लखनऊ अग्निकांड: AC ब्लास्ट, धुएं और चीखों के बीच बुझ गए 15 सपने, सामने आईं दिल दहला देने वाली कहानियां

किसी ने तार पकड़कर बचाई जान, कोई बाथरूम में छिपा रहा; 15 परिवारों के सपनों को निगल गई आग

लखनऊ के अलीगंज स्थित एनीमेशन सेंटर और कोचिंग बिल्डिंग में लगी भीषण आग में 15 छात्रों की मौत हो गई। ‘पापा मैं आग में फंस गया हूं’ जैसी आखिरी कॉल, तार पकड़कर जान बचाने की कोशिश और दोस्तों के बिछड़ने की दर्दनाक कहानियां सामने आई हैं। पढ़ें लखनऊ अग्निकांड की पूरी रिपोर्ट।

लखनऊ। अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित बहुमंजिला इमारत में सोमवार दोपहर लगी भीषण आग ने सिर्फ 15 लोगों की जान नहीं ली, बल्कि दर्जनों परिवारों के सपने, उम्मीदें और भविष्य भी छीन लिया। एनीमेशन सीखकर करियर बनाने आए युवाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का सपना देख रहे माता-पिता के लिए यह हादसा जिंदगी का सबसे बड़ा दुःस्वप्न बन गया।

आग की लपटों और धुएं के बीच फंसे छात्रों की चीखें, मोबाइल फोन पर परिजनों को किए गए आखिरी कॉल और जान बचाने की बेताब कोशिशों की कहानियां हर किसी की आंखें नम कर रही हैं।

“पापा… आज शायद मैं नहीं बच पाऊंगा”

ऐशबाग स्थित एलडीए कॉलोनी निवासी 26 वर्षीय जयंत गुप्ता एनीमेशन का कोर्स कर रहे थे। हादसे के समय जब आग तेजी से फैल रही थी, तब उन्होंने अपने पिता प्रदीप कुमार को फोन किया।

फोन पर जयंत की कांपती आवाज थी—”पापा… मैं भीषण आग में फंस गया हूं… शायद आज नहीं बच पाऊंगा।”

इतना सुनते ही पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। जयंत ने जान बचाने के लिए पहली मंजिल से छलांग लगा दी। नीचे लगी लोहे की सरिया उनकी कमर में घुस गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। भारी रक्तस्राव के बावजूद डॉक्टरों की कोशिशों से उनकी जान बच गई। ट्रॉमा सेंटर में भर्ती जयंत अब खतरे से बाहर हैं, लेकिन उस फोन कॉल की याद आज भी उनके परिवार को सिहरन से भर देती है।

“मैं बच गया, लेकिन मेरा दोस्त हमेशा के लिए चला गया”

उत्तराखंड निवासी पंकज की आंखों में आंसू थे और गला बार-बार भर जा रहा था।

उन्होंने बताया कि वह अपने दोस्त भविष्य के साथ एनीमेशन की दुनिया में पहचान बनाने का सपना लेकर लखनऊ आए थे। दोनों घंटों साथ बैठकर भविष्य की योजनाएं बनाया करते थे। लेकिन कुछ ही मिनटों में आग ने उन सपनों को राख कर दिया।

पंकज कहते हैं, “मैं किसी तरह बाहर निकल आया, लेकिन मेरा दोस्त नहीं बच सका। अब उसके साथ देखे सारे सपने अधूरे रह गए।”

दोस्त को खोने का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था।

धुएं ने छीनी सांसें, तार पकड़कर नीचे उतरे छात्र

गढ़वाल निवासी शैलेंद्र के लिए यह हादसा किसी युद्ध से कम नहीं था। उन्होंने बताया कि आग लगने के कुछ ही मिनटों में पूरा हॉल धुएं से भर गया।

“कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। सांस लेना मुश्किल हो गया था। दरवाजे तक पहुंचने का रास्ता बंद हो चुका था।”

जान बचाने के लिए उन्होंने खिड़की से बाहर निकलकर एसी और बिजली के तारों का सहारा लिया। तार गर्म थे और आग की चपेट में भी थे, लेकिन उनके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था। नीचे उतरते समय उनके दोनों हाथ बुरी तरह झुलस गए।

“लगा आज जिंदगी का आखिरी दिन है”

एनीमेशन सेंटर में मौजूद आसिफ अभी भी उस भयावह मंजर को याद कर कांप उठते हैं।

उन्होंने बताया कि चारों तरफ सिर्फ धुआं और आग थी। आंखों के सामने कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे।

“एक समय ऐसा लगा कि अब बचना मुश्किल है। लगा कि आज जिंदगी का आखिरी दिन है।”

आसिफ किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन उनके कई साथी आग की लपटों में फंस गए।

बाथरूम बना आखिरी सहारा

जब आग ने पूरी इमारत को घेर लिया तो कई लोगों ने खुद को बचाने के लिए बाथरूम में बंद कर लिया।

कुछ छात्र लगातार नल चलाकर पानी गिराते रहे ताकि आग और धुआं उनके पास न पहुंच सके। बाहर मौजूद लोग खिड़कियों के शीशे तोड़ने का प्रयास करते रहे, लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कोई भी प्रभावी मदद नहीं कर सका।

एसी और बिजली के तारों से लटककर बचाई जान

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग से बचने के लिए कई छात्रों ने कुर्सियों से कांच तोड़ा और खिड़कियों से बाहर निकलने की कोशिश की।

कुछ युवक एसी और बिजली के तार पकड़कर नीचे उतरने लगे। कई लोग सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि कुछ नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

छलांग लगाई, लेकिन मौत से नहीं बच सके

एक युवक ने आग और धुएं से घिरने के बाद ऊपर से छलांग लगा दी। नीचे आते समय वह बिजली के तारों से टकरा गया और संतुलन खो बैठा। वह सीधे लोहे की नुकीली रेलिंग पर जा गिरा।

स्थानीय लोगों ने उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टर उसकी जान नहीं बचा सके।

करियर बनाने आए थे, घर लौटे शव

इस हादसे में जान गंवाने वाले अधिकांश छात्र अपने परिवार की उम्मीदों का केंद्र थे। कोई एनीमेशन विशेषज्ञ बनना चाहता था, कोई प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। माता-पिता ने बेहतर भविष्य के लिए उन्हें लखनऊ भेजा था, लेकिन सोमवार की दोपहर कई घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए।

अलीगंज का यह अग्निकांड सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन सपनों की मौत की कहानी है जिन्हें पूरा करने के लिए दर्जनों युवा घर से दूर संघर्ष कर रहे थे। अब उनके कमरों में किताबें हैं, अधूरे नोट्स हैं और पीछे छूट गई हैं परिवारों की अनगिनत यादें।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button