नेतन्याहू ने अरब पार्टियों पर लगाए चुनाव में गड़बड़ी के आरोप, जांच शुरू

इस्राइल में चुनावी गड़बड़ी और विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष जस्टिस नोम सोलबर्ग ने देश की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के प्रमुख डेविड ज़िनी को इन आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया है। उन्हें एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब चुनाव के अनुमानित नतीजों के मुताबिक किसी भी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया पर उठे सवाल और सरकार बनाने के लिए नए राजनीतिक समीकरण इस्राइल की राजनीति के अहम मुद्दे बन गए हैं।

विदेशी फंडिंग के जरिए चुनाव प्रभावित करने का शक

‘टाइम्स ऑफ इस्राइल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस नोम सोलबर्ग ने शिन बेट को लिखे पत्र में कहा कि चुनाव को अनुचित तरीके से प्रभावित करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आशंका जताई गई है कि इस्राइल के हितों के खिलाफ काम करने वाली विदेशी संस्थाओं ने धन के जरिए चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की।

हालांकि, इन आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है। सोलबर्ग ने शिन बेट से अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए जरूरी सबूत जुटाने और मामले की जांच करने को कहा है। इसका उद्देश्य आरोपों की सच्चाई सामने लाना और चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखना है।

नेतन्याहू ने अरब पार्टियों पर लगाए आरोप

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आरोप लगाया है कि अरब पार्टियों ने रिश्वत, धमकी, हिंसा और धोखाधड़ी के जरिए चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी दावा किया कि मतदाताओं को जुटाने के लिए प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया।

नेतन्याहू के मुताबिक, उनकी लिकुड पार्टी कथित चुनावी अनियमितताओं से जुड़े सैकड़ों गवाहों के बयान और सबूत पुलिस, शिन बेट तथा केंद्रीय चुनाव समिति को सौंप रही है।

इन आरोपों में नकदी और राआम पार्टी की पर्चियों वाले लिफाफे मिलने, मतदान केंद्र के कर्मचारियों को धमकाने, एक से अधिक बार वोट डालने और दोहरी पहचान का इस्तेमाल करने जैसे दावे शामिल हैं। नेतन्याहू ने कुछ मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या और मतपेटियों में मिले लिफाफों की संख्या के बीच अंतर होने का भी दावा किया है।

उन्होंने संबंधित एजेंसियों से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

बहुमत से दूर नेतन्याहू का गठबंधन

चुनाव के अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 26 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। उसके सहयोगी दलों में यूनाइटेड तोराह जुडाइज़्म, शस और ओत्ज़मा येहुदित शामिल हैं।

अनुमानों के अनुसार, नेतन्याहू के पूरे गठबंधन को करीब 53 सीटें मिल सकती हैं। जबकि इस्राइल की 120 सदस्यीय संसद नेसेट में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में नेतन्याहू के गठबंधन को बहुमत हासिल करने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।

विपक्ष के सामने भी बहुमत जुटाने की चुनौती

दूसरी ओर, गादी आइसेनकोट की यशार, नफ्ताली बेनेट की ब्याचाद, एविग्डोर लिबरमैन की यिसराएल बेतेनु और यायर गोलान की द डेमोक्रेट्स से जुड़े विपक्षी खेमे को करीब 48 सीटें मिलने का अनुमान है।

वहीं, जॉइंट लिस्ट और राआम सहित अरब पार्टियों को लगभग 19 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। इन आंकड़ों के आधार पर किसी भी खेमे के लिए अपने दम पर बहुमत हासिल करना मुश्किल दिखाई देता है।

सरकार बनाने के लिए नए समीकरणों पर नजर

इस राजनीतिक स्थिति के बीच नेतन्याहू विरोधी खेमे में अरब पार्टियों का समर्थन लेकर बहुमत जुटाने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। हालांकि, सरकार बनाने के लिए किन दलों के बीच सहमति बनती है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

फिलहाल, इस्राइल में दो बड़े घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है। पहला, चुनावी गड़बड़ी और विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच क्या सामने लाती है। दूसरा, क्या कोई राजनीतिक गठबंधन नेसेट में 61 सीटों का समर्थन जुटाकर नई सरकार बना पाता है।

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