चमोली टनल हादसा: नौ मजदूरों की मौत, छह अब भी लापता; पानी और गाद से रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी चुनौती

चमोली टनल हादसे में नौ मजदूरों की मौत हो गई, जबकि छह श्रमिक अब भी लापता हैं। विष्णुगाड़-पीपलकोटी परियोजना की सुरंग में पानी और भारी गाद भरने से रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित हुआ।

गोपेश्वर, चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर बन रही विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में गुरुवार शाम हुए भीषण हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। सुरंग में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा आने से कई श्रमिक इसकी चपेट में आ गए। हादसे में अब तक नौ मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि छह श्रमिकों की तलाश के लिए शुक्रवार सुबह से बचाव अभियान दोबारा शुरू कर दिया गया है।

हादसे में घायल 10 श्रमिकों का जिला अस्पताल गोपेश्वर, जबकि एक-एक घायल का श्रीनगर और पीपलकोटी में उपचार चल रहा है। एक घायल को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है।

1.8 किलोमीटर अंदर हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार हादसा गुरुवार यानी 13 अगस्त की शाम करीब पौने सात बजे हुआ। उस समय सुरंग के अंदर 25 से अधिक श्रमिक काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि ज्यादातर श्रमिक बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।

टीएचडीसी-एनटीपीसी की ओर से बनाई जा रही 444 मेगावाट की विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। परियोजना की लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी सुरंग में करीब 1.8 किलोमीटर अंदर यह हादसा हुआ। उस समय सुरंग में ग्रेविटी प्वाइंट पर पैकिंग का काम चल रहा था।

अचानक धमाके के बाद सुरंग में भरने लगा पानी और मलबा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, काम के दौरान सुरंग के अंदर अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। इसके तुरंत बाद ऊपर से पानी के साथ बड़ी मात्रा में मलबा और गाद सुरंग में तेजी से आने लगी। कुछ ही देर में सुरंग के अंदर हालात बेहद खतरनाक हो गए।

मलबे और पानी के अचानक आने से वहां मौजूद श्रमिकों में अफरातफरी मच गई। श्रमिक अपनी जान बचाने के लिए सुरंग के बाहर की ओर भागने लगे। इस दौरान कई लोग पानी और मलबे की तेज धार में बह गए, जबकि कुछ मलबे में फंस गए।

प्रत्यक्षदर्शी ने बताया हादसे का खौफनाक मंजर

झारखंड के निस्तरा भिंगरा निवासी एक घायल श्रमिक ने जिला अस्पताल में उपचार के दौरान हादसे की भयावहता बताई। उसके मुताबिक, सुरंग के अंदर ग्रेविटी प्वाइंट पर पैकिंग का काम चल रहा था और वहां सेटरिंग की गई थी।

उन्होंने बताया कि अचानक तेज आवाज हुई और देखते ही देखते सुरंग के ऊपरी हिस्से से पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा नीचे आने लगा। श्रमिकों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। पानी और मलबे की चपेट में आकर वह भी सुरंग के बाहरी हिस्से की ओर बहने लगे। इस दौरान कई बार वह मलबे में धंसते-धंसते बचे।

दलदल और ऑक्सीजन की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती

हादसे के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य बचाव दलों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। हालांकि सुरंग के भीतर लगातार पानी, गाद और दलदल जैसी स्थिति बनने से राहत-बचाव कार्य में मुश्किलें आती रहीं।

एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडेंट आलोक जायरा ने बताया कि बचाव अभियान लगातार जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है। सुरंग के भीतर ऑक्सीजन की कमी और दलदल की स्थिति के कारण रात में अभियान को रोकना पड़ा था। शुक्रवार सुबह हालात का आकलन करने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन फिर शुरू किया गया।

छह श्रमिकों की तलाश जारी

प्रशासन और बचाव एजेंसियों की प्राथमिकता अब सुरंग के अंदर फंसे छह लापता श्रमिकों तक पहुंचना है। इसके लिए सुरंग से पानी और मलबा हटाने के साथ सुरक्षित रास्ता बनाने का प्रयास किया जा रहा है। लगातार पानी और गाद आने की वजह से बचाव दलों के सामने चुनौती बनी हुई है।

रेस्क्यू अभियान के दौरान सुरंग के भीतर ऑक्सीजन का स्तर, मलबे की स्थिति और दोबारा पानी आने की आशंका पर भी नजर रखी जा रही है। बचाव दल बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

444 मेगावाट की परियोजना पर भी पड़ा असर

विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना अलकनंदा नदी पर विकसित की जा रही 444 मेगावाट क्षमता की महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजना है। परियोजना का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा होने की बात सामने आई है। इसी परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में यह हादसा हुआ है।

फिलहाल प्रशासन और बचाव एजेंसियों का पूरा ध्यान सुरंग में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने और मृतकों के शवों को बरामद करने पर है। हादसे के बाद परियोजना स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।

हादसे ने खड़े किए सुरक्षा पर सवाल

निर्माणाधीन सुरंग में अचानक पानी और मलबा आने की घटना ने भूमिगत परियोजनाओं में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरंग के भीतर काम कर रहे श्रमिकों के लिए आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी, ऑक्सीजन की उपलब्धता और पानी व मलबे से बचाव के इंतजाम कितने प्रभावी थे, इसकी भी जांच जरूरी मानी जा रही है।

फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सुरंग में फंसे छह श्रमिकों तक पहुंचना है। बचाव दल लगातार अभियान में जुटे हैं और हर संभव तरीके से सुरंग के अंदर पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

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