय और अत्याचार जैसे मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। जनता को इन समस्याओं से राहत दिलाने के बजाय राजनीतिक आयोजनों के जरिए उसका ध्यान दूसरी तरफ मोड़ने की कोशिश की जा रही है।

मतदाता सूची में आधार जोड़ने की अखिलेश यादव ने उठाई मांग

बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि आधार कार्ड को बायोमेट्रिक व्यवस्था के माध्यम से मतदाता सूची से जोड़ा जाना चाहिए।

उन्होंने आधार कार्ड को मेटल का बनाए जाने का सुझाव भी दिया, ताकि उसकी नकल तैयार करना मुश्किल हो सके। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद अब फॉर्म-6 के माध्यम से भाजपा समर्थक मतदाताओं की संख्या बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं से मतदाता सूची पर नजर रखने और सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि मतदाता सूची में फर्जी नाम शामिल न होने पाएं।

हालांकि, मतदाता सूची में गड़बड़ी और फर्जी वोट बनवाने से जुड़े उनके आरोप राजनीतिक आरोप हैं। इनकी पुष्टि के लिए संबंधित मामलों में निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड और साक्ष्यों की जांच जरूरी होगी।

बांके बिहारी मंदिर के गोस्वामी समाज से मिले अखिलेश

सियासी मुद्दों के बीच वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर के गोस्वामी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने भी सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस दौरान ब्रज क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

अखिलेश यादव ने कहा कि ब्रज क्षेत्र को हेरिटेज के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने मंदिरों को सरकारीकरण से मुक्त रखने की बात भी कही। उनके इस बयान को मथुरा-वृंदावन के धार्मिक स्थलों और स्थानीय परंपराओं से जुड़े राजनीतिक विमर्श के रूप में देखा जा रहा है।

धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रमों को लेकर आयोजकों को चेतावनी

अखिलेश यादव ने कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बिना नाम लिए कथावाचक के कार्यक्रम आयोजित कराने वालों को चेतावनी दी कि ऐसे लोगों को बुलाकर राजनीतिक या सामाजिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करने वालों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखे संदेश में आयोजकों को ऐसे कार्यक्रमों से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी कथावाचक के बजाय सच्चे विचारक और वाचक को आमंत्रित किया जाना चाहिए।

अखिलेश ने अपने बयान में ऐसे आयोजनों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक नुकसान से जोड़ते हुए आयोजकों को आगाह किया। उनके इस बयान को लेकर धार्मिक कथाओं और राजनीतिक बयानबाजी के बीच एक बार फिर बहस तेज होने की संभावना है।

यूपी की राजनीति में भाजपा और सपा के बीच बढ़ेगी बयानबाजी?

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लगातार तेज हो रहे हैं। भाजपा की पदयात्रा को लेकर अखिलेश यादव का ताजा बयान इसी सियासी टकराव का हिस्सा है।

एक ओर भाजपा अपने जनसंपर्क कार्यक्रमों के जरिए जनता तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, वहीं सपा प्रमुख महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और मतदाता सूची जैसे मुद्दों पर सरकार को घेर रहे हैं।

आने वाले समय में मतदाता सूची के पुनरीक्षण, चुनावी तैयारियों और जनसंपर्क अभियानों को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। खासकर 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए इन मुद्दों का सियासी महत्व बढ़ गया है।

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